राजस्थान: हाईकोर्ट सख्त, तथ्य छिपाकर याचिका दायर करने वाले पर 5 लाख रुपये का जुर्माना
राजस्थान हाईकोर्ट ने तथ्य छिपाकर और गलत जानकारी देकर याचिका दायर करने वाले रामस्वरूप पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने उसकी याचिका खारिज कर जुर्माने की राशि का बंटवारा अधिवक्ता कल्याण कोष और हाईकोर्ट मुंशी संघ के बीच करने का निर्देश दिया।
विस्तार
राजस्थान हाईकोर्ट ने अदालत में महत्वपूर्ण तथ्य छिपाकर और भ्रामक जानकारी देकर याचिका दायर करने वाले एक व्यक्ति के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने याचिकाकर्ता रामस्वरूप की याचिका खारिज करते हुए उस पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जो व्यक्ति तथ्यों को छिपाकर न्यायालय की शरण लेता है, वह किसी भी तरह की राहत पाने का हकदार नहीं है। वहीं, एक अन्य मामले में राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण ने जल संसाधन विभाग के एक अधिशासी अभियंता को पदस्थापन आदेश की प्रतीक्षा (एपीओ) में रखने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। अधिकरण ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से जवाब भी मांगा है।
जमीन से जुड़ा गलत दावा करने पर हाईकोर्ट ने लगाया जुर्माना
न्यायमूर्ति रवि चिरानिया की एकल पीठ ने रामस्वरूप की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में सांगानेर तहसील के केशोपुरा गांव में राष्ट्रीय राजमार्ग के पौधरोपण गलियारे की जमीन पर बिना अनुमति व्यावसायिक निर्माण किए जाने का आरोप लगाया था। उसने कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए दावा किया था कि विवादित स्थल से सटी हुई उसकी जमीन है और वह वहां हो रहे निर्माण से सीधे प्रभावित हो रहा है। हालांकि, सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता का यह दावा गलत साबित हुआ।
मौके पर नहीं मिली याचिकाकर्ता की कोई जमीन
सुनवाई के दौरान सामने आया कि जयपुर विकास प्राधिकरण वर्ष 2022 में ही संबंधित क्षेत्र के व्यावसायिक पट्टे जारी कर चुका था। याचिकाकर्ता ने इन पट्टों को कभी चुनौती भी नहीं दी थी। वहीं, मौका मुआयना और दस्तावेजों से स्पष्ट हुआ कि विवादित स्थल पर याचिकाकर्ता की कोई जमीन ही नहीं थी। इस पर अदालत ने याचिका खारिज करते हुए पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि जुर्माने की राशि में से तीन लाख रुपये राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर पीठ के अधिवक्ता कल्याण कोष में और दो लाख रुपये राजस्थान हाईकोर्ट मुंशी संघ के खाते में जमा कराए जाएं।
अधिशासी अभियंता के एपीओ आदेश पर अधिकरण की रोक
दूसरे मामले में राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण ने जल संसाधन विभाग के अधिशासी अभियंता अवधेश कुमार मीना को एपीओ करने के 29 अक्टूबर के आदेश की क्रियान्विति पर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायिक सदस्य पूनम दरगन और सदस्य प्रकाश चंद्र शर्मा की पीठ ने कोटा की चंबल परियोजना खंड में तैनात अधिशासी अभियंता की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह राहत दी।
तबादले पर पहले ही लगी थी रोक, फिर जारी कर दिया एपीओ आदेश
अधिकरण में अपीलार्थी की ओर से अधिवक्ता लक्ष्मीकांत शर्मा ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि विभाग ने 10 जुलाई को अवधेश कुमार मीना का कोटा से बाहर तबादला कर दिया था। इस आदेश पर अधिकरण ने 11 अगस्त को ही रोक लगा दी थी। इसके बावजूद विभाग ने 29 अक्टूबर को नया आदेश जारी कर उन्हें एपीओ कर दिया और उनका मुख्यालय जयपुर तय कर दिया। अपीलार्थी ने इस कार्रवाई को गैरकानूनी बताते हुए एपीओ आदेश निरस्त करने की मांग की थी।
18 दिसंबर तक जवाब देने के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकरण ने जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, सचिव और मुख्य अभियंता को नोटिस जारी किया है। पीठ ने सभी संबंधित अधिकारियों को 18 दिसंबर तक अपना विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल अधिकरण ने एपीओ आदेश की क्रियान्विति पर अंतरिम रोक लगा दी है।