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Rajasthan Politics: CM गहलोत की मिशन 156 के लिए बड़ी रणनीति, चुनाव से दो महीने पहले टिकट बांटने की जताई इच्छा

Thu, 15 Jun 2023 06:56 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: अरविंद कुमार Updated Thu, 15 Jun 2023 06:56 PM IST
सार

राजस्थान में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले है। इसके लिए कांग्रेस ने ‘मिशन 156’ पर काम शुरू कर दिया है। इसी बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बड़ा सियासी बयान दिया है। सीएम गहलोत ने गुरुवार को अपनी इच्छा जाहिर करते हुए कहा, टिकटों का वितरण चुनाव से दो महीने पहले होना चाहिए, जिससे उम्मीदवार फील्ड में अपने काम में जुट जाएं।
 

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Rajasthan Politics CM Gehlot expressed his desire to distribute tickets two months before the elections
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान कांग्रेस में अगर सब कुछ सही रहा तो आगामी विधानसभा चुनाव के टिकट वितरण में कांग्रेस पार्टी कर्नाटक के फॉर्मूले पर काम कर सकती है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर में एक कार्यक्रम के दौरान चुनाव से दो महीने पहले प्रत्याशियों की घोषणा किए जाने या संभावितों को पहले ही टिकट का इशारा किए जाने की बात कही।

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उन्होंने राजस्थान कांग्रेस सह प्रभारी अमृता धवन से इस मामले में आलाकमान से बात करने को भी कहा। यूथ कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, टिकटों का वितरण दो महीने पहले होने से प्रत्याशियों को तैयारी के लिए समय मिल जाता है। उन्होंने इस बात का भी साफ उल्लेख किया कि राजस्थान में आलाकमान के स्तर पर एक निजी कंपनी के द्वारा सर्वे करवाया जा रहा है।
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सीएम गहलोत ने भाषण की शुरुआत में युवाओं को अपनी जिंदगी के अनुभव बताए। उन्होंने कहा कि मैं देश में अति संतुष्ट राजनेता हूं, क्योंकि मैं पार्टी में कई पदों पर रहा हूं। मैं जब एनएसयूआई का अध्यक्ष था, तब मैं गांव और ढाणी में घूमा था। आप भी अति संतुष्ट राजनेता बनने के लिए सफर तय करो। आज कांग्रेस संकट में है, किसी ने नहीं सोचा 44 और 54 लोकसभा की सीटें आईं। एक वक़्त ऐसा भी आया जब कांग्रेस व यूथ कांग्रेस में डिफरेंस बढ़ा, पता नहीं ऐसा क्यों हुआ, इससे नुकसान होता है। अब वापस दोनों करीब आए हैं। बिना यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई के कांग्रेस में क्या है। कांग्रेस ने हमेशा यूथ को आगे बढ़ाया है।
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'कांग्रेस मुक्त भारत का सपना देखने वाले खुद हो जाएंगे मुक्त'
इस दौरान मुख्यमंत्री गहलोत ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, धर्म के नाम पर राजनीति तो हिटलर भी करता था। लेकिन, हिटलर ने जर्मनी को तबाह कर दिया और तमाशा बन गया। ये कोई उपलब्धि नहीं है। कांग्रेस का इतिहास त्याग और बलिदान का रहा है। आजादी ऐसे नहीं मिली है, पंडित नेहरू 10-12 साल जेलों में बंद रहे और ये लोग कहते है कि 76 साल में क्या किया। आज ये लोग पंडित नेहरू के बारे में सोशल मीडिया पर निम्न स्तर की बातें करते है। देश को कांग्रेस मुक्त बनाने की बात करते है। लेकिन, कांग्रेस को कभी मुक्त होगी नहीं, बल्कि ये लोग खुद मुक्त हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि देशभर में कांग्रेस का वर्चस्व आज भी है।

गहलोत का बीजेपी पर तंज...
सीएम गहलोत ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार लोकतंत्र को कमजोर करने में लगी हुई। ये फासीवादी लोग है, संविधान में इनका विश्वास नहीं है। बीजेपी संविधान की धज्जियां उड़ा रही है। देश में जहां भी चुनाव होते है, ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स पहुंच जाती है। कांग्रेस में आरोप लगने के बाद नेता इस्तीफे दे देते है, लेकिन इन लोगों को पद और कुर्सी का मोह है। इनके जुमले इनको ले डूबेंगे। उन्होंने कहा कि कर्नाटक चुनाव के बाद में आपने जो माहौल बनाया है, उसे बनाए रखना है।

कर्नाटक चुनाव में बजरंग बली तक आ गए, लेकिन जनता ने जवाब दे दिया। गहलोत ने कहा कि आज कांग्रेस के लिए कठिन वक्त है। ऐसे वक्त में आपका आना आगे का रास्ता तय करेगा। सोनिया गांधी ने भी एक अधिवेशन में कहा था कि सभी को एक साथ सबकुछ नहीं मिल सकता है। लेकिन, जो निष्ठा से पार्टी के लिए काम करता है, उसे आने वाले वक्त में कुछ तो जरूर मिलेगा।

जीतने वाले उम्मीदवार को ही मिले टिकट...
गहलोत ने कहा कि जहां तक चुनाव में टिकटों की बात है तो राहुल गांधी ने भी तय किया है कि 50 उम्र से कम उम्र के कार्यकर्ता को मौका दिया जाना चाहिए। यूथ कांग्रेस के सभी कार्यकर्ता भी 50 से कम उम्र के है। अगर चुनाव में जीतना है तो सिर्फ जीतने वाले उम्मीदवार को ही टिकट मिलना चाहिए। चुनाव से पहले जब हाईकमान की मीटिंग होती है तो कुछ लोग कहते है कि ये हमारे बंदे है, इनको टिकट मिलना चाहिए। लेकिन, ऐसा नहीं होना चाहिए। इस बार कोशिश होनी चाहिए की जिन लोगों को भी टिकट मिलना है, वो दो महीने पहले ही तय हो जाए।


इस बारे में हमने कांग्रेस प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा को भी कहा है। फीडबैक के आधार पर जो भी नाम सामने आ रहा है, उसका पहले ही तय कर लेना चाहिए। सर्वे भी पहले ही हो जाना चाहिए। चुनाव के समय टिकट के लिए दिल्ली की सड़कों पर जो घूमना पड़ता है, उससे नेता और कार्यकर्ता थक जाते हैं। फिर टिकट मिलता है तो थका हुआ नेता क्या काम करेगा?

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