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Rajasthan News: फोन टैपिंग केस में पूर्व ओएसडी लोकेश शर्मा गिरफ्तार, कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत
Mon, 25 Nov 2024 04:32 PM IST
अर्पित याज्ञनिक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: अर्पित याज्ञनिक
Updated Mon, 25 Nov 2024 04:32 PM IST
सार
पिछले दिनों लोकेश शर्मा ने दिल्ली हाईकोर्ट में गिरफ्तारी पर लगी रोक वाली याचिका वापस ले ली थी। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी पर लगी रोक हट गई। अब क्राइम ब्रांच ने उन्हें अरेस्ट कर लिया है।
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लोकेश शर्मा।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजस्थान फोन टैपिंग प्रकरण में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पूर्व ओएसडी लोकेश शर्मा को गिरफ्तार किया। भाजपा नेता गजेंद्र सिंह शेखावत की शिकायत पर फोन टैपिंग का मामला दर्ज हुआ था। लोकेश शर्मा पर फोन टैपिंग की सीडी मीडिया में वितरित करने का आरोप हैं। हाई कोर्ट द्वारा गिरफ्तारी पर लगी रोक हटने के बाद उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया गया था। गिरफ्तार होने के बाद थाने से ही उन्हें जमानत मिल गई। कुछ ही घंटों बाद लोकेश शर्मा को अदालत ने अग्रिम जमानत दे दी। मामले की जांच जारी है।
क्या है पूरा मामला
ये मामला सचिन पायलट खेमे की बगावत के समय जुलाई 2020 का है। मार्च 2021 में गजेंद्र सिंह शेखावत ने दिल्ली क्राइम ब्रांच में एफआईआर (नं. 50/2021) दर्ज करवाई थी। गहलोत सरकार पर बीजेपी ने फोन टैपिंग के आरोप लगाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके फोन अवैध रूप से टैप किए गए, जिसमें भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, आईटी अधिनियम और आईपीसी की धाराओं का उल्लंघन किया गया।
इस मामले को लेकर राजस्थान और दिल्ली पुलिस के अधिकार क्षेत्र को लेकर लंबा विवाद चला। राजस्थान सरकार ने शुरुआत में दिल्ली पुलिस के जांच अधिकारों पर सवाल उठाए, लेकिन 27 सितंबर 2024 को दिल्ली हाईकोर्ट में राजस्थान सरकार ने अपना रुख बदलते हुए दिल्ली पुलिस की जांच को समर्थन देने का एलान किया। इसके बाद, लोकेश शर्मा ने अपनी एफआईआर खारिज करने की याचिका वापस ले ली थी।
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क्या है पूरा मामला
ये मामला सचिन पायलट खेमे की बगावत के समय जुलाई 2020 का है। मार्च 2021 में गजेंद्र सिंह शेखावत ने दिल्ली क्राइम ब्रांच में एफआईआर (नं. 50/2021) दर्ज करवाई थी। गहलोत सरकार पर बीजेपी ने फोन टैपिंग के आरोप लगाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके फोन अवैध रूप से टैप किए गए, जिसमें भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, आईटी अधिनियम और आईपीसी की धाराओं का उल्लंघन किया गया।
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इस मामले को लेकर राजस्थान और दिल्ली पुलिस के अधिकार क्षेत्र को लेकर लंबा विवाद चला। राजस्थान सरकार ने शुरुआत में दिल्ली पुलिस के जांच अधिकारों पर सवाल उठाए, लेकिन 27 सितंबर 2024 को दिल्ली हाईकोर्ट में राजस्थान सरकार ने अपना रुख बदलते हुए दिल्ली पुलिस की जांच को समर्थन देने का एलान किया। इसके बाद, लोकेश शर्मा ने अपनी एफआईआर खारिज करने की याचिका वापस ले ली थी।
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