Rajasthan News: सरकारी पद से इस्तीफा देकर एसआई भर्ती परीक्षा देने वालों की पुरानी नौकरी बहाल होगी
जो अभ्यार्थी पहले सरकारी नौकरी छोड़कर एआई भर्ती में आए थे उनकी पुरानी नौकरी बहाल होगी।
विस्तार
202 पेज का कोर्ट का फैसला
कोर्ट ने 202 पन्नों के फैसले में कहा कि पेपर लीक राज्यभर में फैला था और इसमें RPSC के चेयरमैन समेत छह सदस्यों की सक्रिय भूमिका पाई गई। कोर्ट ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया दूषित हो चुकी थी और इसे जारी रखना कानून व्यवस्था के लिए खतरा हो सकता था। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि 2021 के पदों को 2025 की आगामी SI भर्ती में जोड़ा जाए और पुराने अभ्यर्थियों को फिर से मौका दिया जाए।
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ने क्यों रद्द की भर्ती?
हाईकोर्ट ने कहा कि एसआई भर्ती परीक्षा में तत्कालीन RPSC चेयरमैन सहित 6 सदस्यों की भूमिका गड़बड़ पाई गई। कोर्ट ने कहा कि भर्ती का पेपर प्रिंटिंग प्रेस पहुंचने से पहले ही लीक हो गया था। घोटाले में RPSC के पूर्व अध्यक्ष संजय श्रोत्रिय समेत सदस्य बाबूलाल कटारा, मंजू शर्मा, संगीता आर्य और जसवंत राठी की संलिप्तता सामने आई। कोर्ट ने आरपीएससी के लिए कहा..'घर का भेदी लंका ढाए'। अपने आदेश में कोर्ट ने लिखा कि “RPSC के अंदर बैठे लोगों ने ही भर्ती की गोपनीयता खत्म की।” कोर्ट ने यह भी कहा कि पेपर ब्लूटूथ गैंग तक भी पहुंचा था, जो परीक्षा के दौरान नकल करवाने में लिप्त था। आरपीएससी सदस्य रामूराम राईका ने अपने बेटे और बेटी के इंटरव्यू में RPSC के सदस्यों से मिलीभगत की थी। शोभा राईका के इंटरव्यू में बाबूलाल कटारा, जबकि देवेश राईका के पैनल में संजय श्रोत्रिय शामिल थे।
ये बड़ी गिरफ्तारियां हुई:
आरपीएससी पेपर लीक मामले में चयनित अभ्यर्थियों के अलावा आरपीएससी से भी कई बड़ी गिरफ्तारियां की गई। इसमें रामूराम राईका (RPSC सदस्य), बेटा और बेटी गिरफ्तार किए गए। इन पर पेपर लीक कर अपने बच्चों को फायदा दिलाने का आरोप था। बाबूलाल कटारा (RPSC सदस्य) इंटरव्यू पैनल में रहते हुए उम्मीदवारों को पहचान कर चयन करवाया। इसके अलावा हाल में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के PSO राजकुमार यादव और बेटा गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि यादव ने बेटे को पास करवाने के लिए पेपर खरीदा तथा इसके बाद अपने दूधवाले को भी पेपर बेचा था। आरोपी राजकुमार को 8 अगस्त 2025 को पकड़ा गया था।