फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Jaipur News ›   Rajasthan Election 2023 Why did BJP give tickets to these MP

Rajasthan Election 2023: बीजेपी ने इन सांसदों को क्यों दिया टिकट?, जानें इस खास रिपोर्ट से

Mon, 09 Oct 2023 11:02 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: अरविंद कुमार Updated Mon, 09 Oct 2023 11:02 PM IST
सार

Rajasthan Election 2023: राजस्थान में विधानसभा चुनाव 2023 के लिए आचार संहिता लगने के कुछ घंटे के बाद ही बीजेपी ने अपने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी। इस सूची में बीजेपी ने 41 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। इन सीटों पर बीजेपी ने सात सांसदों को टिकट देकर चुनाव में प्रत्याशी बनाया है।

विज्ञापन
Rajasthan Election 2023 Why did BJP give tickets to these MP
भाजपा ने सात सांसदों को मैदान में उतारा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पहली ही सूची में राजस्थान के सात सांसदों को टिकट दिया है। इनके जरिए जातिगत वोट बैंक को साधने के साथ ही इनके आसपास की सीटों पर भी इनके प्रभाव का फायदा लेने की नीति के तहत इन सांसदों को मैदान में उतारा गया है।

विज्ञापन


विज्ञापन


बता दें कि पार्टी ने यह दांव खेलते हुए पूर्व प्रत्याशी तथा मौजूदा विधायकों के प्रति जनता व कार्यकर्ताओं में उपजे असंतोष को भी थामने का प्रयास किया है। किस सांसद को भाजपा ने कहां से और क्यों टिकट दिया है, पार्टी में अंदरखाने क्या चल रहा है, पेश है पड़ताल रिपोर्ट...
विज्ञापन
विज्ञापन


दीया कुमारी
सांसद दीया कुमारी को राजधानी की विधाधर नगर सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। यहां वर्तमान में भाजपा के नरपत सिंह राजवी विधायक हैं। जो लगातार यहां से जीत रहे हैं। इस बार राजवी के साथ ही उनके बेटे अभिमन्यू सिंह राजवी ने भी इस सीट के लिए दावेदारी ठोकी थी। उपराष्ट्रपति रहे स्वर्गीय भैरो सिंह के दामाद राजवी से क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं की नाराजगी इस कदर बढ़ चुकी थी कि कार्यकर्ताओं और डेढ़ दर्जन पार्षदों ने संगठन महामंत्री चंद्रशेखर, प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह के साथ ही दूसरे राज्यों से आए प्रवासी विधायकों को दो टूक शब्दों में यह बता दिया था कि राजवी व उनके परिवार के किसी भी व्यक्ति को टिकट दिया तो वे बगावत कर देंगे। वहीं, 21 पार्षदों ने राजवी को टिकट नहीं देने की मांग संगठन से की थी। यहां पर पूर्व विधायक बीरू सिंह राठौड़, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश दाधीच, रूपेन्द्र सिंह करीरी टिकट के लिए दावेदारी कर रहे थे।

इस सीट पर राजपूतों की बड़ी संख्या को देखते हुए पार्टी ने राजधानी जयपुर के राजपूत वोट बैंक को साधने के लिए दीया कुमारी को टिकट देकर राजपूतों को साधा। वहीं, कार्यकर्ताओं और आम जनता में विधायक के प्रति उपजे असंतोष पर भी लगाम लगा दी। चूंकि दीया कुमारी पार्टी की युवा और महिला आइकन मानी जाती हैं, इसका फायदा भी उसे मिलेगा। 

दीया कुमारी ने मांगी थी दो सीटें
भाजपा दीया कुमारी को जयपुर की सबसे अहम व कांटे की टक्कर वाली हवामहल सीट से प्रत्याशी बनाना चाहती थी। पार्टी ने इसके संकेत भी दीया कुमारी को दे दिए थे। इसके बाद दीया कुमारी ने केन्द्रीय नेतृत्व के समक्ष हवामहल सीट से लड़ने के लिए मना कर दिया। यह कहा कि यदि उन्हें चुनाव लड़वाना है तो विद्याधर नगर या सिविल लाइन्स सीट से टिकट दिया जाए। इसके बाद उन्हें विद्याधरनगर से प्रत्याशी बनाया गया है। उनके प्रत्याशी बनाने के साथ ही विद्याधर नगर में राजवी से नाराज कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई है।

