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Udaipur News: देबारी में पैंथर की चहल-कदमी से दहशत, ग्रामीणों ने पिंजरा लगाने की मांग की

Fri, 18 Jul 2025 06:23 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर Published by: शबाहत हुसैन Updated Fri, 18 Jul 2025 06:23 PM IST
सार

Udaipur: देबारी के उप सरपंच चंदन सिंह देवड़ा ने बताया कि सकदर क्षेत्र के पास ही घना जंगल और पैंथर कंजर्वेशन एरिया स्थित है। यह इलाका वन्यजीवों के लिए सुरक्षित क्षेत्र माना जाता है, लेकिन अब यह इंसानों के लिए खतरे का कारण बनता जा रहा है।

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Panic due to movement of panther in Debari, villagers demanded to install cage
पैंथर की चहलकदमी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शहर से सटे देबारी गांव के सकदर क्षेत्र में शुक्रवार सुबह एक पैंथर के देखे जाने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई। यह घटना उस समय सामने आई जब एक कार चालक सड़क से गुजर रहा था और उसने पैंथर को सड़क किनारे टहलते हुए देखा। चालक ने इस दृश्य को अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया। पैंथर का यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

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वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि पैंथर झाड़ियों से निकलकर सड़क किनारे आता है, लेकिन जैसे ही कार की आवाज सुनाई देती है, वह तुरंत जंगल की ओर भाग जाता है। गनीमत रही कि इस दौरान किसी व्यक्ति या मवेशी को कोई नुकसान नहीं हुआ।

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ग्रामीणों का कहना है कि देबारी और आसपास के क्षेत्रों में पैंथरों की आवाजाही अब आम हो गई है। देबारी के उप सरपंच चंदन सिंह देवड़ा ने बताया कि सकदर क्षेत्र के पास ही घना जंगल और पैंथर कंजर्वेशन एरिया स्थित है। यह इलाका वन्यजीवों के लिए सुरक्षित क्षेत्र माना जाता है, लेकिन अब यह इंसानों के लिए खतरे का कारण बनता जा रहा है।

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देवड़ा ने बताया कि बीते कुछ महीनों में क्षेत्र में पैंथर की गतिविधियां काफी बढ़ गई हैं और कई बार ग्रामीणों ने इन्हें गांव की सीमाओं के भीतर भी देखा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण लगातार वन विभाग को इस संबंध में सूचित कर चुके हैं लिखित और मौखिक दोनों रूपों में। ग्रामीणों की मांग है कि क्षेत्र में पैंथर को पकड़ने के लिए पिंजरे लगाए जाएं, रात्रिकालीन गश्त बढ़ाई जाए और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं, ताकि लोग सतर्क रह सकें।

हालांकि, अब तक वन विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इस निष्क्रियता को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों, मवेशियों और राहगीरों की सुरक्षा खतरे में पड़ती जा रही है। यदि समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए गए तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।

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