Rajasthan: क्या पूरा होगा सीएम का 350 बिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य? जानिए किन हालातों में है राजस्थान
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोमवार को दक्षिण कोरिया में दावा किया कि अगले 5 सालों में प्रदेश को 350 बिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाएंगे। मौजूदा अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 186 बिलियन डॉलर है। इसे 350 तक पहुंचाने के लिए सरकार को बेहतर वित्तीय प्रबंधन का रोडमैप देना होगा। पिछले 5 सालों में वित्तीय प्रबंधन के नाम पर राजस्थान का कर्ज 4 लाख 57 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 6 लाख 40 हजार करोड़ रुपये पहुंच चुका है। पेश है राजस्थान के वित्तीय प्रबंधन पर एक रिपोर्ट...
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राइजिंग राजस्थान के रोड शो को लेकर आज दक्षिण कोरिया पहुंचे सीएम भजनलाल शर्मा ने राजस्थान की अर्थव्यवस्था को अगले पांच सालों में 350 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का दावा किया है। इसके लिए वे निवेश लाने की भरपूर कोशिश भी कर रहे हैं। लगातार रोड शो कर रहे हैं, लेकिन वित्तीय प्रबंधन को लेकर उन्हें कोई ठोस कदम उठाने होंगे।
राजस्थान की मौजूदा जीडीपी का साइज 186 बिलियन डॉलर यानी 15 लाख 28 हजार करोड़ अनुमानित बताया गया है। यानी 350 बिलियन डॉलर तक जाने में लगभग अर्थव्यवस्था का आकार 2 दुना करना होगा। आर्थिक विशेषज्ञों की मानें तो कोविड के बाद मौजूदा अर्थव्यवस्था की जो रफ्तार है उसमें पांच सालों में राजस्थान की जीडीपी वैसे ही 350 बिलियन डॉलर क्रॉस कर जाएगी। यह कोई बहुत बड़ा लक्ष्य नहीं है। मौजूदा जीडीपी ग्रोथ रेट 12 से 13 प्रतिशत चल रही है। बड़ा सवाल ये है कि इस आर्थिक विकास की कीमत हम क्या चुका रहे हैं। जिस वित्तीय प्रबंधन के दावे किए जाते हैं, क्या वह अकाउंटेबल हैं? जिस टीम के हाथों में राजस्थान का वित्तीय प्रबंधन है, उन्होंने पिछले पांच सालों में राजस्थान को कहां पहुंचाया है ये भी बड़ा सवाल है? राजस्थान में वित्त विभाग की कमान बीते लगभग पांच सालों से मौजूदा एसीएस अखिल अरोड़ा ही संभाले हैं। इसलिए इन 5 सालों में वित्तीय प्रबंधन की जिम्मेदारी भी पूरी तरह उन्हीं की रही है।
राजस्थान के खजाने को गिरवी रखकर भी कर्ज लिया
पांच वर्षों में वित्तीय प्रबंधन के नाम पर राजस्थान का कर्ज 4 लाख 57 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 6 लाख 40 हजार करोड़ रुपये पहुंच चुका है। बोर्ड-कॉरपोरेशन और पीएसयूज पर ऋण दायित्व 1 लाख 10 हजार करोड़ है। राजस्थान के खजाने को गिरवी रखकर भी कर्ज लिया और इतना सब होने के बाद भी इस वित्तीय वर्ष में 20 हजार करोड़ रुपये की पेंडेंसी लेकर आए। इस कर्ज की एवज में इस साल ही करीब 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक की रकम ब्याज के रूप में अदा कर रहे हैं। प्रदेश की डीजीपी से इसकी तुलना करें तो प्रदेश की जीडीपी करीब 15 लाख 28 हजार करोड़ रुपये अनुमानित है। यानी 186 बिलियन डॉलर। वहीं, प्रदेश पर कुल ऋण दायित्व करीब 76 बिलियन डॉलर हो चुका है।
CAG ने बार-बार खड़े किए सवाल
