फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Jaipur News ›   Now Rajasthan will have seven divisions and 41 districts what did Congress leaders say on BhajanLal government

Rajasthan: अब राजस्थान में होंगे सात संभाग और 41 जिले, भजनलाल सरकार के फैसले पर कांग्रेस नेताओं ने क्या कहा

Sat, 28 Dec 2024 07:30 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: अरविंद कुमार Updated Sat, 28 Dec 2024 07:30 PM IST
सार

राजस्थान की भजनलाल कैबिनेट ने बड़ा फैसला लेते हुए एलान किया है कि पूर्ववर्ती गहलोत सरकार के अंतिम दौर में बने नौ नए जिले और तीन संभाग अब नहीं रहेंगे। सरकार के इस फैसले के साथ ही अब राजस्थान का भूगोल फिर से बदल गया है। जानिए कांग्रेस के नेताओं ने क्या कहा।

विज्ञापन
Now Rajasthan will have seven divisions and 41 districts what did Congress leaders say on BhajanLal government
कांग्रेस नेता प्रतिक्रिया - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सीएम भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में शनिवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में कर्मचारी कल्याण के साथ-साथ युवाओं के हित, प्रदेश में सुशासन और समग्र विकास सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण फैसले किए गए। संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने पत्रकार वार्ता में बताया कि कैबिनेट ने पिछली सरकार के समय में गठित जिलों और संभागों का पुनः निर्धारण किया है, जिसके बाद अब प्रदेश में कुल सात संभाग और 41 जिले होंगे।

विज्ञापन


विज्ञापन


संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने अपने कार्यकाल के आखिरी वर्ष में प्रदेश में 17 नवीन जिले और तीन नवीन संभाग बनाने का निर्णय लिया था, जिसके क्रम में राजस्व विभाग द्वारा दिनांक पांच अगस्त 2023 को अधिसूचना जारी कर जिलों और संभागों का सृजन किया गया था। तीन नए जिलों की घोषणा विधानसभा चुनाव 2023 की आचार संहिता से एक दिन पहले की गई, जिनकी अधिसूचना भी जारी नहीं हो सकी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


पूर्ववर्ती सरकार ने राजनीतिक लाभ के लिए किया नए जिलों और संभागों का गठन
पटेल ने बताया कि पूर्ववर्ती सरकार ने नवीन जिलों एवं संभागों का गठन पूरी तरह से राजनीतिक लाभ लेने के लिए किया। इसमें वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता, प्रशासनिक आवश्यकता, कानून व्यवस्था, सांस्कृतिक सामंजस्य आदि किसी भी महत्वपूर्ण बिन्दु को ध्यान में नहीं रखा गया। नए जिलों के लिए पिछली सरकार ने कार्यालयों में न तो आवश्यक पद सृजित किए और न ही कार्यालय भवन बनवाए। बजट एवं अन्य सुविधायें भी उपलब्ध नहीं कराई गई।



पुनर्निर्धारण के बाद भी आठ नए जिले रहेंगे यथावत
उन्होंने कहा कि गत सरकार के इस अविवेकपूर्ण निर्णय की समीक्षा करने हेतु राज्य सरकार द्वारा एक मंत्रिमंडलीय उप-समिति और इसके सहयोग के लिए सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. ललित के पंवार की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया। विशेषज्ञ समिति द्वारा नवगठित जिलों एवं संभागों के पुनर्निर्धारण के संबंध में तैयार की गई रिपोर्ट एवं सिफारिशें मंत्रिमंडलीय उप-समिति के समक्ष प्रस्तुत की गई। समिति द्वारा प्रस्तुत सिफारिशों पर विचार करते हुए नए सृजित जिलों में से नौ जिलों अनूपगढ़, दूदू, गंगापुरसिटी, जयपुर ग्रामीण, जोधपुर ग्रामीण, केकड़ी, नीमकाथाना, सांचौर और शाहपुरा तथा नवसृजित तीन संभागों बांसवाड़ा, पाली और सीकर को नहीं रखने का निर्णय मंत्रिमंडल द्वारा लिया गया है। आचार संहिता से ठीक पहले घोषित तीन नए जिलों मालपुरा, सुजानगढ़ और कुचामन सिटी को भी निरस्त करने का निर्णय राज्य मंत्रिमण्डल ने लिया है।

