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राजस्थान: 91 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट, खर्च सिर्फ 4%... आखिर कहां तक पहुंचा राम जल सेतु?

Thu, 03 Sep 2026 03:37 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Thu, 03 Sep 2026 03:37 PM IST
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Ram Jal Setu Project: Just 4% of ₹91,663 Crore Spent So Far, 6,334 Hectares of Land Acquired
- फोटो : अमर उजाला

 राजस्थान में चंबल के अतिरिक्त पानी को पूर्वी हिस्से के जिलों तक पहुंचाने के लिए राम जल सेतु लिंक प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। करीब ₹91,662.65 करोड़ की लागत वाली इस बड़ी परियोजना पर जुलाई 2026 तक 3,629.82 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। यानी अभी तक कुल लागत का करीब 4 फीसदी ही खर्च हुआ है। लेकिन परियोजना में सिर्फ खर्च ही प्रगति का पैमाना नहीं है। इसके लिए हजारों हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण हो चुका है और दो बड़े काम भी पूरे किए जा चुके हैं। आने वाले समय में परियोजना का बड़ा हिस्सा जमीन पर उतारना बाकी है।

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6,334 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण

राम जल सेतु प्रोजेक्ट के लिए अब तक 6,334.29 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जा चुकी है। इसमें 2,217.04 हेक्टेयर निजी जमीन है। अधिग्रहित जमीन के लिए 633.21 करोड़ रुपए के अवॉर्ड जारी किए गए हैं। वहीं, 6,018 किसानों और परिवारों को 453.07 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जा चुका है।

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नवानेरा बैराज और इसरदा बांध का काम पूरा

परियोजना से जुड़े दो बड़े काम नवानेरा बैराज और इसरदा बांध पूरे हो चुके हैं। इनके अलावा पेयजल से जुड़े 24,092.84 करोड़ रुपए की लागत वाले आठ काम अभी चल रहे हैं। इन कामों को अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाना है। परियोजना के बाकी हिस्सों में निर्माण कार्य आगे बढ़ने के साथ खर्च भी तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।

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चंबल का पानी दूसरे नदी बेसिन तक पहुंचेगा

राम जल सेतु परियोजना के तहत मानसून के दौरान चंबल बेसिन में उपलब्ध अतिरिक्त पानी को दूसरे नदी बेसिन तक पहुंचाने की योजना है। इसके लिए बनास, रूपारेल, मोरेल, बाणगंगा और गंभीरी नदी बेसिन को जोड़ा जाना है। इसका मकसद पूर्वी राजस्थान में पेयजल और सिंचाई की जरूरत को पूरा करना है।

17 जिलों को मिलेगा पेयजल का फायदा

परियोजना से 17 जिलों को पेयजल सुविधा मिलने का प्रस्ताव है। इनमें झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, अजमेर, ब्यावर, टोंक, जयपुर, कोटपूतली-बहरोड़, दौसा, करौली, अलवर, खैरथल-तिजारा, भरतपुर, डीग और धौलपुर शामिल हैं। इसके साथ ही परियोजना के तहत करीब 4.98 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का प्रावधान किया गया है। यानी परियोजना पूरी होने पर इसका असर शहरों के साथ गांवों और खेती पर भी पड़ेगा।

PKC-ERCP का हिस्सा है परियोजना

राम जल सेतु का कुल बजट करीब 91,663 करोड़ रुपए है, जबकि अब तक करीब 3,630 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। इसका मतलब है कि परियोजना के कुल खर्च का बड़ा हिस्सा अभी बाकी है। जमीन अधिग्रहण और कुछ बड़े काम पूरे होने के बाद अब परियोजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती निर्माण कार्यों को तेजी से पूरा करने की है। खासकर उन ढांचों का निर्माण महत्वपूर्ण होगा, जिनके जरिए चंबल का पानी दूसरे नदी बेसिन और फिर लोगों तक पहुंचाया जाना है।राम जल सेतु लिंक प्रोजेक्ट संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल (PKC-ERCP) एकीकृत परियोजना का हिस्सा है। केंद्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच इस परियोजना को लेकर 28 जनवरी 2024 को एमओयू हुआ था। इसके बाद 5 दिसंबर 2024 को एमओए किया गया।

 

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