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Rajasthan: जयपुर बम ब्लास्ट में सरकार को बड़ी सफलता, सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों पर केस चलाने की मंजूरी दी
Fri, 02 Aug 2024 03:17 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Fri, 02 Aug 2024 03:17 PM IST
सार
जयपुर बम ब्लास्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार की SLP सुनवाई के लिए स्वीकार कर ली। अब सुप्रीम कोर्ट SLP पर सुनवाई करेगा। इसके बाद यह तय होगा कि SLP स्वीकार की जाएगी अथवा नहीं।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
साल 2008 के जयपुर सीरियल बम धमाकों से संबंधित चार महत्वपूर्ण मामलों में विशेष अनुमति याचिकाएं (SLP) सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को स्वीकार कर ली हैं। ये मामले जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस अरविंद कुमार के समक्ष सूचीबद्ध किए गए हैं।
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गौरतलब है कि बम ब्लास्ट के आरोपियों को पिछले साल 29 मार्च 2023 को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया था। इसके बाद बीजेपी ने तत्कालीन सरकार पर आरोपियों को बचाने के आरोप लगाए गए थे। प्रदेश की भजनलाल सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में SLP दायर की थी।
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अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा ने जानकारी दी कि राजस्थान सरकार ने इन याचिकाओं को बम ब्लास्ट के मुख्य अभियुक्तों सैफुर्रहमान अंसारी और शहबाज हुसैन के खिलाफ दाखिल किए थे। ये अभियुक्त साल 2008 में जयपुर में हुए भयानक घटना के दौरान बम लगाने और उसे अंजाम देने में मुख्य भूमिका निभा रहे थे। केंद्र सरकार के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा ने राजस्थान सरकार की ओर से SLP लेकर पेश हुए थे।
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ये है मामला
शिवमंगल शर्मा, जिन्होंने सबसे पहले पीड़ितों का प्रतिनिधित्व किया और सर्वोच्च न्यायालय में पहली SLP दायर की, ने इसे सफलतापूर्वक स्वीकार कराया। इसके बाद, राज्य सरकार ने उन्हें बम धमाकों के मामलों में राज्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए विशेष वकील नियुक्त किया। अब, अतिरिक्त महाधिवक्ता के रूप में, वे राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
प्रारंभिक ट्रायल कोर्ट ने सैफुर्रहमान अंसारी को दोषी ठहराया था, जिसमें FIR संख्या 118/2008 में उन्हें मृत्युदंड और कई अन्य FIR (117/2008, 119/2008, 120/2008, 130/2008, 131/2008, 132/2008, और 133/2008) में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। ये निर्णय और सजा 18 नवंबर 2019 और 20 दिसंबर 2019 को सुनाई गई थीं। हालांकि, राजस्थान उच्च न्यायालय ने बाद में सैफुर्रहमान अंसारी और शहबाज हुसैन को सभी मामलों में बरी कर दिया, जिसके चलते राज्य सरकार ने वर्तमान SLP दाखिल की।
सर्वोच्च न्यायालय का इन याचिकाओं को स्वीकार करना 2008 के जयपुर सीरियल बम धमाकों के पीड़ितों के लिए न्याय की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। जैसे-जैसे मामला आगे बढ़ेगा, कानूनी कार्रवाई पर करीबी नजर रखी जाएगी।