जिला परिषदों, पंचायत समिति और ग्राम पंचायतों का होगा पुनर्गठन
संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि मंत्रिमंडल के इस निर्णय के बाद अब राजस्थान में कुल सात संभाग एवं 41 जिले हो जाएंगे। यथावत रखे गए आठ नए जिलों फलौदी, बालोतरा, कोटपूतली-बहरोड़, खैरथल-तिजारा, ब्यावर, डीग, डीडवाना-कुचामन और सलूम्बर में प्रशासनिक ढांचा तैयार करने के लिए राज्य सरकार सभी जरूरी वित्तीय संसाधन एवं अन्य सुविधाएं मुहैया कराएगी। इससे इन नए जिलों में रहने वाले आमजन को इन जिलों के गठन का लाभ वास्तविक रूप में मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि अब जिला परिषदों, पंचायत समिति और ग्राम पंचायतों का भी पुनर्गठन किया जाएगा।

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने पत्रकार वार्ता में बताया कि राजस्थान सिविल सेवा (पुनरीक्षित वेतन) नियम, 2017 के नियम 14 की अनुसूची-1 में संशोधन, राजस्थान अधीनस्थ एवं लिपिक वर्गीय सेवा (समान पात्रता परीक्षा) नियम, 2022 में सीईटी स्कोर की वैधता तीन वर्ष करने, पशुधन सहायक को पदोन्नति का तीसरा अवसर उपलब्ध करवाने एवं इस संवर्ग के पदनामों में परिवर्तन के लिए सेवा नियमों में संशोधन को मंजूरी दी गई है।

मिनिमम एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (एमएसीपी) पर परिनिंदा के दंड का प्रभाव समाप्त
गोदारा ने बताया कि कार्मिकों के हित को ध्यान में रखते हुए मिनिमम एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (एमएसीपी) के तहत देय वित्तीय उन्नयन में राजस्थान सिविल सेवा (सीसीए) नियम, 1958 के अंतर्गत अनुशासनिक कार्यवाहियों में अधिरोपित परिनिंदा के दंड के प्रभाव को समाप्त करने का अनुमोदन किया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में परिनिंदा से दंडित कार्मिक को नौ, 18 एवं 27 वर्ष की नियमित सेवा पर देय वित्तीय उन्नयन का लाभ एमएसीपी की निर्धारित तिथि के एक वर्ष बाद मिल पाता है।

उन्होंने बताया कि राज्य मंत्रिमंडल ने कार्मिकों को होने वाले आर्थिक नुकसान को ध्यान में रखते हुए परिनिंदा के दंड के एमएएसपी पर प्रभाव को समाप्त करने के लिए राजस्थान सिविल सेवा (पुनरीक्षित वेतन) नियम, 2017 के नियम 14 की अनुसूची-1 में संशोधन के प्रस्ताव का अनुमोदन किया है। इससे पहले राज्य सरकार द्वारा सीसीए नियमों के अंतर्गत अनुशासनिक कार्यवाहियों में अधिरोपित परिनिंदा के दंड का पदोन्नति पर प्रभाव भी समाप्त किया जा चुका है।

अभ्यर्थियों को बड़ी राहत, सीईटी स्कोर की वैधता तीन वर्ष तक
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री ने कहा कि राजस्थान अधीनस्थ एवं लिपिक वर्गीय सेवा (समान पात्रता परीक्षा) नियम, 2022 में सीईटी स्कोर की वैधता अब एक वर्ष के बजाय तीन वर्ष के लिए रहेगी। इसके लिए नियमों में संशोधन को मंजूरी दी गई है। उन्होंने बताया कि सीईटी स्कोर की वैधता एक वर्ष होने के कारण हर साल होने वाली अगली सीईटी परीक्षा में अभ्यर्थियों की संख्या बढ़ती चली जा रही थी। अत्यधिक संख्या में आवेदन आने पर बोर्ड को वित्तीय भार और कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इसलिए सीईटी स्कोर की वैधता अवधि तीन वर्ष करने का निर्णय लिया गया है, जिससे अभ्यर्थियों को भी बड़ी राहत मिलेगी।