इन पांच सालों में सीएजी ने लगातार राजस्थान के वित्तीय प्रबंधन को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए। सीएजी की रिपोर्ट में जीपीएफ घोटाले और एनपीएस घोटाले का जिक्र आया। हाल में पेश सीएजी की कोषालयों की वार्षिक समीक्षा रिपोर्ट में राजस्थान के IFMS सिस्टम के चलते दोहरे भुगतान से जुड़े दर्जनों मामले रिपोर्ट किए गए। जिस IFMS सिस्टम को केंद्र सरकार की एजेंसी NIC ने 65 करोड़ में अपग्रेड करने का प्रस्ताव दिया था, उसे प्राइवेट कंपनियों के हाथों में दिया और इसके लिए 10 गुना ज्यादा राशि खर्च की गई।
ऑटोमेशन सिस्टम पर सीएजी ने बार-बार उठाए सवाल
- इसमें IFMS के ऑटोमेशन सिस्टम के चलते 54 लाख रुपये से ज्यादा विद्युत बिलों के दोहरे भुगतान।
- मुख्यमंत्री निशुल्क निरोगी राजस्थान योजना में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को दी गई इंम्प्रेस्ट राशि का दोहरा भुगतान।
- पंचायती राज/निकायों के पीडी एडवाइज कर फर्म को 5.60 लाख रुपये का दोहरा भुगतान।
- IFMS के ऑटो सिस्टम पर नगर पालिका नीमराणा के इनवाइस में जीएसटी नहीं जमा करवाने से 15 लाख रुपये के राजस्व की हानि।
- बकाया वेतन और एरियर का दोहरा भुगतान, मासिक वेतन का दोहरा भुगतान, पेंशन का दोहरा भुगतान। अधिक महंगाई भत्ते का भुगतान। अधिक एचआरए का भुगतान।
- मरणोपरांत पेंशन का अनियमित भुगतान।
- एफवीसी बिलों का दोहरा भुगतान।
- ठेका वाहन चालकों को दोहरा भुगतान।
- इनके अलावा भी दर्जनों आपत्तियां सीएजी की तरफ से राजस्थान के वित्तीय प्रबंधन को लेकर की गई हैं।
ग्रांट का पैसा कैपिटल में दिखाया- ये मूल नियमों के विरुद्ध
2022-23 में वित्त विभाग ने राजस्थान की सार्वजनिक कंपनियों व ऑटोनोमस बॉडीज के खाते में ग्रांट के रूप 493 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। इस राशि को गलत तरीके से कैपिटल एक्सपेंडीचर हैड में दिखाया।
राजस्थान को कर्ज में डुबोते अफसरों को RBI ने बार-बार चेताया
2022-23 वित्तीय वर्ष में 124 दिन सरकार को आरबीआई में कैश बैलेंस मेटेंन करने के लिए स्पेशल वेज एंड मीन्स एडवांस लेना पड़ा। यह राशि 1, 01, 386 करोड़ रुपये थी। इसके एवज में आरबीआई को 112 करोड़ रुपये का ब्याज सरकारी खजाने से चुकाना पड़ा। दिसंबर 2023 में RBI ने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए पत्र लिखा कि हर तिमाही में राजस्थान अपनी सीमा से बाहर जाकर कर्ज ले रहा है।
ट्रेजरी बिलों की राशि ठिकाने लगाई
राज्य के खजाने में अधिशेष 5 हजार करोड़ रुपये व ट्रेजरी बिल्स के रूप में 15 हजार करोड़ रुपये की राशि खर्च कर दी।
संस्थानों की जमा राशि भी खर्च कर डाली
राजस्थान की विभिन्न यूनिवर्सिटीज व सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों की जो राशि बैंकों में भविष्य की जरूरतों के लिए जमा थी, उसे वित्त विभाग के अफसरों ने पीडी खातों में ट्रांसफर करवाकर खर्च कर दी। इससे यह हुआ कि ये संस्थान अपनी वित्तीय जरूरतों के लिए पूरी तरह राज्य सरकार पर ही निर्भर हो गए।
DMFT का खाता भी उड़ाया
DMFT फंड में जमा 5 हजार करोड़ रुपये भी नियमों के बाहर जाकर खर्च कर दिए।
संचित निधि को दांव पर लगाया
राज्य की बिगड़ी अर्थव्यवस्था के कारण वित्तीय संस्थाओं ने जब सरकारी प्रतिभूति पर ऋण देने से मना कर दिया तो DIRECT DEBIT MANDATE की शर्त पर मौजूदा सरकार से साइन करवा कर कर्ज उठा लिया। इस शर्त के मायने ये हैं कि कर्ज देने वाली संस्थाएं राज्य की संचित निधि से बिना सरकार की अनुमति के सीधे पैसा वसूल सकेंगी। केंद्र सरकार द्वारा तय सीमा से ज्यादा कर्ज होने पर इन्होंने लगभग समस्त बोर्ड, कंपनियों को विभिन्न बैंकों, HUDCO, LIC, REC से जबरन कर्ज दिलवा दिया। कई बोर्ड-कॉरपोरेशन के फिक्स डिपॉजिट तक तुड़वा डाले। आज स्थिति ये है कि बोर्ड-कॉरपोरेशन और पीएसयूज पर 1 लाख 10 हजार करोड़ से ज्यादा का कर्ज हो चुका है।