झोटवाड़ा विधानसभा
झोटवाड़ा विधानसभा से पूर्व मंत्री और पूर्व प्रत्याशी राजपाल सिंह का टिकट काट दिया गया। इस क्षेत्र के ज्यादातर संगठन पदाधिकारी व पूर्व पदाधिकारी उनकी कार्यशैली से नाराज थे। पिछले विधानसभा चुनाव में भी प्रमुख कार्यकर्ताओं ने राजपाल सिंह का जमकर विरोध किया था और चुनाव में निष्क्रिय रहकर उन्हें हरवा दिया था। चुनाव हारने के बावजूद राजपाल सिंह निष्क्रिय से रहे। हालांकि, पिछले चार-पांच महीनों से उन्होंने फिर से क्षेत्र में दौरे व मीटिंगे शुरू कर दी थी। लेकिन कार्यकर्ताओं की नाराजगी बढ़ती जा रही थी। स्थानीय पदाधिकारी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थानीय पदाधिकारियों ने संगठन महामंत्री चंद्रशेखर और आरएसएस के क्षेत्रीय प्रचारक निम्बाराम से कह दिया था कि इस चुनाव में राजपाल को रिपीट किया तो वे आसु सिंह सुरपुरा को निर्दलीय रूप से चुनाव लड़वा देंगे। 

चूंकि राजपाल सिंह वसुंधरा राजे खेमे के नेता माने जाते हैं। पिछले दिनों राजे की जोधपुर से जयपुर की यात्रा के दौरान स्वागत की पूरी तैयारी अशोक परनामी और युनूस खान के साथ राजपाल सिंह ने संभाली थी। राजपाल सिंह ने भाजपा के युवा मोर्चा के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के बजाय सालासर में वसुंधरा राजे के जन्मदिन में कार्यक्रम में शामिल होकर यह संदेश दे दिया था कि उनके लिए संगठन के बढ़कर राजे हैं। यह संदेश केन्द्रीय नेतृत्व तक भी पहुंचा। इसके बाद केन्द्रीय नेतृत्व के सर्वे में भी यह बात सामने आ गई कि यदि राजपाल को उम्मीदवार बनाया तो हार सुनिश्चित है।

इस सीट से पूर्व उपराष्ट्रपति रहे भैरो सिंह शेखावत के भतीजे राजेन्द्र सिंह शेखावत, आरएसएस के क्षेत्रीय पदाधिकारियों की करीबी रहे प्रतापभानू शेखावत, पूर्व प्रचारक रहे धनंजय सिंह, निर्दलीय चुनाव लड़ चुके आसु सिंह सुरपुरा और प्रेम सिंह बनवासा टिकट की दावेदारी कर रहे थे। राजेन्द्र सिंह शेखावत, धनंजय और बनवासा की क्षेत्र में पकड़ नहीं है। वहीं, आसु सिंह की कार्यशैली को लेकर संगठन में उहापौह की स्थिति थी। चूंकि यह राजपूत सीट रही है, इसलिए राजपूत भी सध जाएं और कार्यकर्ताओं और आम जनता की नाराजगी भी दूर हो जाए। इसे देखते हुए इसी क्षेत्र के सांसद राज्यवर्द्धन सिंह को विधानसभा प्रत्याशी बना दिया गया। 

भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व ने राज्यवर्धन सिंह को विधानसभा चुनाव में उतारने की तैयारी पहले ही कर ली थी। यह माना जा रहा था कि उन्हें कोटपूतली से उतारा जाएगा। इस बारे में सिंह से बातचीत भी की थी, लेकिन उन्होंने हामी नहीं भरी थी। यह कह दिया था कि जो भी संगठन तय करेगा, उसकी पालना करेंगे। जब पार्टी के सर्वे में यह सामने आया कि झोटवाड़ा में दमदार उम्मीदवार नहीं उतारा गया तो राजधानी की यह सीट कांग्रेस के खाते में जा सकती है। चूकि राज्यवर्धन ने ग्रामीण इलाकों में खेल प्रतिस्पर्धाएं भी कराई वहीं पूरे समय सक्रिय रहे। यह देखते हुए पार्टी ने उन्हें झोटवाड़ा से प्रत्याशी बना दिया।

मंडावा विधानसभा सीट
शेखावाटी क्षेत्र में कांग्रेस का दबदबा कायम है। इस क्षेत्र में जाटों का अहम रोल चुनाव में अहम रहता है। पिछले चुनाव में भी भाजपा को इस क्षेत्र की 21 में से केवल तीन सीटों पर संतोष करना पड़ा था। यहां सीकर, झुंझुनूं और चूरू जिले में मजबूत जाट नेता की भाजपा को जरूरत थी, जो आसपास की सीटों पर भी प्रभाव डाल सके। इसलिए भाजपा ने मंडावा से सांसद नरेन्द्र कुमार को मैदान में उतारा है। भाजपा संगठन के सर्वे में यह सामने आ गया था कि यहां सांसद नरेन्द्र कुमार के अलावा कोई दूसरा स्थानीय कार्यकर्ता ऐसा नहीं है, जो कांग्रेस को मात दे सके। इसलिए भाजपा ने यहां नरेन्द्र को चुनाव मैदान में उतारा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुद शेखावाटी में सभा करके गए थे। यहां किसानों की कर्जमाफी का मुद्दा उठाया था। भाजपा ने ऐसे किसानों को जो जाट वर्ग से आते हैं, जिनकी जमीनें नीलाम हुई हैं। उसे यहां मुद्दा बना रखा है, नरेन्द्र किसानों के मुद्दों पर कांग्रेस को घेरेंगे।