गोदारा ने बताया कि राजस्थान जनजाति क्षेत्रीय विकास राज्य एवं अधीनस्थ सेवा नियम, 2001 के अंतर्गत आने वाले छात्रावास अधीक्षक (पुरुष) ग्रेड-2 एवं छात्रावास अधीक्षक (महिला) ग्रेड-2 को समान पात्रता परीक्षा की अनुसूची-1 (स्नातक स्तर) में शामिल किया जा रहा है। इस संशोधन के फलस्वरूप जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग के पद सीईटी में शामिल किए जा सकेंगे, जिससे परीक्षार्थियों को अधिक पदों पर चयन का अवसर प्राप्त होगा।

पशुधन सहायक के पदनामों में परिवर्तन, तीसरी पदोन्नति का अवसर भी मिलेगा
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री ने बताया कि राजस्थान पशुपालन अधीनस्थ सेवा नियम, 1977 के तकनीकी संवर्ग में पशुधन सहायक को पदोन्नति का तीसरा अवसर उपलब्ध करवाने और इस संवर्ग के पदनामों में परिवर्तन के लिए सेवा नियमों में संशोधन को मंजूरी दी गई है। इस संशोधन के अनुसार तीसरी पदोन्नति का अवसर देने के लिए मुख्य पशुधन प्रसार अधिकारी का नवीन पद सृजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पशुधन सहायक का पदनाम अब पशुधन निरीक्षक, पशुचिकित्सा सहायक का पदनाम पशुधन प्रसार अधिकारी, सहायक सूचना अधिकारी का पदनाम वरिष्ठ पशुधन प्रसार अधिकारी किया जाएगा। इससे इस संवर्ग के कर्मचारियों के आत्मसम्मान एवं कार्यकुशलता में वृद्धि होगी।

चूरू के राजकीय महाविद्यालय सिद्धमुख के नाम परिवर्तन को स्वीकृति
गोदारा ने बताया कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में दानदाता के सम्मान व अन्य दानदाताओं को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से चूरू के राजकीय महाविद्यालय सिद्धमुख का नामकरण ‘श्रीमती शकुंतला देवी राजकीय महाविद्यालय, सिद्धमुख करने की स्वीकृति प्रदान की गई है।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की प्रतिक्रिया
अशोक गहलोत ने कहा कि हमारी सरकार द्वारा बनाए गए नए जिलों में से नौ जिलों को निरस्त करने का भाजपा सरकार का निर्णय अविवेकशीलता एवं केवल राजनीतिक प्रतिशोध का उदाहरण है। हमारी सरकार के दौरान जिलों का पुनर्गठन करने के लिए वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी रामलुभाया की अध्यक्षता में 21 मार्च 2022 को समिति बनाई गई थी, जिसको दर्जनों जिलों के प्रतिवेदन प्राप्त हुए। इन्हीं प्रतिवेदनों का परीक्षण कर समिति ने अपनी रिपोर्ट दी, जिसके आधार पर नए जिले बनाने का निर्णय किया गया।

मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ के अलग होने के बाद राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य बन गया। परन्तु प्रशासनिक इकाइयों का पुनर्गठन उस अनुपात में नहीं हुआ था। राजस्थान से छोटा होने के बाद भी मध्यप्रदेश में 53 जिले हैं। नए जिलों के गठन से पूर्व राजस्थान में हर जिले की औसत आबादी 35.42 लाख व क्षेत्रफल 12,147 वर्ग किलोमीटर था (हालांकि, त्रिपुरा राज्य का क्षेत्रफल 10,492 वर्ग किलोमीटर, गोवा राज्य का क्षेत्रफल 3,702 वर्ग किलोमीटर, दिल्ली केन्द्र शासित प्रदेश का क्षेत्रफल 1,484 वर्ग किलोमीटर है) जबकि नए जिले बनने के बाद जिलों की औसत आबादी 15.35 लाख व क्षेत्रफल 5268 वर्ग किलोमीटर हो गया था। जिले की आबादी व क्षेत्र कम होने से शासन-प्रशासन की पहुंच बेहतर होती है एवं सुविधाओं व योजनाओं की बेहतर डिलीवरी सुनिश्चित हो पाती है। छोटी प्रशासनिक इकाई होने पर जनता की प्रतिवेदनाओं का निस्तारण भी शीघ्रता से होता है।

