Rajasthan: डोटासरा की टिप्पणी पर सियासी घमासान, बोले- तब जो कहेंगे करने को तैयार; खास बातचीत में क्या दिए जवाब
Rajasthan Politics: कांग्रेस नेता डोटारास ने 'अमर उजाला' से खास बातचीत में कहा कि अगर, उनके पास मेरी किसी असंसदीय बात का ऑडियो वीडियो है तो सदन में पेश करें। फिर जो कहेंगे मैं करने के लिए तैयार हूं। जो मुझे पलटूराम कह रहे हैं वे गीता पर हाथ रख कर यह कह दें।
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Rajasthan Politics: इंदिरा गांधी को कांग्रेस की दादी बताने वाली टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि बात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के निलंबन तक जा पहुंची। डोटासरा पर आसन को अपमानित करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। डोटासरा कह रहे हैं कि इसका कोई साक्ष्य हो तो पेश करें। फिलहाल, सदन में की गई एक टिप्पणी से छिड़ा सियासी घमासान अब आर-पार की लड़ाई तक पहुंच चुका है। अमर उजाला ने इस मामले में डोटासरा से खास बातचीत की। पढ़िए, उन्होंने सवालों के क्या जवाब दिए..?
सवाल: आप पर आरोप लग रहे हैं कि सदन में कार्यवाही स्थगित होने के बाद आपने स्पीकर के लिए अपमान जनक शब्द कहे। क्या यह सही है?
जवाब- जो उन्होंने अखबार के आधार पर सदन में चर्चा करवाई। लोकसभा और राज्यसभा से लेकर ऐसे हजार उदाहरण हैं कि किसी भी अखबार को लेकर सदन में कोई भी चर्चा नहीं करवाई जा सकती। अगर, इनके पास मेरी किसी असंसदीय बात का कोई ऑडियो-वीडियो है तो उसे पेश करें। इसके बाद वे जो कहेंगे मैं करने के लिए तैयार हूं।
सवाल: आप पर एक और बड़ा आरोप है कि स्पीकर के चैंबर में जो समझौता हुआ आप उस पर नहीं टिके। संसदीय मंत्री आपको पलटू राम कह हरे हैं?
जवाब: बात यह हुई थी कि संपूर्ण घटनाक्रम के लिए खेद प्रकट करेंगे और मैंने 3 बार संपूर्ण घटनाक्रम पर खेद प्रकट किया। आज ये लोग कह रहे हैं कि डोटासरा पलटूराम है। मैं तो गोविंद राम हूं…पलटू राम नहीं हूं। फिर भी मैं कह रहा हूं कि वे गीता पर हाथ रखकर कह दें जो सनातन धर्म की बात करते हैं। यही नहीं मैं यह भी कह रहा हूं कि किसी काल्पनिक खबर के आधार पर उनको दुख हुआ है तो मैं व्यक्तिगत रूप से उनके घर जाकर उनसे मिलकर खेद प्रकट करूंगा।
सवाल: यह भी कहा जा रहा है कि आप स्पीकर को सीधे तौर पर टारगेट कर रहे हैं, आपका आचरण सही नहीं है?
जवाब: मैं चार बार सदन में चुनकर आया हूं। यही नहीं 2016 में इन्हीं की सरकार में मुझे सर्वश्रेष्ठ विधायक चुना गया था। इस एक घटना से पहले मेरा कभी भी निलंबन नहीं हुआ, न ही मुझे पहले कभी वॉर्निंग दी गई। तो यह कहना कि मैं संसदीय परंपराओं को जानता नहीं, उनका निर्वहन नहीं करता या मेरा आचरण ठीक नहीं है, यह बिल्कुल गलत बात है। इसका कोई मतलब नहीं है। सवाल यह है कि एक मंत्री के द्वारा प्रश्नकाल में बेवजह भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी की गई। मैं डॉयस पर इसी टिप्प्णी को एक्सपंज करवाने के लिए चढ़ा था। इसके अलावा डॉयस पर तो तीन लोग ही चढ़े थे, जबकि शाम को 6 लोगों को निलंबित कर दिया गया। डॉयस पर पहले भी लोग जाते रहे हैं। खुद देवनानी जी भी पिछली सरकार में डॉयस पर चढ़ने के मामले में निलंबित हुए थे।
सवाल: सदन में विवाद के बाद स्पीकर के चैंबर में क्या समझौता वार्ता हुई थी?
जवाब: निलंबन के बाद जो गतिरोध बना, उसके बाद सहमति बनी। जोगाराम पटेल ने सबके सामने मुझसे पूछा कि क्या आप माफी मांगोगे? इस पर मैंने स्पष्ट रूप से कहा था कि मैं माफी नहीं मांगूंगा, क्योंकि जब मैं डॉयस पर चढ़ा तो मेरा इशारा और चेहरा मंत्री की तरफ था। इसके बाद बात यह हुई की जनता के मुद्दे आने चाहिए तो हमने कहा ठीक है। बाद में जोगाराम मुझे स्पीकर के चैंबर में लेकर गए और उन्होंने कहा कि खेद प्रकट करके इस बात को समाप्त करो। तो मैंने कहा कि संपूर्ण घटनाक्रम के लिए मैं खेद व्यक्त कर दूंगा। इस पर उन्होंने कहा बस बात हो गई। इसके बाद स्पीकर बेवजह सदन चलाने लगे। हमने संसदीय कार्यमंत्री से पूछा तो उन्होंने कहा कि मैं बात करके आता हूं। फिर हम फिर स्पीकर के चैंबर में खाना खाने पहुंचे। यहां स्पीकर ने कहा कि मीडिया में एक बात चल रही है…तो मैंने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है फिर भी जब सदन शुरू होगा तो मैं जब खेद प्रकट करूंगा तो एक भाव उसका भी आ जाएगा। इसके बाद मैंने 3 बार खेद प्रकट कर दिया। अब इसके बाद क्या बच गया।