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राजस्थान: जीएसटी चोरी सिंडिकेट का पर्दाफाश, दिल्ली में 4.58 करोड़ रुपये की नकदी जब्त
Sun, 01 Nov 2026 05:19 PM IST
प्रतीक कुमार पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रतीक कुमार पाण्डेय
Updated Sun, 01 Nov 2026 05:19 PM IST
सार
डीजीजीआई जयपुर जोन की टीम ने फर्जी जीएसटी बिलिंग और इनपुट टैक्स क्रेडिट के जरिए कथित टैक्स चोरी करने वाले संगठित सिंडिकेट का खुलासा किया है। दिल्ली में तीन दिन तक चली छापेमारी के दौरान रोहिणी निवासी कारोबारी विपुल गोयल के कार्यालय से 4 करोड़ 58 लाख 60 हजार रुपये नकद जब्त किए गए। लैपटॉप, मोबाइल फोन, चेकबुक और कारोबारी दस्तावेज भी कब्जे में लिए गए हैं।
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अपराध
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
वस्तु एवं सेवा कर आसूचना महानिदेशालय (डीजीजीआई) की जयपुर जोन इकाई ने फर्जी बिलिंग और इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के जरिये करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी करने वाले एक बड़े संगठित सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। जांच दल ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस सिंडिकेट से जुड़े विभिन्न लोगों और उनके ठिकानों पर लगातार तीन दिन तक विस्तृत छापेमारी और तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान सिंडिकेट के बैंकिंग लेन-देन और नकदी से जुड़े एक कार्यालय की तलाशी में 4 करोड़ 58 लाख 60 हजार रुपये की नकद राशि जब्त की गई है।
बिना आपूर्ति जारी होते थे फर्जी जीएसटी बिल
जांच अधिकारियों को फर्जी जीएसटी बिलिंग, बिना किसी वास्तविक सामान की आपूर्ति किए व्यापारियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट उपलब्ध कराने और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि यह संगठित सिंडिकेट कथित तौर पर बिना किसी वास्तविक माल अथवा सामग्री की आपूर्ति किए केवल कागजों पर फर्जी जीएसटी बिल जारी करता था। इन फर्जी बिलों के माध्यम से बाजार के विभिन्न व्यापारियों को अवैध रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ मुहैया कराया जाता था।
आरटीजीएस से मिली राशि की कैश में वापसी
जांच में यह तथ्य भी उजागर हुआ है कि यह सिंडिकेट रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरटीजीएस) के जरिये बैंक खातों में होने वाले लेन-देन के एवज में संबंधित व्यापारियों तक नकद राशि वापस पहुंचाने की समानांतर व्यवस्था भी संचालित कर रहा था। व्यापारियों से आरटीजीएस के माध्यम से राशि बैंक खातों में प्राप्त की जाती थी और फिर उस राशि के बदले व्यापारियों तक कैश वापस पहुंचाने का काम किया जाता था।
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दिल्ली के रोहिणी निवासी कारोबारी की भूमिका उजागर
इस संगठित सिंडिकेट के पूरे फाइनेंस नेटवर्क की गहन जांच-पड़ताल के दौरान दिल्ली के रोहिणी निवासी विपुल गोयल की प्रमुख भूमिका सामने आई है। प्राथमिक जांच के अनुसार विपुल गोयल कथित तौर पर आरटीजीएस के बदले व्यापारियों को नकदी उपलब्ध कराने की इस पूरी व्यवस्था से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ था।
इसी सिलसिले में जांच टीम ने जब विपुल गोयल के कार्यालय परिसर की गहन तलाशी ली, तो वहां से 4 करोड़ 58 लाख 60 हजार रुपये की नकद राशि बरामद की गई। अधिकारियों ने मौके से एक लैपटॉप, कई मोबाइल फोन, बहुत बड़ी संख्या में बैंक चेकबुक और विभिन्न व्यावसायिक फर्मों से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जब्त किए हैं।
डिजिटल उपकरणों और कागजातों का गहन विश्लेषण
