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Rajasthan Exclusive : DOIT के घोटालों पर चला हाईकोर्ट का हंटर, एसीबी से कहा- जहां गड़बड़ी मिले, FIR करें
Wed, 18 Sep 2024 07:41 PM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Wed, 18 Sep 2024 07:41 PM IST
सार
डीओआईटी में हुए हजारों रुपये के घोटालों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने तीखी टिप्पणी की है। साथ ही एसीबी को 14 अक्टूबर तक डीओआईटी के पिछले पांच साल के टेंडरों की जांच रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है।
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राजस्थान
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भारत में करप्शन कैंसर की तरह फैल रहा है, इसलिए युवाओं को भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए आगे आना चाहिए। राजस्थान हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DOIT) में हजारों करोड़ रुपए के टेंडर घोटालों को लेकर की है। साथ ही अपने लिखित आदेश में एसीबी को DOIT में पिछले पांच साल के टेंडरों की जांच रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है।
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राजस्थान में DOIT में पिछले पांच सालों में बड़े पैमाने पर हुए भ्रष्टाचार को लेकर हाईकोर्ट का हंटर चल गया है। हाईकोर्ट जस्टिस अशोक कुमार जैन ने गुरुवार को लिखित आदेश जारी 14 अक्टूबर तक DOIT में पिछले पांच साल के टेंडरों की जांच रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है।
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हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से लिखा है कि जांच के दौरान यदि कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो ACB अपने स्तर पर FIR दर्ज करे। मामले में यदि किसी प्रभावशाली को इसमें बचाने की कोशिश की गई तो उसे एक भ्रष्ट व्यक्ति को बचाने की कार्रवाई के रूप में देखा जाएगा।
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राज्य सरकार की तरफ से अतिरिक्त महाधिवक्ता एवं महानिदेशक भ्रष्टाचार निरोधक विभाग ने सहमति जताई कि पिछले 5 साल में जितने टेंडर जारी किए गए हैं, उन सबकी गहन जांच की जाएगी और जो भी अपराधी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ FIR दर्ज की जाएगी और आगामी तारीख पर न्यायालय के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।
मामले में याचिकाकर्ता डॉ. टी.एन. शर्मा के अधिवक्ता पूनमचंद भंडारी ने न्यायालय में बहस करके बताया कि DOIT में हजारों करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार किया गया है। इसमें दस्तावेजों सहित कई शिकायतें की गई हैं लेकिन बड़े-बड़े अधिकारियों की मिलीभगत होने कारण कार्रवाइयां नहीं हो रही हैं। वर्तमान प्रकरण में आरोपी कुलदीप यादव राजनेट प्रोजेक्ट का ऑफिसर इन चार्ज रहा है, जहां जमकर भ्रष्टाचार हुआ है, उसके अंतर्गत 17750 वाईफाई प्वाइंट के कार्य आदेश दिए गए, जबकि 2020 तक केवल 1750 लगाए गए थे।
याचिका में कोर्ट को यह भी बताया गया कि एक प्रकरण में इस विभाग के अधिकारी से उसके कार्यालय की अलमारी में सोना और ढाई करोड़ रुपये बरामद हुए थे लेकिन रंगे हाथों पकड़े जाने के बावजूद सरकार द्वारा अभियोजन स्वीकृति नहीं देने पर और जांच अधिकारियों की मिलीभगत होने कारण प्रकरण में कार्रवाइयां नहीं होती और अपराधी बच जाते हैं। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व की पेशी पर न्यायालय ने भ्रष्टाचार को देखते हुए भ्रष्टाचार निरोधक विभाग के महानिदेशक रवि प्रकाश मेहरडा को न्यायालय में तलब किया था।
IAS अखिल अरोड़ा समेत कई जांच के दायरे में
DOIT के टेंडर घोटालों में एसीबी की जांच के दायरे में IAS अखिल अरोड़ा सहित कई अफसर हैं। अरोड़ा के खिलाफ एसीबी ने सरकार से भ्रष्टाचार एक्ट में जांच की अनुमति भी मांग रखी है। कोर्ट ने कहा कि चाहे कोई कितना बड़ा व्यक्ति क्यों न हो वह कानून से ऊपर नहीं है। साथ ही एसीबी को चेतावनी भी दी है कि यदि किसी प्रभावशाली अफसर को बचाने की कोशिश की गई तो उसे भ्रष्ट व्यक्ति को बचाने की कार्रवाई के रूप में देखा जाएगा।
सबसे लंबे समय तक DOIT में रहे अरोड़ा
अखिल अरोड़ा DOIT में सबसे लंबे समय तक रहने वाले IAS अफसर हैं। पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार में वे 2013 से 2017 तक DOIT के सेक्रेट्री रहे। इसके बाद गहलोत सरकार आने के कुछ समय बाद ही वे फिर डीओआईटी में आ गए। जनवरी 2024 में मौजूदा सरकार ने उनसे डीओआईटी विभाग वापस लिया था।