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Rajasthan News: राजस्थान–तेलंगाना मिलकर बनाएंगे देश का पहला थर्मल–सोलर हाइब्रिड पावर मॉडल

Sat, 22 Nov 2025 04:35 PM IST
सौरभ भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: सौरभ भट्ट Updated Sat, 22 Nov 2025 04:35 PM IST
सार

Rajasthan News:  राजस्थान और तेलांगाना पहली बार संयुक्त थर्मल–सोलर ऊर्जा परियोजना शुरू कर रहे हैं। दोनों राज्यों की कंपनियां मिलकर तेलंगाना में 800 MW का थर्मल प्लांट और राजस्थान में 1,500 MW के सोलर प्रोजेक्ट लगाएंगी। इससे बिजली उत्पादन लागत घटकर ₹5.60 प्रति यूनिट रहने की उम्मीद है।

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Rajasthan News:  Rajasthan, Telangana Launch India’s First Joint Thermal–Solar Power Partnership
थर्मल पावर प्लांट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत के ऊर्जा क्षेत्र में पहली बार दो राज्य मिलकर ऐसा मॉडल बनाने जा रहे हैं, जिसमें थर्मल और सोलर ऊर्जा का संयुक्त उत्पादन होगा। राजस्थान राज्या विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RVUNL) और तेलंगाना की सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (SCCL) मिलकर तेलंगाना में कोयला खदानों के पास थर्मल पावर प्लांट और राजस्थान में बड़े सोलर पावर प्रोजेक्ट स्थापित करेंगे। राजस्थान कैबिनेट ने हाल ही में संयुक्त उपक्रम (JV) को मंजूरी दी है। इसमें RVUNL की 26% और SCCL की 74% हिस्सेदारी होगी। उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने बताया कि JV के तहत तेलंगाना में 800 मेगावाट का थर्मल पावर प्लांट लगभग 9,600 करोड़ रुपये की लागत से लगाया जाएगा। इसके साथ ही राजस्थान में 1,500 मेगावाट के सोलर प्रोजेक्ट भी स्थापित किए जाएंगे, जिन पर लगभग 6,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

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इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत है—थर्मल प्लांट कोयला खदानों के पास ही बनेगा, जिससे कोयला परिवहन लागत लगभग खत्म हो जाएगी। इससे बिजली उत्पादन का खर्च घटकर करीब ₹5.60 प्रति यूनिट रहने का अनुमान है, जो फिलहाल राज्यों द्वारा खरीदी जा रही बिजली से काफी कम है। प्लांट का निर्माण BHEL करेगी और 2028 तक पूरा होने की संभावना है। ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह मॉडल दोनों राज्यों के लिए फायदेमंद है। तेलंगाना के पास पर्याप्त कोयला उपलब्ध है, जिससे थर्मल उत्पादन सुचारु रहेगा। वहीं राजस्थान सौर ऊर्जा का हब है, जिससे संयुक्त प्रोजेक्ट एक मजबूत और संतुलित ऊर्जा ढांचा तैयार करेगा।

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ऊर्जा विभाग प्रमुख सचिव अजीताभ शर्मा ने इसे "सहकारी संघवाद का नया मॉडल" बताया। उन्होंने कहा कि यह देश का पहला ऐसा समझौता है, जिसमें दो राज्य एक-दूसरे को थर्मल और रिन्यूएबल ऊर्जा बेचेंगे। शर्मा के अनुसार, यह मॉडल न केवल ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा बल्कि अन्य राज्यों को भी ऐसे सहयोग के लिए प्रेरित करेगा। यह संयुक्त मॉडल भारत के ऊर्जा ढांचे में एक नई दिशा तय कर सकता है, जहां राज्य अपनी प्राकृतिक संसाधन शक्तियों को साझा कर अधिक किफायती और विश्वसनीय ऊर्जा उपलब्ध करा सकेंगे।

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