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Rajasthan News: PCC अध्यक्ष डोटासरा ने दिया इस्तीफा, छोड़ा यह पद; विधानसभा अध्यक्ष बने वजह, जानें क्या बोले

Mon, 19 May 2025 06:53 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Mon, 19 May 2025 06:53 PM IST
सार

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने अपने इस्तीफे में विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के हालिया निर्णयों को पक्षपातपूर्ण और संविधान की आत्मा के खिलाफ बताया। 

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Rajasthan PCC President Govind Singh Dotasara resigned from Estimates Committee 'B'
कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म 'एक्स' के माध्यम से जानकारी साझा कर सभी को चौंका दिया। डोटासरा ने अचानक ही राजस्थान विधानसभा की प्राक्कलन समिति ‘ख’ के सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया। उनका ये निर्णय बड़ा ही हैरानी भरा रहा। बताया जा रहा है कि उनका ये त्यागपत्र विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के चलते आया है। उन्होंने अपने त्यागपत्र में देवनानी के निर्णयों पर सवाल उठाते हुए पक्षपात की बात कही है। 

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उन्होंने अपने 'एक्स' पर लिखा कि राजस्थान विधानसभा की प्राक्कलन समिति 'ख' के सदस्य पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देता हूं। प्रजातंत्र में संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की निष्पक्षता सर्वोच्च होती है, लेकिन जब निर्णय पद की गरिमा की विपरित और पक्षपातपूर्ण प्रतीत हों तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए घातक है। 
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राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष देवनानी जी के हालिया निर्णय संविधान की मूल आत्मा के विरूद्ध एवं पूर्णतः पक्षपातपूर्ण प्रवृत्तियों को उजागर करते हैं। लोकतंत्र के मंदिर में जब निष्पक्षता सवालों के घेरे में हो, तब चुप रहना जनादेश का अपमान होता है। इसलिए इसका हम पुरजोर विरोध करते हैं और मैं प्राक्कलन समिति के सदस्य पद से त्यागपत्र देता हूं।
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समितियां सिर्फ सत्ता पक्ष की मोहर नहीं होतीं, इनमें संतुलित संवाद और निगरानी की भूमिका अहम होती है। कांग्रेस विधायक नरेंद्र बुढ़ानिया जी को हाल ही में विशेषाधिकार समिति का अध्यक्ष बनाया गया, लेकिन 15 दिन के भीतर उन्हें हटा दिया गया। विधानसभा अध्यक्ष का यह रवैया स्तब्ध करने वाला है, क्योंकि संभवत: ऐसी समितियों के अध्यक्ष न्यूनतम एक वर्ष के लिए होते हैं।


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कोर्ट और संविधान की खुली अह्वेलना
यह कोई पहला मौका नहीं है जब पक्षपात निर्णय देखने को मिला हो। हाल ही में हाईकोर्ट ने अंता से भाजपा विधायक कंवरलाल मीणा की तीन साल की सज़ा को बरकरार रखा। नियमों के मुताबिक दो साल से अधिक की सजा होते ही विधायक एवं सांसद जनप्रतिनिधि स्वत: निलंबित माने जाते हैं। लेकिन इस मामले में विपक्ष द्वारा विधानसभा अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपने के बाद भी कंवरलाल मीणा की सदस्यता को रद्द नहीं किया गया। विधानसभा अध्यक्ष की यह मनमानी माननीय कोर्ट और संविधान की खुली अह्वेलना है।

ऐसे अनेक निर्णय हैं जो विधानसभा अध्यक्ष पर दबाव में काम करने एवं निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह लगाते हैं। माननीय अध्यक्ष से अपेक्षा है कि संविधान की शपथ को सर्वोच्च मानकर विधिमान्य न्यायसंगत निर्णय करें जिससे आसन के प्रति आस्था और गहरी बनें।

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