चेताने के बाद भी सेंट्रलाइज्ड भुगतान व्यवस्था लागू की गई
CAG के बार-बार चेताए जाने के बावजूद IFMS में बिलों के ऑटोमेशन व ट्रेजरी अकाउंटिंग सिस्टम को बाईपास कर सेंट्रलाइज्ड भुगतान व्यवस्था लागू की गई। इसके चलते सरकार का चेकिंग सिस्टम ठप हो गया। आज स्थिति ये है कि पेंशनर्स महीनों से पेंशन के लिए चक्कर लगा रहे हैं। दूसरी तरफ कर्मचारी के रिटायर हुए बिना ही उसके खातों में पेंशन बेनिफिट ट्रांसफर हो रहे हैं। कई ऑफिसों में 7 गुना सेलेरी क्रेडिट हो रही है तो कई ऑफिस में वेतन बिल जनरेट होने के बाद भी खातों में वेतन ट्रांसफर नहीं हो रहे। ऐसे हजारों केस लगातार सरकार के सामने आ रहे हैं, जिससे न सिर्फ कर्मचारियों का मनोबल टूट रहा है, बल्कि सरकार के राजस्व का भी भारी नुकसान हो रहा है।
NPS घोटाला: कर्मचारियों के खातों से कटौती की, लेकिन जमा नहीं करवाया
यही नहीं वित्त विभाग के अफसरों ने पिछली सरकार को खुश करने के लिए कर्मचारियों के पैसे मुफ्त वाली योजनाओं पर लुटा दिए। इसमें ओपीएस लागू हेाने से पहले जनवरी से मार्च 2022 तक कर्मचारियों खातों से कटौती की गई। अंशदान की रकम केंद्र सरकार के एनएसडीएल फंड में जमा ही नहीं करवाई गई। इसका खुलासा सीजीए ने अपनी रिपोर्ट में किया था।
जीपीएफ घोटाला: कर्मचारियों के कल्याण में लगनी थी, रेवेन्यू घाटा कम करने में लगा दी
जीपीएफ सेटलमेंट फंड में जमा तीन हजार करोड़ रुपये की जो राशि कर्मचारी कल्याण कोष में जमा करवानी थी। उसे रेवेन्यू घाटे को कम करने में लगा दिया। सीएजी की ओर से राज्य सरकार को ऐसा करने से मना भी किया गया, लेकिन अफसर हर साल नया झूठ गढ़ कर पैसा ठिकाने लगा गए।
RWSSC घोटाला: बिना विधानसभा से पूछे पीडी खातों में राशि ट्रांसफर
वित्त (मार्गोपाय) विभाग ने पेयजल परियोजना आरडब्ल्यूएसएससी में पेयजल के यूजर चार्जेज की राशि बिना विधानसभा से अनुमति सीधे पीडी खातों में ट्रांसफर करने की अनुमति दे दी। ये न सिर्फ विधायिका का विशेषाधिकार हनन के दायरे में आता है, बल्कि संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ भी है। सीएजी ने एक बार इस आपत्ति जातते हुए वित्त (मार्गोपाय) विभाग से स्पष्टिकरण देने को कहा है। इस संबंध सीजीए पहले भी राज्य सरकार को तीन चिट्ठी भी लिखी, लेकिन वित्त (मार्गोपाय) विभाग के अधिकारियों ने इस पर कोई जवाब तक देना जरूरी नहीं समझा।
पंचायतों का पैसा रिलीज नहीं किया
वित्त विभाग के अफसरों ने पंचायतों का पैसा रिलीज नहीं किया। नतीजा इस सरकार में पंचायतों में हड़ताल हो गई। ताले लग गए। सोशल सिक्यूरिटी पेंशन का पैसा महीनों तक पेंडिंग रखा जा रहा है। अभी जून से पैसा रिलीज नहीं हुआ है। बेरोजगारी भत्ते को लेकर भी खूब बवाल हुआ। विपक्ष ने इसे विधानसभा में मुद्दा बना डाला। दबाव पड़ा तब जाकर भुगतान हुआ। केंद्रीय योजनाओं के लिए स्टेट शेयर रिलीज नहीं किया। नतीजा केंद्र सरकार ने आगे की किश्तें रोक दी। राजस्थान में योजनाएं ठप पड़ गईं।
एक्सपर्ट ओपीनियन
बजट अध्ययन एवं अनुसंधान केंद्र के निदेशक नेसार अहमद ने कहा कि 350 बिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य बहुत बड़ा नहीं है। राजस्थान जिस आर्थिक वृद्धि की रफ्तार से चल रहा है, उसे देखते हुए ये आसानी से पहुंच सकता है। सवाल ये है कि हमारा लक्ष्य क्या होना चाहिए? गरीबी दूर करना, कुपोषण दूर करना और असमानता दूर करने का लक्ष्य इससे कहीं अधिक बड़ा है।