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Rajasthan: चुनाव तारीख से खुश नहीं महामंडलेश्वर; जानकार भी कह रहे 15 प्रतिशत वोट गिरने की बात, क्या है वजह
Tue, 10 Oct 2023 01:46 PM IST
अर्पित याज्ञनिक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजस्थान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजस्थान
Published by: अर्पित याज्ञनिक
Updated Tue, 10 Oct 2023 01:46 PM IST
सार
Rajasthan Election 2023: प्रदेश में चुनाव 23 नवंबर यानी देव उठनी ग्यारस पर होना तय हुआ है, प्रदेश में पिछले साल लगभग 60 हजार शादी हुई थीं, जोकि रिकार्ड है, इस वर्ष भी यह आंकड़ा लगभग समान रहने वाला है, शादी की धूमधाम चुनाव पर खासा प्रभाव डाल सकती है।
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महंत और महामंडलेश्वर हंसराम।
- फोटो : social media
विस्तार
राजस्थान में विधानसभा चुनाव की तारीखों (Rajasthan Election 2023 Dates) का ऐलान होते ही एक नया विवाद सामने आ गया है। उस दिन देवउठनी एकादशी भी है। वैसे तो देवउठनी एकादशी एक पावन पर्व माना जाता है, इस दिन बिना मुहूर्त के भी सब मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। 23 नवंबर देव उठनी एकादशी के दिन को ही चुनाव आयोग ने मतदान के दिन के रूप में चुना है, जिसका एक बड़ा प्रभाव राजस्थान में वोट की प्रतिशत पर होने की संभावना जताई जा रही है। इसको लेकर अंतरराष्ट्रीय हरिशेवा धाम के महंत और महामंडलेश्वर हंसराम ने चुनाव आयोग (Election Commission) से तारीख बदलने की मांग की है।
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प्रदेश में पिछले वर्षों को देखे तो जो शादियां होटल और गार्डन में हुई हैं उनका आंकड़ा लगभग 50 हज़ार रहा है, पिछले साल यह आंकड़ा 60 हज़ार रहा है, इसमें वो शादियां शामिल नहीं है, जो निजी प्लॉट, घर और अन्य स्थानों पर हुई हैं। शादियों का हर समाज में अपना महत्व और प्रभाव होता है, प्रदेश में शादियों का असली माहौल ग्रामीण इलाकों में होता है, जहां आज भी शादी एक पांच दिन का उत्सव है। आज भी ग्रामीण इलाकों में पूरा गांव एकत्र होकर शादी में जाता है, इसका सीधा प्रभाव वोटिंग पर नजर आने वाला है। शादियों में जाने के लिए लोग एक दिन पहले ही निकल जाते हैं और अगले दिन वापसी करते हैं।
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प्रदेश में बड़ा वर्ग जाट, गुर्जर और मीणा समुदाय का
प्रदेश में बड़ा वर्ग जिसमें जाट, गुर्जर और मीणा समुदाय है जो बढ़-चढ़कर शादियों का हिस्सा बनता है। यही समुदाय चुनाव की भी अहम भूमिका निभाता है। अब यह अगर लोग शादियों में व्यस्त हो जाते हैं तो वोटिंग प्रतिशत 15% से गिर सकता है। 2018 में राजस्थान में 74% वोट डाले गए थे। जानकारों के मुताबिक अगर इस बार शादियों का प्रभाव नजर आता है तो यह आकड़ा 60% तक हो सकता है।
हिंदू पर्व के दिन वोटिंग से प्रभाव पड़ेगा
कई हिन्दू धर्म के महंत और जिम्मेदारों ने इसको लेकर आशंका जताई है, आचार्य बल मुकुंद ने भी कहा है कि हिंदू पर्व के दिन वोटिंग से प्रभाव पड़ेगा और वोटिंग कम हो सकती है, जोकि भाजपा के लिए हितकर नहीं है। वहीं, दूसरी ओर कुछ जानकर कहते हैं कि देव उठनी का नुकसान कांग्रेस को होने वाला है क्योंकि जाट और गुर्जर वोट नहीं पड़ने से कांग्रेस कमजोर होती है, पिछले चुनाव में गुर्जर वोट से ही कांग्रेस कि जीत सुनिश्चित हुई थी।
कांग्रेस के विनाश के लिए बताया उपयुक्त दिन- जाेशी
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी ने देव उठनी को पावन पर्व बताते हुए कांग्रेस के विनाश के लिए दिन को उपयुक्त बताते हुए कहा कि जिस दिन देव उठेंगे उसी दिन वोटिंग एक अच्छा संकेत है। साथ ही जोशी बोले कि प्रदेश की जनता चुनाव लड़ रही है इसलिए कोई डर नहीं है। अगर वोटिंग पर ज्यादा प्रभावित करने की रिपोर्ट आयी तो इसकी तारीक में फेरबदल की चर्चा की जा सकती है।
चुनाव या शादी किसमें शामिल होंगे ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी
चुनाव ड्यूटी में तैनात सरकारी कर्मचारियों के लिए भी ये एक बड़ा संकट बन गया है। उनको चिंता सता रही है कि इस दिन हर किसी के यहां कोई न कोई शादी पड़ ही जाती है। अब जिनकी ड्यूटी चुनाव में लगेगी वे तो शादी में भाग नहीं ले पाएंगे। महामण्डलेश्वर ने कहा कि विश्व प्रसिद्ध पुष्कर मेला भी इसी दिन से शुरू होने जा रहा है। ऐसे में चुनाव की तिथि को बदलने को लेकर मांग की गई है। अंतरराष्ट्रीय हरिशेवा धाम के महंत और महामंडलेश्वर हंसराम ने चुनाव आयोग से मांग की है कि 23 नवंबर के स्थान पर चुनाव की तारीख बदलकर आगे या पहले करें, ताकि आमजन धार्मिक पर्वों में भागीदारी कर सकें। ऐसे में मतदान प्रक्रिया पर भी असर पड़ेगा।