दिल्ली-एनसीआर से राजस्थान के औद्योगिक बेल्ट तक आरआरटीएस: सफर ही नहीं, बदल जाएगी पूरी इकोनॉमी
राजस्थान में बावल-बहरोड़ RRTS से दिल्ली-NCR और औद्योगिक बेल्ट की कनेक्टिविटी मजबूत होगी। नीमराणा-बहरोड़ में रोजगार, निवेश, कारोबार और क्षेत्रीय विकास को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
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विस्तार
दिल्ली-गुरुग्राम-रेवाड़ी-अलवर क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) कॉरिडोर का बावल-बहरोड़ हिस्सा राजस्थान के लिए सिर्फ एक नया रेल रूट नहीं होगा। इसके शुरू होने से दिल्ली-NCR और राजस्थान के औद्योगिक क्षेत्रों के बीच दूरी, यात्रा समय और रोजगार के अवसरों का पूरा गणित बदलने की उम्मीद है। राज्य सरकार ने बावल-बहरोड़ खंड की पूरक DPR को लेकर प्रक्रिया तेज कर दी है। बुधवार को शासन सचिवालय में मुख्य सचिव वी श्रीनिवास की अध्यक्षता में हुई बैठक में परियोजना की सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी गई।
औद्योगिक बेल्ट को मिलेगी तेज कनेक्टिविटी
प्रस्तावित RRTS कॉरिडोर सराय काले खां से बहरोड़ तक करीब 129.05 किलोमीटर लंबा होगा। राजस्थान में इसका 25.16 किलोमीटर हिस्सा आएगा। शाहजहांपुर, नीमराणा और बहरोड़ क्षेत्र में चार एलिवेटेड स्टेशन प्रस्तावित हैं। इसका सीधा फायदा अलवर-बहरोड़-नीमराणा के औद्योगिक क्षेत्र को मिल सकता है। दिल्ली-NCR से बेहतर और तेज कनेक्टिविटी होने पर कंपनियों के लिए कर्मचारियों की आवाजाही आसान होगी और राजस्थान के औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
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बदल सकता है वर्क कल्चर
RRTS का एक बड़ा संभावित असर रोजगार पर होगा। अभी लंबी दूरी और सड़क यातायात के कारण रोजाना अप-डाउन करना मुश्किल है। तेज क्षेत्रीय रेल कनेक्टिविटी विकसित होने के बाद NCR में रहने वाले कर्मचारी राजस्थान के औद्योगिक क्षेत्रों में नौकरी कर सकेंगे और राजस्थान के लोग दिल्ली-गुरुग्राम तक आसानी से पहुंच सकेंगे। इससे बहरोड़, नीमराणा और आसपास के क्षेत्रों में वर्कफोर्स की उपलब्धता बढ़ सकती है। आने वाले समय में यह क्षेत्र केवल औद्योगिक उत्पादन का केंद्र नहीं, बल्कि NCR से जुड़े बड़े रोजगार हब के रूप में भी विकसित हो सकता है।
कंपनियों के लिए भी बदलेगा निवेश का गणित
बेहतर कनेक्टिविटी किसी भी औद्योगिक क्षेत्र के लिए बड़ा प्लस पॉइंट होती है। RRTS आने से औद्योगिक इकाइयों को कुशल कर्मचारियों तक आसान पहुंच, कारोबारी यात्राओं में सुविधा और क्षेत्रीय बाजारों से बेहतर जुड़ाव मिल सकता है। नीमराणा-बहरोड़ जैसे क्षेत्रों में पहले से मौजूद औद्योगिक गतिविधियों को इसका अतिरिक्त फायदा मिलने की उम्मीद है। इससे आसपास लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, होटल, रिटेल और सर्विस सेक्टर के विस्तार की संभावनाएं भी बन सकती हैं।
सड़क पर घट सकता है निजी वाहनों का दबाव
इस कॉरिडोर का असर सिर्फ उद्योग और रोजगार तक सीमित नहीं रहेगा। रोजाना NCR और राजस्थान के बीच आने-जाने वाले लोगों के लिए RRTS एक वैकल्पिक सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराएगा। इससे दिल्ली-गुरुग्राम-रेवाड़ी-अलवर-बहरोड़ रूट पर निजी वाहनों और बसों का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। यानी एक तरफ यात्रा ज्यादा सुविधाजनक होगी, वहीं दूसरी तरफ सड़क पर ट्रैफिक और प्रदूषण का दबाव घटाने में भी क्षेत्रीय रेल की भूमिका हो सकती है।
बहरोड़ से आगे राजस्थान के लिए क्या मायने?
राजस्थान में अभी RRTS का हिस्सा भले ही 25.16 किलोमीटर है, लेकिन इसका रणनीतिक महत्व बड़ा है। दिल्ली-NCR की आर्थिक ताकत और राजस्थान के औद्योगिक बेल्ट को एक तेज परिवहन नेटवर्क से जोड़ना भविष्य में निवेश और शहरी विकास की दिशा भी प्रभावित कर सकता है।
7,747 करोड़ का प्रोजेक्ट
बावल-बहरोड़ खंड की अनुमानित लागत करीब ₹7,747 करोड़ रुपए है। इसमें 5,167.28 करोड़ रुपए मूल लागत, करीब 640 करोड़ रुपए भूमि लागत और 1,861 करोड़ रुपए उद्यम निधि शामिल है। परियोजना के वित्तीय दायित्व और संसाधन जुटाने को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई।