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राजस्थान विश्वविद्यालय: छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर छात्र ने लिया अनोखा कदम, जमीन में समाधि ली

Fri, 18 Jul 2025 06:53 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: शबाहत हुसैन Updated Fri, 18 Jul 2025 06:53 PM IST
सार

Rajasthan: गजराज ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मनमानी के आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि छात्रसंघ केवल छात्रों के अधिकारों की रक्षा का मंच नहीं होता, बल्कि यह विश्वविद्यालय में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने का भी माध्यम होता है।

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Rajasthan University: Student took a unique step demanding student union elections
जमीन में समाधि ली - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव की बहाली की मांग को लेकर छात्र गजराज राठौर ने एक अनोखा और प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन शुरू किया है। उन्होंने खुद के लिए जमीन में एक गड्ढा खोदकर उसमें ‘धरना-समाधि’ ले ली है। गजराज का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांग नहीं मानती या कोई जिम्मेदार अधिकारी उनसे संवाद नहीं करता, वे इसी स्थिति में डटे रहेंगे।

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छात्र राजनीति को खत्म करने की साजिश: गजराज
अमर उजाला से बातचीत में गजराज राठौर ने कहा कि छात्रसंघ चुनावों पर रोक पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कार्यकाल में लगी थी, जो अब तक जारी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अशोक गहलोत खुद छात्र राजनीति से निकलकर मुख्यमंत्री बने, तो नई पीढ़ी के लिए यह रास्ता बंद क्यों किया गया? गजराज ने कहा कि प्रदेश के अधिकांश बड़े नेता छात्र राजनीति की देन हैं। सरकारें छात्रसंघ चुनाव से इसलिए घबराती हैं क्योंकि वे नहीं चाहतीं कि सामान्य छात्र राजनीतिक मंच पर उभरें। यह राजनीतिक परिवारों की विरासत बचाने की एक रणनीति है।

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विश्वविद्यालय प्रशासन पर भी लगाए आरोप
गजराज ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मनमानी के आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि छात्रसंघ केवल छात्रों के अधिकारों की रक्षा का मंच नहीं होता, बल्कि यह विश्वविद्यालय में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने का भी माध्यम होता है। गजराज की यह ‘धरना-समाधि’ विश्वविद्यालय परिसर में चर्चा का विषय बन गई है। कई छात्र संगठन और स्वतंत्र छात्र नेता उनके समर्थन में आ चुके हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि छात्रसंघ चुनाव न होने से छात्रों की आवाज दब रही है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया कमजोर हो रही है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर अब तक विश्वविद्यालय प्रशासन या राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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