जयपुर: जेन जी के सहारे नई सियासी जमीन तलाश रही कांग्रेस, AI से बेरोजगारी तक युवाओं के मुद्दों पर सरकार को घेरा
कांग्रेस ने ‘Gen Z for Change’ कार्यक्रम में AI, रोजगार, शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के मुद्दे उठाकर युवाओं को राजनीतिक रूप से जोड़ने और सरकार को घेरने की रणनीति दिखाई।
विस्तार
राजस्थान कांग्रेस अब राजनीति की अगली पीढ़ी यानी Gen Z के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुट गई है। बुधवार को कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित ‘Gen Z for Change’ कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए। मंच से कांग्रेस नेताओं ने युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा।
कार्यक्रम में कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत, युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने युवाओं से संवाद किया। चर्चा का केंद्र पारंपरिक राजनीतिक मुद्दों के बजाय AI, रोजगार, शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव और राजनीति में युवाओं की भागीदारी रहा। कांग्रेस ने इस कार्यक्रम के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि नई पीढ़ी के सवालों को अब पार्टी के राजनीतिक एजेंडे में ज्यादा प्रमुखता दी जाएगी।
जूली बोले- AI से डरने के बजाय इसे समझना होगा
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि मौजूदा दौर Gen Z का है और यह पीढ़ी तकनीक में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजगार से लेकर उद्योग तक हर क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है।
जूली ने युवाओं से AI को खतरे के रूप में देखने के बजाय इसकी संभावनाओं को समझने की अपील की। उन्होंने कहा कि जिस तरह कंप्यूटर क्रांति ने देश में रोजगार और उद्योग की दिशा बदली थी, उसी तरह AI आने वाले समय में काम करने के तौर-तरीकों को बदल सकता है।
राजीव गांधी और कंप्यूटर का जिक्र कर भाजपा पर निशाना
जूली ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में कंप्यूटर को बढ़ावा देने का जिक्र करते हुए भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उस समय कंप्यूटर का विरोध किया गया, लेकिन बाद में इसी तकनीक ने देश में आईटी सेक्टर और रोजगार के नए अवसर पैदा किए।
उन्होंने कहा कि आज AI को लेकर भी इसी तरह की चुनौती है। युवाओं को बदलती तकनीक के हिसाब से तैयार करना होगा, क्योंकि भविष्य में वही युवा आगे रहेंगे जो नई तकनीक को समझकर उसका इस्तेमाल कर सकेंगे।
कोचिंग और प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव का मुद्दा
जूली ने राजस्थान के कोटा कोचिंग सिस्टम का उदाहरण देते हुए कहा कि लाखों युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन सीमित सीटों के कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को सफलता नहीं मिल पाती।
उन्होंने कहा कि कई परिवार बच्चों की कोचिंग पर लाखों रुपये खर्च करते हैं। दो-दो साल की तैयारी के बाद भी चयन नहीं होने पर युवा आर्थिक और मानसिक दबाव में आ जाते हैं। उनके मुताबिक देश के पास बड़ी युवा आबादी है, लेकिन इस मानव संसाधन को शिक्षा, कौशल और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है।
‘Gen Z ने सरकारों को झुकने पर मजबूर किया’
जूली ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में हुए Gen Z आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि नई पीढ़ी ने अपनी ताकत दिखाई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा और कहा कि अब सरकार Gen Z तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जबकि राहुल गांधी लंबे समय से युवाओं से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं।
जूली ने आर्थिक नीतियों और महंगाई के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने एथेनॉल मिश्रण और चीनी की कीमतों का उदाहरण देते हुए नीतियों में विरोधाभास का आरोप लगाया। साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और पुराने राजनीतिक दावों को लेकर भी केंद्र सरकार पर हमला बोला।
डोटासरा बोले- 18 साल में वोट का अधिकार तो भविष्य पर आवाज क्यों नहीं?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने युवाओं की राजनीतिक भागीदारी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जब 18 साल की उम्र में युवा सरकार चुनने के लिए वोट दे सकता है, तो उसके भविष्य से जुड़े फैसलों में उसकी आवाज क्यों नहीं होनी चाहिए।
डोटासरा ने कहा कि सरकारें नीतियां बनाती हैं, लेकिन उन नीतियों का सबसे ज्यादा असर युवाओं के भविष्य पर पड़ता है। इसलिए शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास जैसे मुद्दे राजनीतिक एजेंडे के केंद्र में होने चाहिए।
उन्होंने कहा कि ऐसी शिक्षा व्यवस्था की जरूरत है, जिसमें गरीब परिवार का बच्चा भी अच्छी यूनिवर्सिटी में पढ़ सके और अपने भविष्य का निर्माण कर सके। प्रतियोगी परीक्षाओं में लाखों अभ्यर्थियों और सीमित सीटों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा का जिक्र करते हुए उन्होंने बेरोजगारी को बड़ी चुनौती बताया।
शिक्षा में विचारधारा के दखल का आरोप
डोटासरा ने राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी राज्य सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा के क्षेत्र में संघ की विचारधारा को बढ़ावा दिया जा रहा है और स्कूलों में संघ से जुड़ी किताबें बांटी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल बच्चों के भविष्य निर्माण की जगह हैं और वहां राजनीतिक विचारधारा का प्रभाव नहीं होना चाहिए।
निकाय चुनाव में युवाओं को 60 फीसदी टिकट का दावा
डोटासरा ने कांग्रेस संगठन में युवाओं की भागीदारी का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि राजस्थान में निकाय चुनाव के दौरान पार्टी ने 60 फीसदी युवाओं को टिकट देने का काम किया है। उनके मुताबिक पार्टी संगठन में नई पीढ़ी को आगे लाने की दिशा में लगातार काम कर रही है।
कांग्रेस की रणनीति- युवाओं के नए सवालों को राजनीति का केंद्र बनाना
‘Gen Z for Change’ कार्यक्रम को कांग्रेस की युवा-केंद्रित राजनीति की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी ने युवाओं के बीच अपनी बात रखने के लिए AI, रोजगार, शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और राजनीतिक भागीदारी जैसे मुद्दों को चुना।
यानी कांग्रेस का फोकस अब सिर्फ पारंपरिक राजनीतिक मुद्दों तक सीमित रखने के बजाय उन सवालों को राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाने पर है, जिनसे नई पीढ़ी सीधे प्रभावित हो रही है। Gen Z को संगठन और राजनीति से जोड़ना कांग्रेस की इस पूरी कवायद का बड़ा सियासी लक्ष्य माना जा रहा है।