राजस्थान: जयपुर के चौमू हाऊस में पेड़ों की कटाई पर एनजीटी का आदेश; राज्य के सभी पेड़ों की जियो-टैगिंग अनिवार्य
एनजीटी ने राजस्थान में सभी पेड़ों की जियो-टैगिंग और शहरों-जिलों में पेड़ों की गणना कराने के निर्देश दिए हैं। 25 से ज्यादा पेड़ काटने के प्रस्तावों की जांच समिति करेगी। यह आदेश जयपुर के चोमू हाउस पार्क में करीब 800 पेड़ों की कथित अवैध कटाई के मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया।
विस्तार
राजस्थान में पेड़ों की सुरक्षा को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने राज्य सरकार को प्रदेशभर में पेड़ों की गणना कराने और सभी पेड़ों की जियो-टैगिंग करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही 25 से ज्यादा पेड़ काटने की अनुमति मांगने वाले प्रस्तावों की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने को कहा है। समिति को पेड़ काटने की जरूरत और उसके औचित्य की पड़ताल करनी होगी। साथ ही यह भी देखना होगा कि पेड़ों को बचाने के लिए कोई दूसरा विकल्प अपनाया जा सकता है या नहीं।
एनजीटी की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बेंच ने दो नवंबर को अनिल कुमार शर्मा की ओर से राजस्थान सरकार और अन्य के खिलाफ दायर आवेदन पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए। मामला जयपुर के सी-स्कीम स्थित चोमू हाउस के एक सार्वजनिक पार्क में करीब 800 हरे-भरे पेड़ों की कथित अवैध कटाई से जुड़ा है।
25 से ज्यादा पेड़ काटने के प्रस्ताव की जांच करेगी समिति
ट्रिब्यूनल ने राजस्थान के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) को उच्चस्तरीय सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) गठित करने का निर्देश दिया है। यह समिति 25 से अधिक पेड़ काटने से जुड़े प्रस्तावों की जरूरत और औचित्य की जांच करेगी। अनुमति की सिफारिश करने से पहले समिति को पेड़ों की कटाई कम करने या पूरी तरह रोकने के विकल्प भी तलाशने होंगे।
एनजीटी ने यह भी कहा कि पेड़ काटने की अनुमति मिलने पर क्षतिपूरक पौधरोपण कराया जाए। लगाए गए पौधों के जीवित रहने और बढ़ने की निगरानी कम से कम पांच साल तक होनी चाहिए। समिति को स्थानीय परिस्थितियों और जमीन की उपलब्धता के आधार पर काटे गए पेड़ों की संख्या से 10 से 100 गुना तक पौधे लगाने के विकल्प पर भी विचार करना होगा।
सभी पेड़ों की होगी जियो-टैगिंग, सार्वजनिक होगा रिकॉर्ड
एनजीटी ने राज्य के सभी पेड़ों की जियो-टैगिंग अनिवार्य करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत हर पेड़ की लोकेशन, प्रजाति और संख्या का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। यह जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराने के साथ मुख्य वन संरक्षक कार्यालय के साथ भी साझा करनी होगी।
ट्रिब्यूनल ने सभी शहरों और जिलों में पेड़ों की व्यापक गणना कराने को भी कहा है। इस काम की निगरानी पीसीसीएफ या उनके नामित अधिकारी करेंगे। इससे प्रदेश में पेड़ों की वास्तविक संख्या का रिकॉर्ड तैयार होगा और पेड़ों की संख्या में होने वाले बदलाव पर नजर रखी जा सकेगी।
अवैध कटाई पर रोक लगाने की जिम्मेदारी जिला कलेक्टरों को
एनजीटी ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना किसी भी पेड़ की कटाई नहीं हो। पीसीसीएफ को भी संबंधित कानूनों और नियमों का सख्ती से पालन कराने तथा अवैध कटाई की किसी भी घटना पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
ट्रिब्यूनल ने क्षतिपूरक पौधरोपण को केवल संख्या पूरी करने की प्रक्रिया मानने से भी आगाह किया। उसने कहा कि पुराने और विकसित पेड़ों से खोई हरियाली को दोबारा तैयार होने में 70 से 100 साल तक लग सकते हैं। इसलिए पर्यावरणीय नुकसान का आकलन करते समय पेड़ों के दोबारा विकसित होने में लगने वाले समय और उनके पूरे जीवनकाल में मिलने वाली ऑक्सीजन को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
चोमू हाउस पार्क की जांच के लिए संयुक्त कमेटी गठित
चोमू हाउस पार्क में पेड़ों की कथित कटाई के मामले में एनजीटी ने संयुक्त कमेटी गठित की है। इसमें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक, जयपुर जिला कलेक्टर और राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (आरएसपीसीबी) के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
कमेटी को मौके का निरीक्षण कर छह सप्ताह में तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करनी होगी। रिपोर्ट में अब तक की गई कार्रवाई का ब्योरा भी देना होगा। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल को कमेटी की नोडल एजेंसी बनाया गया है।
आवेदन में 800 पेड़ों की कटाई का आरोप
आवेदक ने आरोप लगाया कि सार्वजनिक पार्क में करीब 800 पूरी तरह विकसित हरे पेड़ों को जरूरी वैधानिक अनुमति के बिना काटा जा रहा था। आवेदन के अनुसार, इस जमीन का आवंटन मूल रूप से ठाकुर राज सिंह ने किया था और वर्ष 1960 से इसका उपयोग सार्वजनिक पार्क के रूप में हो रहा है।
आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ अनधिकृत लोगों ने जयपुर विकास प्राधिकरण की चारदीवारी तोड़कर संबंधित अधिकारियों की मंजूरी के बिना बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई शुरू कर दी। इसमें राजस्थान में घटते हरित क्षेत्र, वन भूमि पर अतिक्रमण और पर्यावरण संरक्षण कानूनों के कमजोर क्रियान्वयन का मुद्दा भी उठाया गया। एनजीटी की पीठ में न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी शामिल थे। मामले में अगली सुनवाई 16 दिसंबर 2026 को होगी।