जांच टीम अब इस सिंडिकेट के अन्य सदस्यों, फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ प्राप्त करने वाले लाभार्थी व्यापारियों, बैंकिंग लेन-देन और नकदी के प्रवाह से जुड़े व्यक्तियों की भूमिका की बारीक जांच कर रही है।
कार्रवाई के दौरान जब्त किए गए सभी डिजिटल उपकरणों, लैपटॉप, मोबाइल और विभिन्न फर्मों से संबंधित दस्तावेज का गहन तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है। जांच अधिकारियों का कहना है कि इन जब्त उपकरणों और अभिलेखों के विस्तृत अध्ययन से सिंडिकेट के संचालन के पूरे नेटवर्क, करोड़ों रुपये की संदिग्ध जीएसटी चोरी और वित्तीय लेन-देन के संबंध में कई अन्य महत्वपूर्ण तथा नए तथ्य सामने आने की संभावना है।
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बिना आपूर्ति जारी होते थे फर्जी जीएसटी बिल
जांच अधिकारियों को फर्जी जीएसटी बिलिंग, बिना किसी वास्तविक सामान की आपूर्ति किए व्यापारियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट उपलब्ध कराने और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि यह संगठित सिंडिकेट कथित तौर पर बिना किसी वास्तविक माल अथवा सामग्री की आपूर्ति किए केवल कागजों पर फर्जी जीएसटी बिल जारी करता था। इन फर्जी बिलों के माध्यम से बाजार के विभिन्न व्यापारियों को अवैध रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ मुहैया कराया जाता था।
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आरटीजीएस से मिली राशि की कैश में वापसी
जांच में यह तथ्य भी उजागर हुआ है कि यह सिंडिकेट रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरटीजीएस) के जरिये बैंक खातों में होने वाले लेन-देन के एवज में संबंधित व्यापारियों तक नकद राशि वापस पहुंचाने की समानांतर व्यवस्था भी संचालित कर रहा था। व्यापारियों से आरटीजीएस के माध्यम से राशि बैंक खातों में प्राप्त की जाती थी और फिर उस राशि के बदले व्यापारियों तक कैश वापस पहुंचाने का काम किया जाता था।
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दिल्ली के रोहिणी निवासी कारोबारी की भूमिका उजागर
इस संगठित सिंडिकेट के पूरे फाइनेंस नेटवर्क की गहन जांच-पड़ताल के दौरान दिल्ली के रोहिणी निवासी विपुल गोयल की प्रमुख भूमिका सामने आई है। प्राथमिक जांच के अनुसार विपुल गोयल कथित तौर पर आरटीजीएस के बदले व्यापारियों को नकदी उपलब्ध कराने की इस पूरी व्यवस्था से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ था।
इसी सिलसिले में जांच टीम ने जब विपुल गोयल के कार्यालय परिसर की गहन तलाशी ली, तो वहां से 4 करोड़ 58 लाख 60 हजार रुपये की नकद राशि बरामद की गई। अधिकारियों ने मौके से एक लैपटॉप, कई मोबाइल फोन, बहुत बड़ी संख्या में बैंक चेकबुक और विभिन्न व्यावसायिक फर्मों से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जब्त किए हैं।
डिजिटल उपकरणों और कागजातों का गहन विश्लेषण
जांच टीम अब इस सिंडिकेट के अन्य सदस्यों, फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ प्राप्त करने वाले लाभार्थी व्यापारियों, बैंकिंग लेन-देन और नकदी के प्रवाह से जुड़े व्यक्तियों की भूमिका की बारीक जांच कर रही है।
कार्रवाई के दौरान जब्त किए गए सभी डिजिटल उपकरणों, लैपटॉप, मोबाइल और विभिन्न फर्मों से संबंधित दस्तावेज का गहन तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है। जांच अधिकारियों का कहना है कि इन जब्त उपकरणों और अभिलेखों के विस्तृत अध्ययन से सिंडिकेट के संचालन के पूरे नेटवर्क, करोड़ों रुपये की संदिग्ध जीएसटी चोरी और वित्तीय लेन-देन के संबंध में कई अन्य महत्वपूर्ण तथा नए तथ्य सामने आने की संभावना है।