तिजारा विधासभा सीट
तिजारा भाजपा के लिए ऐसी सीट है, जहां से फिलहाल सीट निकालना स्थानीय कार्यकर्ता के लिए टेढी खीर है। पिछली बार भी भाजपा दूसरे नंबर पर भी मुकाबला नहीं कर पाई थी। यह यादव और गुर्जरों के साथ मुस्लिम बहुतायत से हैं। मेव मुस्लिम समाज का बड़ा तबका कांग्रेस के साथ है। वहीं, आसपास के मेवात क्षेत्रों में कांग्रेस एससी और मुस्लिम के गठजोड़ से जीतती आई है। भाजपा यहां वोटों का ध्रुवीकरण करके इस सीट को निकालने के लिए सांसद बाबा बालकनाथ को मैदान में उतारा है। 

बाबा बालकनाथ भाजपा के फायरब्रांड नेता के रूप में इस क्षेत्र में जाने जाते हैं। हाल ही में उन्होंने रथयात्रा पर पथराव करने तथा युवकों को हिरासत में रखने पर पुलिस अधिकारी को जिस तरह से धमकाया था, उससे उनके चर्चे इस क्षेत्र में आम है। भाजपा में यह भी चर्चा है कि भाजपा उन्हें यूपी में योगी तरह ही चुनाव जीतने पर सीएम पद पर प्रोजेक्ट कर सकती है। इसके चलते आसपास की सीटें भी वे प्रभावित कर सकते हैं।

सवाईमाधोपुर विधासभा सीट
सवाईमाधोपुर गुर्जर मीणा बाहुल्य इलाका है। इस क्षेत्र में किरोड़ीलाल मीणा का खासा प्रभाव है। भाजपा सूत्रों के अनुसार, भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व मीणाओं को साधने के लिए पहले से ही तैयारी में जुटा था। इसमें अहम भूमिका सांसद किरोड़ीलाल मीणा निभा रहे थे। भाजपा के सर्वे में भी किरोड़ी के इस इलाके में दबदबे की बात सामने आई थी। हालांकि, उन्होंने केन्द्रीय नेतृत्व से लालसोट, महुवा, बामनवास, सपोटरा आदि सीटों से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। लेकिन केंद्रीय नेतृतव ने उन्हें सवाई माधोपुर से टिकट देकर मैदान में इसलिए उतार दिया, जिससे वहां की आसपास की सीटों पर भी उनका प्रभाव पड़ सके।

किशनगढ़ विधासभा सीट
भाजपा ने सांसद किशनगढ़ से भागीरथ चौधरी को उम्मीदवार बनाया है, वे पहले भी किशनगढ़ से विधायक रह चुके हैं। यहां पिछली बार वसुंधरा राजे खेमे के माने जाने वाले विकास को पार्टी ने टिकट दिया था। चूंकि संगठन के सर्वे में यह बात सामने आई कि खेमे विशेष के दबदबे को तोड़ना जरूरी है। इसलिए सांसद भागीरथ को यहां मैदान में उतारा गया है। वे मजबूत उम्मीदवार हैं, उनका फायदा आसपास की सीटों पर मिलने की उम्मीद हैं।


सांचौर विधासभा सीट
सांचौर में वर्तमान हालात में पार्टी के अंदर भारी गुटबाजी मची हुई है। कई दमदार दावेदार खम ठोक कर टिकट मांग रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि हाल ही यहां वर्तमान में एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसे लेकर पार्टी में खासा बवाल मचा था। यहां स्थानीय दावेदारों की खींचतान को रोकने व सीट निकालने के लिए सांसद देवजी पटेल को मैदान में उतारा है। उनका क्षेत्र में साखा दबदबा है, जिसका फायदा पार्टी को अन्य सीटों पर भी मिलने की उम्मीद है।

पहली सूची में जितने प्रत्याशियों की घोषणा हुई है। उनमें सबसे ज्यादा राजेन्द्र राठौड़ खेमे के बताए जा रहे हैं। भाजपा पदाधिकारी व नेताओं के अनुसार गंगानगर से उम्मीदवार जयदीप बिहाणी, सुजानगढ़ से संतोष मेघवाल, झुंझुनूं से बबलू चौधरी, नवलगढ़ से विक्रम जाखल आदि राजेन्द्र राठौड़ के करीबी हैं। जाखल और बबलू चौधरी ने पिछला विधानसभा चुनाव निर्दलीय लड़ा था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed