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टोंक थप्पड़कांड पर NCST की रिपोर्ट: SDM और पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल, 30 दिन में कार्रवाई की सिफारिश
Mon, 07 Apr 2025 06:31 PM IST
शबाहत हुसैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: शबाहत हुसैन
Updated Mon, 07 Apr 2025 06:31 PM IST
सार
Rajasthan: आयोग ने यह रिपोर्ट मुख्य सचिव सुधांशु पंत, DGP उत्कल रंजन साहू, और जनजाति क्षेत्र विकास विभाग के सचिव आशुतोष एटी पेडणेकर को भेजी है। रिपोर्ट में 30 दिनों के भीतर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है और सरकार से जवाब भी मांगा गया है।
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नरेश मीणा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
टोंक जिले के चर्चित थप्पड़कांड मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने राजस्थान सरकार को 2 अप्रैल (2025) को 23 पेज की रिपोर्ट सौंपी है। आयोग ने इस मामले में एरिया मजिस्ट्रेट अमित चौधरी, मालपुरा उपखंड अधिकारी (SDM) और पुलिस प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
क्या है मामला?
13 नवंबर 2024 को देवली-उनियारा उपचुनाव के दौरान वोटिंग के समय निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा ने एरिया मजिस्ट्रेट को थप्पड़ मार दिया था। मजिस्ट्रेट का आरोप था कि मीणा जबरन बूथ में घुसने की कोशिश कर रहा था, जिसे रोकने पर उसने हमला किया। पुलिस ने नरेश मीणा को हिरासत में लिया, लेकिन ग्रामीणों ने पुलिस से भिड़कर उसे छुड़ा लिया। घटना के बाद और अगले दिन पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़पें हुईं, जिनमें कई लोग घायल हुए।
आयोग की जांच और निष्कर्ष
NCST ने निरूपम चमका की अध्यक्षता में 6 सदस्यीय जांच कमेटी गठित की थी, जिसने तीन महीने में जांच पूरी की। रिपोर्ट में कहा गया है कि थप्पड़ मारना अनुचित था, लेकिन SDM पर जबरन वोटिंग कराने के आरोप भी लगे। इसके साथ ही पुलिस द्वारा बदले की भावना से कार्रवाई की गई, जिसमें ग्रामीणों से मारपीट, झूठे मुकदमे और अत्यधिक बल प्रयोग जैसे गंभीर आरोप हैं।
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पढ़ें: 'सिर झुकाकर, कान पकड़कर पहुंचा मंदिर...मांगी माफी; चोर ने चोरी की हुई बाइक दो दिन बाद लौटाई
सरकार को सिफारिश
आयोग ने यह रिपोर्ट मुख्य सचिव सुधांशु पंत, DGP उत्कल रंजन साहू, और जनजाति क्षेत्र विकास विभाग के सचिव आशुतोष एटी पेडणेकर को भेजी है। रिपोर्ट में 30 दिनों के भीतर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है और सरकार से जवाब भी मांगा गया है। डीजीपी यूआर साहू ने बताया कि रिपोर्ट मिली है और जो निर्देश दिए गए है कानून संवत कार्रवाई की जाएगी। जनजाति क्षेत्र विकास विभाग के सचिव आशुतोष एटी पेडणेकर ने कहा कि कल ही रिपोर्ट प्राप्त हुई है। रिपोर्ट में जो भी कहा गया है उसे पर कानूनी कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को भेजा जाएगा।
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क्या है मामला?
13 नवंबर 2024 को देवली-उनियारा उपचुनाव के दौरान वोटिंग के समय निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा ने एरिया मजिस्ट्रेट को थप्पड़ मार दिया था। मजिस्ट्रेट का आरोप था कि मीणा जबरन बूथ में घुसने की कोशिश कर रहा था, जिसे रोकने पर उसने हमला किया। पुलिस ने नरेश मीणा को हिरासत में लिया, लेकिन ग्रामीणों ने पुलिस से भिड़कर उसे छुड़ा लिया। घटना के बाद और अगले दिन पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़पें हुईं, जिनमें कई लोग घायल हुए।
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आयोग की जांच और निष्कर्ष
NCST ने निरूपम चमका की अध्यक्षता में 6 सदस्यीय जांच कमेटी गठित की थी, जिसने तीन महीने में जांच पूरी की। रिपोर्ट में कहा गया है कि थप्पड़ मारना अनुचित था, लेकिन SDM पर जबरन वोटिंग कराने के आरोप भी लगे। इसके साथ ही पुलिस द्वारा बदले की भावना से कार्रवाई की गई, जिसमें ग्रामीणों से मारपीट, झूठे मुकदमे और अत्यधिक बल प्रयोग जैसे गंभीर आरोप हैं।
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सरकार को सिफारिश
आयोग ने यह रिपोर्ट मुख्य सचिव सुधांशु पंत, DGP उत्कल रंजन साहू, और जनजाति क्षेत्र विकास विभाग के सचिव आशुतोष एटी पेडणेकर को भेजी है। रिपोर्ट में 30 दिनों के भीतर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है और सरकार से जवाब भी मांगा गया है। डीजीपी यूआर साहू ने बताया कि रिपोर्ट मिली है और जो निर्देश दिए गए है कानून संवत कार्रवाई की जाएगी। जनजाति क्षेत्र विकास विभाग के सचिव आशुतोष एटी पेडणेकर ने कहा कि कल ही रिपोर्ट प्राप्त हुई है। रिपोर्ट में जो भी कहा गया है उसे पर कानूनी कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को भेजा जाएगा।