Rajasthan Politics: सचिन पायलट की प्रेस कॉन्फ्रेंस के सियासी मायने, विधानसभा चुनाव में हो सकता है बड़ा नुकसान
Rajasthan Politics: पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने राजस्थान में अपनी ही सरकार और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को कर्नाटक विधानसभा चुनाव से ठीक एक दिन पहले घेरा है। साथ ही सीधे तौर पर कई मामलों में कांग्रेस पार्टी को बैकफुट पर ला दिया है।
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कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी माउंटआबू में कांग्रेस के ट्रेनिंग कैंप को संबोधित किए। इस कार्यक्रम में सचिन पायलट को नहीं बुलाया गया है। निश्चित रूप से राहुल गांधी तक भी यह मुद्दा पहुंचेगा। पायलट ने भी सीएम अशोक गहलोत की तरह मैसेज देने की राजनीति की है। लेकिन माना यह जा रहा है कि इससे राजस्थान में ही नहीं, बल्कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस पार्टी को एक बड़ा नुकसान हो सकता है। क्योंकि सचिन पायलट यूथ के लीडर कहे जाते हैं और बड़ी संख्या में देश भर में नौजवान उन्हें फॉलो करते हैं।
वहीं, दूसरी ओर सचिन पालयट ने राजस्थान की जनता में भी यह मैसेज देने की कोशिश की है कि सीएम गहलोत की ओर से उन्हें बार-बार गद्दार कहा जा रहा था। लेकिन उन्होंने पार्टी के लिए कोई गद्दारी नहीं की। बल्कि अशोक गहलोत और पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के बीच गठजोड़ का खुलासा जनता के बीच किया है। हालांकि, पायलट ने इस बात से इनकार नहीं किया कि उन्होंने और उनके समर्थिक 19 विधायकों ने बीजेपी या अमित शाह से हॉर्स ट्रेडिंग के दौरान पैसा लिया है।
मीडिया के सवाल पर पायलट ने कहा, अगर किसी प्रकार का सबूत था तो सीएम गहलोत ने मामले की जांच करवाकर पिछले तीन साल में कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। अब इनको जनता के बीच उठाने का क्या मतलब है? पायलट ने राजस्थान की जनता में यह भी मैसेज दिया है कि वसुंधरा राजे ने गहलोत की सरकार बचाई। यह बात सीएम गहलोत ने धौलपुर की रैली में खुद ही मान लिया है। पायलट ने इस बात को खुले रूप में स्वीकार कर लिया कि उन्होंने नेतृत्व परिवर्तन के लिए साल 2020 में कांग्रेस यानी अपनी ही सरकार के खिलाफ विद्रोह कर दिया था। इसमें कहीं न कहीं कांग्रेस आलाकमना की भी शह थी।
पायलट ने कहा, प्रभारी और वरिष्ठ नेताओं को दूत बनाकर भेजा गया था। एक कमेटी भी बनाई गई, जिसमें कुछ आश्वासन पायलट को दिए थे। इसके बाद 25 सितंबर 2022 को कमेटी की सिफारिश पर ही मल्लिकार्जुन खरगे और अजय माकन जयपुर में कांग्रेस विधायकों की बैठक लेने सीएम आवास पर आए थे। लेकिन वह बैठक नहीं होने दी गई थी। पायलट ने कहा, इसमें सोनिया गांधी और उनके भेजे गए दूतों का अपमान हुआ। इसी आधार पर पायलट ने गहलोत पर आरोप लगाया कि उनकी नेता सोनिया नहीं, बल्कि वसुंधरा राजे हैं।
'मैं ढाई साल से सब सुन रहा था, लेकिन चुप था'
पायलट ने कहा कि हम पर आरोप लगाए गए। हम अपनी पार्टी और सरकारी की छवि को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते थे, लेकिन वे अपनी ही सरकार को, विधायकों को बदनाम करने का काम कर रहे हैं। ये काम गलत है। पायलट ने कहा कि हम सब दिल्ली गए थे, अपनी बात को रखने के लिए। किन लोगों पर आरोप लगाए जा रहे हैं, जो पब्लिक लाइफ में 30-40 साल से हैं। सचिन पायलट ने कहा, ‘मैं ढाई साल से यह सब सुन रहा था, लेकिन हम चुप थे, क्योंकि हम अपनी पार्टी को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते थे, लेकिन अपने ही विधायकों और नेताओं को बदनाम करना और भाजपा का गुणगान करना मेरे समझ से परे है।
21 मई से जन संघर्ष यात्रा निकालेंगे पायलट
पायलट ने कहा, ‘मैं 11 मई को अजमेर से एक जन संघर्ष यात्रा निकालूंगा और हम जयपुर की तरफ आएंगे। यह 125 किमी की यात्रा होगी। सही निर्णय तब लिए जाएंगे जब जनता का पूरा साथ होगा।’ उन्होंने कहा कि मैं जनता के बीच जाऊंगा और मुद्दे उठाऊंगा। यह यात्रा भ्रष्टाचार के खिलाफ होगी।