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Rajasthan TB cases: अब कफ सिरप खरीदने पर देना होगा फोन नंबर – ICMR रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

Wed, 27 Aug 2025 10:14 AM IST
सौरभ भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: सौरभ भट्ट Updated Wed, 27 Aug 2025 10:14 AM IST
सार

Rajasthan TB cases: राजस्थान में बड़ी संख्या में मरीज कॉफ सिरप खरीद कर खुद ही टीबी का इलाज कर रहे हैं।  इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा किया है। इसलिए अब कॉफ सिरप खरीद के  मरीज को फोन नम्बर एड्रेस देना होगा।
 

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Rajasthan TB Cases: Phone Number Now Mandatory to Buy Cough Syrup – Shocking ICMR Report
Rajasthan TB cases - फोटो : amar ujala

विस्तार

राजस्थान में टीबी  यानी क्षय रोग के मरीजों की वास्तविक संख्या सरकार कागजों में रजिस्टर्ड टीबी के मरीजों के आंकड़े से कहीं ज्यादा है। यह चौंकाने वाली जानकारी  इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के सर्वे में सामने आई है। यहां टीबी के इलाज के लिए लोग बड़ी संख्या में कफ सिरप काम में ले रहे हैं। जबकि इस बीमारी का इलाज लंबे समय तक चलता है और विशेष प्रकार की दवाइयां इस रोग  को खत्म करने के लिए उपयोग में लाई जाती है।
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ऐसे में अब राजस्थान में टीबी के मरीजों की असल संख्या जानने के लिए ICMR की तरफ से एक पॉयलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है।  इस प्रोजेक्ट के तहत सर्वे कराया जा रहा है,जिसमें मरीजों को दिए जाने वाले कफ सिरप से टीबी की संभावना का पता लगाया जाएगा।
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 राजस्थान में इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही डॉ कलिका का कहना है की इस प्रोजेक्ट में पहले फेज में राजस्थान के 33 जिलों से कफ सिरप का डेटा तैयार किया जा रहा है ताकि पता लग सके कि कफ सिरप की बिक्री कितनी मात्रा में हो रही है,यह डेटा प्रदेश के लगभग सभी मेडिकल स्टोर से जुटाया जा रहा है,इसमें चिकित्सा विभाग का ड्रग डिपार्टमेंट सक्रिय भूमिका निभा रहा है, टीबी नियंत्रण कार्यक्रम के लिए यह कदम अहम माना जा रहा है, क्योंकि प्रदेश में अब भी बड़ी संख्या में मरीज या तो देर से रिपोर्ट करते हैं या फिर अपनी बीमारी को छुपा रहे है और इसके कारण संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
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7 गुना ज्यादा 
डॉ कलिका ने बताया कि जब हमने सर्वे किया तो सामने आया कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग है जो कफ सिरप खरीद रहे हैं। उन्होंने कहा की राजस्थान में जितने टीबी के रजिस्टर्ड मरीज है उनसे सात गुना ज्यादा संख्या टीबी मरीजों की है, और यह कफ सिरप की की खरीद के आंकड़ों से सामने आया है। सर्वे में पता चला है कि  मेडिकल स्टोर्स पर कफ सीरप की खपत बहुत ज़्यादा बढ़ गई है,इसे लेकर चिकित्सा विभाग के ड्रग डिपार्टमेंट के साथ मिलकर टीबी के मरीजों की पहचान की जाएगी, राजस्थान में प्रोजेक्ट सफल रहने पर  ICMR  इसे पूरे देश में चलाएगा ।

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कफ सिरप के लिए अब देना होगा मरीज को फोन नम्बर एड्रेस
मामले को लेकर राजस्थान के ड्रग कंट्रोलर राजा राम शर्मा का कहना है कि ICMR के साथ मिलकर टीबी रोगियों की पहचान की जाएगी, इसे लेकर डिपार्टमेंट एक आदेश जारी करने जा रहा है जिसके तहत मेडिकल स्टोर्स से कफ सिरप खरीद करने वालो का रिकॉर्ड रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि जयपुर से पायलेट प्रोजेक्ट की शुरुआत हो रही है। अब  कफ सिरप की खरीद करने पर मरीज को फोन नम्बर एड्रेस देना होगा। इसके लिए प्रदेश की मेडिकल स्टोर्स को भी निर्देश जारी किए जाएगे। राजस्थान में फिलहाल करीब 60 हजार मेडिकल स्टोर्स हैं।  राजाराम शर्मा का कहना है की इसको लेकर तैयारी शुरू कर दी गई है,प्रदेश में टीबी को ख़त्म करने के लिए चिकित्सा लगातार प्रयास कर रहा है इसे लेकर ड्रग विभाग के अधिकारियो को ट्रेनिंग भी दी जाएगी, एक बार रिकॉर्ड मिलने के बाद ऐसे मरीज़ों के घर जाकर स्क्रीनिंग की जाएगी और उसके सैंपल लिए जाएंगे

जानकारी नहीं दे रहे मरीज
हाल ही में चिकित्सा विभाग द्वारा टीबी मुक्त ग्राम पंचायत अभियान के तहत वर्ष 2024 में राजस्थान की 3,355 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया है, जबकि वर्ष 2023 में यह संख्या 586 थी। लेकिन फिर भी टीबी जैसी गंभीर बीमारी के बारे में अभी भी लोग जानकारी नहीं दे रहे हैं।  लोग सीधे मेडिकल स्टोर से कफ सिरप ख़रीद कर बीमारी का इलाज करने का प्रयास कर रहे हैं। जबकि इस बीमारी का इलाज लंबे समय तक चलता है और विशेष प्रकार की दवाइयां इस रोग  को खत्म करने के लिए उपयोग में लाई जाती है।




टीबी बीमारी क्या है
टीबी यानि क्षय रोग एक संक्रामक रोग है, जो कीटाणु के कारण होता है। टीबी बैक्टीरिया से संक्रमित लोगों को टीबी से बीमार होने का जोखिम जीवन भर 5-10% रहता है।टीबी के लक्षणों की बात करें तो 
* तीन सप्ताह से ज्यादा खांसी
* बुखार विशेष तौर से शाम को बढने वाला बुखार
* छाती में दर्द
* वजन का घटना
* भूख में कमी
* बलगम के साथ खून आना

टीबी होने के कारण 
*
धूम्रपान करना 
* वायु प्रदुषण के कारण 
* कुपोषित या ऐसे लोग जिनकी इम्युनिटी कमजोर है 
* जिन्हें मधुमेह है 
* एचआईवी और एड्स ग्रसित मरीजों को 

अन्य अंगो को प्रभावित 
टी.बी रोग विशेषकर (85 प्रतशित) फेंफडों को ग्रसित करता है।  करीब 15 प्रतिशत मामलों में शरीर के अन्य अंग जैसे, मस्तिष्क,  आंतें,  गुर्दे,  हड्डी व जोड इत्यादि भी रोग से ग्रसित होते हैं। टीबी रोग के निदान के लिये एक्स-रे करवाना, बलगम की जांच करवाना होता है। कई मामलों में इसकी जांच के लिए एक्स-रे व अन्य जॉंच जैसे FNAC, Biopsy, CT Scan की आवश्यकता हो सकती है।
 
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