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Rajasthan: कर्ज में डूबी ‘धोरों की धरती’ को वित्तीय संसाधन जुटाने में कठिनाइयां, अब इस बजट से हैं उम्मीदें
Tue, 18 Feb 2025 04:39 PM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Tue, 18 Feb 2025 04:39 PM IST
सार
अतिशय कर्ज में डूबी राजस्थान सरकार के सामने इस बजट में राज्य की आर्थिक स्थिति को संतुलित बनाए रखना और नई योजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन जुटाना एक बहुत बड़ी चुनौती है। सरकार अपने बजट में इससे कैसे निपटती है, यह देखने वाली बात होगी।
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राजस्थान बजट 2025
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजस्थान सरकार पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे राज्य की आर्थिक स्थिति को संतुलित बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। बढ़ते कर्ज की वजह से सरकार को वित्तीय संसाधन जुटाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। आने वाले बजट में सरकार इस संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठाएगी, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
तेजी से बढ़ता कर्ज और उसकी स्थिति
सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में राज्य पर कुल कर्ज 6.88 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, जबकि वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह 5.79 लाख करोड़ रुपए था। यह बढ़ती हुई कर्जदारी राज्य की वित्तीय सेहत के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है।
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यदि पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2017 में प्रति व्यक्ति कर्ज 36,000 रुपए से अधिक था, जो अब बढ़कर करीब 85,000 रुपए हो गया है। इसका मतलब यह है कि बीते कुछ वर्षों में राजस्थान की जनता पर कर्ज का भार दोगुने से भी अधिक बढ़ गया है।
राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में राजस्थान की स्थिति
वित्तीय मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार कर्ज लेने के मामले में राजस्थान देशभर में सातवें स्थान पर है। राज्य की जीडीपी (सकल राज्य घरेलू उत्पाद) के मुकाबले 39 फीसदी तक का कर्ज सरकार पर हो चुका है, जो कि कर्ज लेने की निर्धारित सीमा के करीब है। यदि यह सीमा पार हो जाती है, तो राज्य की वित्तीय स्थिति और अधिक नाजुक हो सकती है।
इसके अलावा राज्य के कुल राजस्व का लगभग 14 फीसदी हिस्सा केवल लिए गए कर्ज पर ब्याज चुकाने में खर्च हो जाता है। इससे राज्य के पास अन्य महत्वपूर्ण विकास कार्यों, योजनाओं और कल्याणकारी नीतियों के लिए सीमित संसाधन ही बचते हैं।
विकास और वित्तीय संतुलन की चुनौती
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि किसी भी राज्य के विकास के लिए वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है और इसके लिए सरकारों को अक्सर कर्ज लेना पड़ता है लेकिन कर्ज लेकर उसका सही उपयोग करना और उसकी समय पर अदायगी सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती होती है। यदि कर्ज का भार लगातार बढ़ता चला जाए और उसे चुकाने के लिए पर्याप्त वित्तीय प्रबंधन न किया जाए, तो यह राज्य की अर्थव्यवस्था को कमजोर कर सकता है।
राजस्थान सरकार को इस बढ़ते कर्ज को नियंत्रित करने और वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करने के लिए ठोस नीतिगत कदम उठाने होंगे। आगामी बजट में इस दिशा में क्या उपाय किए जाएंगे, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। सरकार को न केवल कर्ज के प्रभावी प्रबंधन पर ध्यान देना होगा, बल्कि नए राजस्व स्रोत विकसित करने और व्यय को नियंत्रित करने की रणनीति भी बनानी होगी, ताकि राज्य की अर्थव्यवस्था संतुलित और सुदृढ़ बनी रहे।
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तेजी से बढ़ता कर्ज और उसकी स्थिति
सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में राज्य पर कुल कर्ज 6.88 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, जबकि वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह 5.79 लाख करोड़ रुपए था। यह बढ़ती हुई कर्जदारी राज्य की वित्तीय सेहत के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है।
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यदि पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2017 में प्रति व्यक्ति कर्ज 36,000 रुपए से अधिक था, जो अब बढ़कर करीब 85,000 रुपए हो गया है। इसका मतलब यह है कि बीते कुछ वर्षों में राजस्थान की जनता पर कर्ज का भार दोगुने से भी अधिक बढ़ गया है।
राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में राजस्थान की स्थिति
वित्तीय मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार कर्ज लेने के मामले में राजस्थान देशभर में सातवें स्थान पर है। राज्य की जीडीपी (सकल राज्य घरेलू उत्पाद) के मुकाबले 39 फीसदी तक का कर्ज सरकार पर हो चुका है, जो कि कर्ज लेने की निर्धारित सीमा के करीब है। यदि यह सीमा पार हो जाती है, तो राज्य की वित्तीय स्थिति और अधिक नाजुक हो सकती है।
इसके अलावा राज्य के कुल राजस्व का लगभग 14 फीसदी हिस्सा केवल लिए गए कर्ज पर ब्याज चुकाने में खर्च हो जाता है। इससे राज्य के पास अन्य महत्वपूर्ण विकास कार्यों, योजनाओं और कल्याणकारी नीतियों के लिए सीमित संसाधन ही बचते हैं।
विकास और वित्तीय संतुलन की चुनौती
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि किसी भी राज्य के विकास के लिए वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है और इसके लिए सरकारों को अक्सर कर्ज लेना पड़ता है लेकिन कर्ज लेकर उसका सही उपयोग करना और उसकी समय पर अदायगी सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती होती है। यदि कर्ज का भार लगातार बढ़ता चला जाए और उसे चुकाने के लिए पर्याप्त वित्तीय प्रबंधन न किया जाए, तो यह राज्य की अर्थव्यवस्था को कमजोर कर सकता है।
राजस्थान सरकार को इस बढ़ते कर्ज को नियंत्रित करने और वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करने के लिए ठोस नीतिगत कदम उठाने होंगे। आगामी बजट में इस दिशा में क्या उपाय किए जाएंगे, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। सरकार को न केवल कर्ज के प्रभावी प्रबंधन पर ध्यान देना होगा, बल्कि नए राजस्व स्रोत विकसित करने और व्यय को नियंत्रित करने की रणनीति भी बनानी होगी, ताकि राज्य की अर्थव्यवस्था संतुलित और सुदृढ़ बनी रहे।