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Ganesh Chaturthi: शादी की आस लिए गणपति के द्वार पहुंचे सैकड़ों कुंवारे, यहां प्रसाद के रूप में बंटती है मेहंदी
Wed, 27 Aug 2025 07:58 AM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Wed, 27 Aug 2025 07:58 AM IST
सार
एक अनूठी धार्मिक मान्यता के चलते हर साल गणेश चतुर्थी पर मोती डूंगरी और नहर के गणेश मंदिर एक खास दृश्य देखने को मिलता है। कुंवारे युवक-युवतियों के हाथों में मेहंदी सजती है और बप्पा के आशीर्वाद से उनके दिलों में विवाह की राह आसान होने की उम्मीद जगती है।
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मोती डूंगरी गणेश मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
गणेश चतुर्थी के अवसर पर शहर के जाने-माने मोती डूंगरी मंदिर और नहर के गणेश मंदिर में भगवान श्री गणेश को चढ़ने वाली मेहंदी कुंवारे युवक-युवतियों के बीच गणपति की मेहंदी विशेष आकर्षण का केंद्र बनी रहती है। धार्मिक मान्यता है कि गणपति जी को चढ़ाई गई मेहंदी यदि कोई अविवाहित युवक या युवती अपने हाथों पर लगाता है तो उसका विवाह अगली गणेश चतुर्थी से पहले संपन्न हो जाता है।
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यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और अब युवाओं में आस्था और आशा का संगम बन चुकी है। गणपति मंदिरों में इन दिनों कुंवारे युवक-युवतियों की भीड़ उमड़ रही है। मेहंदी को प्रसाद स्वरूप पाने के लिए घंटों लंबी कतारों में खड़े रहना पड़ता है। बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिरों में स्वयंसेवक युवाओं के हाथों पर वहीं मेहंदी लगा देते हैं।
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युवाओं से बातचीत में अलग-अलग भावनाएं सामने आईं। कुछ ने माना कि वे केवल माता-पिता की इच्छा पूरी करने आए हैं, तो कुछ ने चुपचाप इसे विवाह की मंजूरी के संकेत के रूप में स्वीकार किया। वहीं कई युवाओं ने साफ कहा कि पढ़ाई, करियर और स्थिर जीवन की प्राथमिकता के चलते विवाह टल रहा है। आंकड़े बताते हैं कि पहले जहां विवाह की औसत उम्र 25 साल थी, अब यह बढ़कर 30 से ऊपर हो गई है। यही वजह है कि कई 30 पार युवक और युवतियां भी इस परंपरा से उम्मीदें बांधे मंदिर पहुंच रहे हैं।
आस्था हो या मजबूरी लेकिन युवाओं की भीड़ यह दर्शाती है कि विवाह आज भी जीवन का अहम पड़ाव माना जाता है। गणपति की मेहंदी उनके लिए न सिर्फ आस्था का प्रतीक है बल्कि घर बसाने की अधूरी ख्वाहिश को पूरा करने की उम्मीद भी। इस गणेश चतुर्थी पर हर कोई यही प्रार्थना कर रहा है कि अगली चतुर्थी तक बप्पा के आशीर्वाद से वे जीवनसाथी संग मंदिर में माथा टेकें।