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Rajasthan News : कांग्रेस के लिए उपचुनावों में सीट बचाना बड़ी चुनौती, राजनीतिक प्रतिष्ठा होगी दांव पर

Tue, 15 Oct 2024 06:03 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: प्रिया वर्मा Updated Tue, 15 Oct 2024 06:03 PM IST
सार

उपचुनावों की घोषणा के साथ ही कांग्रेस ने सातों विधानसभा सीटों पर अपना कब्जा जमाने के लिए कमर कस ली है। गौरतलब है कि कांग्रेस के सामने अपनी मौजूदा चार सीटों को बचाने की कड़ी चुनौती है।

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Rajasthan News: Saving seats in by-elections is a big challenge for Congress, political prestige is at stake
प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

आगामी 13 नवंबर को प्रदेश की सात विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने जा रहे हैं, जिनके लिए सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने कमर कस ली है। कांग्रेस के सामने इन चुनावों में अपनी मौजूदा चार सीटों को बचाने की कड़ी चुनौती है, जबकि भाजपा के पास इन सीटों पर खोने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है। उपचुनावों के परिणामों से राज्य सरकार के संख्या बल पर भी कोई बड़ा असर नहीं पड़ने वाला है लेकिन कांग्रेस के लिए यह राजनीतिक प्रतिष्ठा का सवाल है।
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पिछले विधानसभा चुनावों में इन सात में से चार सीटें झुंझुनू, देवली-उनियारा, रामगढ़ और दौसा कांग्रेस के पास थीं, जिन पर पार्टी ने बड़ी जीत दर्ज कराई थी। इनमें से तीन सीटें विधायकों के सांसद निर्वाचित होने के कारण खाली हुई हैं, जबकि रामगढ़ सीट कांग्रेस विधायक जुबेर खान के निधन से खाली हुई है। अब इन सीटों को वापस जीतने के लिए कांग्रेस पूरा जोर लगा रही है, क्योंकि इन सीटों का नुकसान कांग्रेस की साख पर सीधा असर डालेगा।
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इधर भाजपा प्रदेश प्रभारी का कहना है कि पार्टी के पास उपचुनाव में खोने के लिए कुछ नहीं है, क्योंकि इन सात सीटों में से भाजपा के पास केवल एक सीट सलूंबर है। ऐसे में भाजपा का पूरा ध्यान अन्य सीटों पर है, जहां से वह कांग्रेस को टक्कर दे सकती है।
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गठबंधन और उम्मीदवारों पर मंथन

चौरासी, सलूंबर और खींवसर तीनों सीटों पर कांग्रेस के सामने एक और चुनौती है, जहां आरएलपी और अन्य दलों का जनाधार मजबूत है। गठबंधन की संभावनाओं पर कांग्रेस अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है। पार्टी के पास इन सीटों पर मजबूत उम्मीदवारों की कमी है, जिससे उसे तीसरे स्थान पर रहने का संकट भी सताने लगा है।

वंशवाद की चुनौती

उम्मीदवारों के चयन में भी कांग्रेस के सामने चुनौती है। झुंझुनू से ओला परिवार, देवली-उनियारा से हरीश मीणा, रामगढ़ से मुरारी मीणा और दौसा से जुबेर खान के परिवार के सदस्यों ने टिकट की मांग की है। ऐसे में कांग्रेस के लिए वंशवाद से किनारा करना मुश्किल दिख रहा है।


कुल मिलाकर कांग्रेस के लिए यह उपचुनाव केवल सीट बचाने का ही नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। अब देखना होगा कि पार्टी इन चुनौतियों से कैसे निपटती है।
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