भाजपा सरकार द्वारा जिन जिलों को छोटा होने का तर्क देकर रद्द किया है, वो भी अनुचित है। जिले का आकार वहां की भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर होता है। हमारे पड़ोसी राज्यों के जिले जैसे गुजरात के डांग (दो लाख 29 हजार), पोरबंदर (पांच लाख 85 हजार) एवं नर्बदा (पांच लाख 91 हजार), हरियाणा के पंचकुला (पांच लाख 59 हजार) एवं चरखी दादरी (लगभग पांच लाख एक हजार), पंजाब के मलेरकोटला (लगभग चार लाख 30 हजार), बरनाला (पांच लाख 96 हजार) और फतेहगढ़ साहिब (छह लाख) जैसे कम आबादी वाले जिले हैं।

कम आबादी वाले जिलों में सरकार की प्लानिंग की सफलता भी ज्यादा होती है। छोटे जिलों में कानून व्यवस्था की स्थिति को बहाल रखना भी आसान होता है। क्योंकि वहां पुलिस की पहुंच अधिक होती है।परिस्थितियों के आधार पर जिलों की आबादी में भी अंतर होना स्वभाविक है। जैसे उत्तर प्रदेश में प्रयागराज जिले की आबादी करीब 60 लाख है। जबकि चित्रकूट जिले की आबादी 10 लाख है। परंतु सरकार के लिए प्रशासनिक दृष्टि से छोटे जिले ही बेहतर लगते हैं।

सरकार की तरफ से एक तर्क यह दिया जा रहा है कि एक जिले में कम से कम तीन विधानसभा क्षेत्र होने चाहिए। जबकि भाजपा द्वारा 2007 में बनाए गए प्रतापगढ़ में परिसीमन के बावजूद भी केवल दो विधानसभा क्षेत्र हैं। सरकार द्वारा जहां कम दूरी का तर्क दिया जा रहा है, वो भी आश्चर्यजनक है। क्योंकि डीग की भरतपुर से दूरी केवल 38 किमी है, जिसे रखा गया है परंतु सांचौर से जालौर की दूरी 135 किमी और अनूपगढ़ से गंगानगर की दूरी 125 किमी होने के बावजूद उन जिलों को रद्द कर दिया गया। हमारी सरकार ने केवल जिलों की घोषणा ही नहीं की, बल्कि वहां कलेक्टर, एसपी समेत तमाम जिला स्तरीय अधिकारियों की नियुक्ति दी एवं हर जिले को संसाधनों के लिए बजट भी दिया। हम भाजपा सरकार द्वारा उठाए गए इस अदूरदर्शी एवं राजनीतिक प्रतिशोध के कारण लिए गए निर्णय की निंदा करते हैं।

डोटासरा ने बीजेपी सरकार पर लगाया जनता विरोधी निर्णय का आरोप
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर जनता विरोधी और अलोकतांत्रिक निर्णय लेने का गंभीर आरोप लगाया है। डोटासरा ने कहा कि हाल ही में सरकार द्वारा जिलों और संभागों को निरस्त करने का फैसला जनता की भावनाओं के खिलाफ है। उन्होंने कहा, कांग्रेस सरकार ने जनता की सुविधा के लिए नए जिले और संभाग बनाए थे। कमेटी की सिफारिशों और जनता की मांग को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया था। लेकिन भाजपा सरकार ने एक साल के भीतर बिना किसी व्यापक विचार-विमर्श के इन जिलों को समाप्त कर दिया। यह न केवल अलोकतांत्रिक है, बल्कि संविधान के खिलाफ भी है।

