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Jaipur News: डॉ. सोमदेव की गिरफ्तारी पर बार एसोसिएशन का समर्थन, कहा- नेग्लिजेंस नहीं बल्कि धोखाधड़ी का केस
Thu, 16 Apr 2026 11:45 AM IST
जयपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: जयपुर ब्यूरो
Updated Thu, 16 Apr 2026 11:45 AM IST
सार
जयपुर में डॉ. सोमदेव बंसल की गिरफ्तारी मामले में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन पुलिस के समर्थन में उतरी, इसे मेडिकल नेग्लिजेंस नहीं बल्कि आरजीएचएस घोटाले से जुड़ा मामला बताया। बार एसोसिएशन के अनुसार, डॉ. बंसल पर आरजीएचएस के तहत करोड़ों रुपये के फर्जी बिल उठाने के आरोप हैं।
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अपराध
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जयपुर में निविक अस्पताल के संचालक डॉ. सोमदेव बंसल की गिरफ्तारी को लेकर उठे विवाद के बीच राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन खुलकर पुलिस के समर्थन में सामने आई है। बार एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि यह मामला किसी भी प्रकार की मेडिकल नेग्लिजेंस से जुड़ा नहीं है, बल्कि राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम आरजीएचएस में कथित फर्जीवाड़े और वित्तीय अनियमितताओं का गंभीर प्रकरण है।
'कानून सबके लिए समान है'
बार एसोसिएशन के महासचिव दीपेश शर्मा ने कहा कि पुलिस ने इस मामले में पूरी तरह नियमों के तहत और निष्पक्ष जांच के बाद ही कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद ही डॉ. बंसल को आरोपी माना गया और गिरफ्तारी की गई। “कानून सबके लिए समान है, चाहे वह डॉक्टर हो, वकील हो या आम नागरिक,” आगे उन्होंने कहा कि आईएमए राजस्थान द्वारा निजी अस्पतालों और आरजीएचएस सेवाओं को लेकर की जा रही हड़ताल पर प्रतिक्रिया देते हुए शर्मा ने कहा कि वकीलों का विरोध मेडिकल पेशे के खिलाफ नहीं है, बल्कि सिस्टम के दुरुपयोग के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले को जानबूझकर मेडिकल नेग्लिजेंस की दिशा में मोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि वास्तविक मुद्दा आर्थिक अनियमितताओं का है।
बार एसोसिएशन के अनुसार, डॉ. बंसल पर आरजीएचएस के तहत करोड़ों रुपये के फर्जी बिल उठाने के आरोप हैं। आरोप यह भी है कि कई मामलों में ऐसे मरीजों के नाम पर बिल पेश किए गए, जो या तो पहले ही डिस्चार्ज हो चुके थे या जिनके उपचार के रिकॉर्ड संदिग्ध हैं। इस तरह की गतिविधियां सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग की श्रेणी में आती हैं।
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रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी
गौरतलब है कि इस मामले में डॉ. बंसल के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 406 (आपराधिक विश्वासघात), 465 (जालसाजी) और 471 (जाली दस्तावेजों का उपयोग) के तहत मामला दर्ज किया गया है। बार एसोसिएशन का कहना है कि ये धाराएं अपने आप में इस केस की गंभीरता को दर्शाती हैं।
दीपेश शर्मा ने यह भी संकेत दिया कि इस मामले में एक और एफआईआर दर्ज हो सकती है। उन्होंने बताया कि आरजीएचएस विभाग द्वारा अलग से जांच की जा रही है और उसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
पुलिस की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए बार एसोसिएशन ने कहा कि इस केस में “पॉइंट-टू-पॉइंट” जांच की गई है और हर पहलू को गंभीरता से परखा गया है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई उन सभी के लिए चेतावनी है जो सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग करने का प्रयास करते हैं।
ये भी पढ़ें- कोटा में बड़ा सड़क हादसा: हैंगिंग ब्रिज के पास डिवाइडर से टकराकर पलटी बस, तीन लोगों की मौत; 12 से ज्यादा घायल
शर्मा ने यह भी उल्लेख किया कि राज्य सरकार पहले भी आरजीएचएस में अनियमितताओं को लेकर सख्त कदम उठा चुकी है। सीकर में हुए एक मामले का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा स्पष्ट है किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बार एसोसिएशन ने इसे आम जनता के लिए एक संदेश बताया है कि यदि कोई व्यक्ति सरकारी योजनाओं का गलत लाभ उठाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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'कानून सबके लिए समान है'
बार एसोसिएशन के महासचिव दीपेश शर्मा ने कहा कि पुलिस ने इस मामले में पूरी तरह नियमों के तहत और निष्पक्ष जांच के बाद ही कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद ही डॉ. बंसल को आरोपी माना गया और गिरफ्तारी की गई। “कानून सबके लिए समान है, चाहे वह डॉक्टर हो, वकील हो या आम नागरिक,” आगे उन्होंने कहा कि आईएमए राजस्थान द्वारा निजी अस्पतालों और आरजीएचएस सेवाओं को लेकर की जा रही हड़ताल पर प्रतिक्रिया देते हुए शर्मा ने कहा कि वकीलों का विरोध मेडिकल पेशे के खिलाफ नहीं है, बल्कि सिस्टम के दुरुपयोग के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले को जानबूझकर मेडिकल नेग्लिजेंस की दिशा में मोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि वास्तविक मुद्दा आर्थिक अनियमितताओं का है।
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बार एसोसिएशन के अनुसार, डॉ. बंसल पर आरजीएचएस के तहत करोड़ों रुपये के फर्जी बिल उठाने के आरोप हैं। आरोप यह भी है कि कई मामलों में ऐसे मरीजों के नाम पर बिल पेश किए गए, जो या तो पहले ही डिस्चार्ज हो चुके थे या जिनके उपचार के रिकॉर्ड संदिग्ध हैं। इस तरह की गतिविधियां सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग की श्रेणी में आती हैं।
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रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी
गौरतलब है कि इस मामले में डॉ. बंसल के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 406 (आपराधिक विश्वासघात), 465 (जालसाजी) और 471 (जाली दस्तावेजों का उपयोग) के तहत मामला दर्ज किया गया है। बार एसोसिएशन का कहना है कि ये धाराएं अपने आप में इस केस की गंभीरता को दर्शाती हैं।
दीपेश शर्मा ने यह भी संकेत दिया कि इस मामले में एक और एफआईआर दर्ज हो सकती है। उन्होंने बताया कि आरजीएचएस विभाग द्वारा अलग से जांच की जा रही है और उसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
पुलिस की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए बार एसोसिएशन ने कहा कि इस केस में “पॉइंट-टू-पॉइंट” जांच की गई है और हर पहलू को गंभीरता से परखा गया है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई उन सभी के लिए चेतावनी है जो सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग करने का प्रयास करते हैं।
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शर्मा ने यह भी उल्लेख किया कि राज्य सरकार पहले भी आरजीएचएस में अनियमितताओं को लेकर सख्त कदम उठा चुकी है। सीकर में हुए एक मामले का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा स्पष्ट है किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बार एसोसिएशन ने इसे आम जनता के लिए एक संदेश बताया है कि यदि कोई व्यक्ति सरकारी योजनाओं का गलत लाभ उठाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।