भाजपा सरकार पर तीखा हमला
डोटासरा ने आरोप लगाया कि यह निर्णय जल्दबाजी में और पर्ची के आधार पर लिया गया। उन्होंने कहा, मुख्यमंत्री भजनलाल ने डीग को अपना जिला बनाए रखा। लेकिन प्रेमचंद अपने क्षेत्र को बचाने में विफल रहे। सरकार ने एसपी, कलेक्टर और संभागीय आयुक्त की तैनाती के बाद भी जिलों को निरस्त कर दिया। यह जनविरोधी निर्णय है, जिसे जनता देख रही है।

कांग्रेस करेगी आंदोलन
डोटासरा ने घोषणा की कि एक जनवरी तक राजकीय शोक के चलते कांग्रेस शांत रहेगी। लेकिन इसके बाद भाजपा सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा, कांग्रेस सरकार आने पर ये जिले फिर से बहाल किए जाएंगे। भाजपा को समझना चाहिए कि इस तरह के निर्णयों से जनता का विश्वास खोया जा सकता है।

अगले चुनाव में कांग्रेस की वापसी का दावा
डोटासरा ने विश्वास जताया कि आगामी चुनाव में कांग्रेस की सरकार बनेगी और जनता के हित में लिए गए फैसले वापस लाए जाएंगे। उन्होंने भाजपा सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उनमें थोड़ी भी शर्म बची है, तो इस जनविरोधी निर्णय को वापस लें।

जनता की नाराजगी बढ़ी
डोटासरा ने कहा कि जनता इस निर्णय से बेहद नाराज है और भाजपा को आने वाले चुनाव में इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जिन जिलों को समाप्त किया गया है, वहां भाजपा को अपना उम्मीदवार खड़ा करने के लिए भी कठिनाई होगी।

निष्कर्ष
डोटासरा ने भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह निर्णय विवेकहीन और जनता के प्रति गैर-जिम्मेदाराना है। कांग्रेस इसका कड़ा विरोध करेगी और जनहित में इसे चुनौती देने के लिए आंदोलन करेगी।

जिलों को पुनर्स्थापित करने की मांग पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का तीखा हमला
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भारतीय जनता पार्टी सरकार के जिलों को खत्म करने के निर्णय पर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस द्वारा सत्ता में आने पर समाप्त किए गए जिलों को पुनः बनाया जाएगा। टीकाराम जूली ने भाजपा सरकार पर जनता के हकों का हनन करने और योजनाओं को ठप करने का आरोप लगाया।

जूली ने कहा, हमने जनता की सहूलियत के लिए जिले बनाए थे, जिससे त्वरित न्याय और सेवाएं उपलब्ध हो सकें। भाजपा सरकार ने इन जिलों को खत्म कर लोगों की जरूरतों की अनदेखी की है। हमने जिले बनाने का निर्णय किसान, मजदूर और आम जनता के हितों को ध्यान में रखकर लिया था। छोटे जिलों से लोगों को सहूलियत मिलती है और प्रशासनिक प्रक्रिया आसान होती है। भाजपा ने जनता को ठगने का काम किया है।


टीकाराम जूली ने आगामी विधानसभा सत्र में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की बात कही और सरकार के इस निर्णय को निरस्त करवाने के लिए आंदोलन करने का एलान किया। उन्होंने कहा, हम भाजपा को सड़क से लेकर संसद तक चैन से बैठने नहीं देंगे। यह सरकार जनता के अधिकारों का खून कर रही है। चिरंजीवी योजना, पेंशन योजना और अन्य कल्याणकारी योजनाओं को ठप करके जनता को धोखा दिया गया है।

जूली ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने जिलों के निर्माण का फैसला जिला कमेटी की सिफारिशों के आधार पर लिया था। इन जिलों का पूरा ढांचा तैयार किया जा रहा था और प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति भी की गई थी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि देश में छोटे राज्यों और जिलों का गठन आम जनता को न्याय और सुविधा देने के लिए किया गया है।

आंदोलन की तैयारी
नेता प्रतिपक्ष ने स्पष्ट किया कि अगर सरकार ने अपने निर्णय को वापस नहीं लिया, तो कांग्रेस सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेगी। उन्होंने कहा, हम भाजपा सरकार को मजबूर करेंगे कि जनता विरोधी इस आदेश को वापस ले। अगले महीने से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में इस मुद्दे पर कांग्रेस की ओर से जोरदार बहस की संभावना है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed