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Rajasthan Politics: मानेसर कांड पर फिर गरमाई सियासत, गजेंद्र शेखावत का गहलोत पर हमला; पायलट को बताया ‘मोहरा’
Tue, 28 Apr 2026 05:09 PM IST
जयपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: जयपुर ब्यूरो
Updated Tue, 28 Apr 2026 05:09 PM IST
सार
Rajasthan Politics: राजस्थान में 2020 के चर्चित मानेसर प्रकरण को लेकर एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर तीखा हमला बोलते हुए पूरे घटनाक्रम का जिम्मेदार उन्हें ठहराया। वहीं उन्होंने सचिन पायलट को उस समय का “मोहरा” बताया, जिससे राजनीतिक माहौल फिर गरमा गया है। पढ़ें पूरी खबर
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राजस्थान में सियासी हलचल फिर से तेज हो गई है
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर वर्ष 2020 के चर्चित मानेसर प्रकरण को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय जल शक्ति तथा संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि मानेसर की पूरी घटना के सूत्रधार वही थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटनाक्रम की योजना बनाने से लेकर उसे समाप्त करने तक की भूमिका गहलोत ने ही निभाई।
सचिन पायलट थे मोहरा
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने यह भी कहा कि उस समय सचिन पायलट पूरे घटनाक्रम में केवल एक “मोहरा” थे, जिनका इस्तेमाल राजनीतिक समीकरण साधने के लिए किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गहलोत आज भी अपने राजनीतिक भविष्य को मजबूत करने के लिए इस मुद्दे को समय-समय पर उठाते रहते हैं और बयान देकर उसे चर्चा में बनाए रखते हैं।
एक टांग कांग्रेस में और दूसरी...
दरअसल, यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब भाजपा के प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल ने टोंक में एक बयान देते हुए पायलट पर कटाक्ष किया था। उन्होंने कहा था कि पायलट की 'एक टांग कांग्रेस में और दूसरी कहीं और रहती है।' इस टिप्पणी के बाद सियासी माहौल गर्मा गया और नेताओं के बीच बयानबाजी का दौर शुरू हो गया।
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ये भी पढ़ें- भाजपा प्रदेश प्रभारी के तंज पर गहलोत का पलटवार, बोले- पायलट की दोनों टांगें कांग्रेस में हैं
अशोक गहलोत ने कहा था- सचिन कांग्रेस के साथ
इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अशोक गहलोत ने कहा था कि सचिन पायलट पूरी तरह कांग्रेस के साथ हैं और भविष्य में भी पार्टी में ही बने रहेंगे। उन्होंने मानेसर प्रकरण का जिक्र करते हुए कहा कि जिन लोगों ने उस समय कांग्रेस विधायकों को भ्रमित कर मानेसर ले जाने की कोशिश की थी, उनकी योजना सफल नहीं हो पाई थी।
गहलोत के इस बयान के बाद गजेंद्र सिंह शेखावत ने एक बार फिर पलटवार करते हुए कहा कि उस समय भी उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों का खंडन किया था और आज भी वही स्थिति है।
गौरतलब है कि जुलाई 2020 में पायलट समर्थक विधायकों के हरियाणा के मानेसर में ठहरने से राज्य की राजनीति में बड़ा संकट खड़ा हो गया था। उस दौरान गहलोत खेमे ने सरकार गिराने की साजिश का आरोप लगाया था, जबकि शेखावत ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए फोन टैपिंग का मुद्दा उठाया था। यह मामला अब भी कानूनी प्रक्रिया में लंबित है।
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सचिन पायलट थे मोहरा
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने यह भी कहा कि उस समय सचिन पायलट पूरे घटनाक्रम में केवल एक “मोहरा” थे, जिनका इस्तेमाल राजनीतिक समीकरण साधने के लिए किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गहलोत आज भी अपने राजनीतिक भविष्य को मजबूत करने के लिए इस मुद्दे को समय-समय पर उठाते रहते हैं और बयान देकर उसे चर्चा में बनाए रखते हैं।
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एक टांग कांग्रेस में और दूसरी...
दरअसल, यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब भाजपा के प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल ने टोंक में एक बयान देते हुए पायलट पर कटाक्ष किया था। उन्होंने कहा था कि पायलट की 'एक टांग कांग्रेस में और दूसरी कहीं और रहती है।' इस टिप्पणी के बाद सियासी माहौल गर्मा गया और नेताओं के बीच बयानबाजी का दौर शुरू हो गया।
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अशोक गहलोत ने कहा था- सचिन कांग्रेस के साथ
इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अशोक गहलोत ने कहा था कि सचिन पायलट पूरी तरह कांग्रेस के साथ हैं और भविष्य में भी पार्टी में ही बने रहेंगे। उन्होंने मानेसर प्रकरण का जिक्र करते हुए कहा कि जिन लोगों ने उस समय कांग्रेस विधायकों को भ्रमित कर मानेसर ले जाने की कोशिश की थी, उनकी योजना सफल नहीं हो पाई थी।
गहलोत के इस बयान के बाद गजेंद्र सिंह शेखावत ने एक बार फिर पलटवार करते हुए कहा कि उस समय भी उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों का खंडन किया था और आज भी वही स्थिति है।
गौरतलब है कि जुलाई 2020 में पायलट समर्थक विधायकों के हरियाणा के मानेसर में ठहरने से राज्य की राजनीति में बड़ा संकट खड़ा हो गया था। उस दौरान गहलोत खेमे ने सरकार गिराने की साजिश का आरोप लगाया था, जबकि शेखावत ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए फोन टैपिंग का मुद्दा उठाया था। यह मामला अब भी कानूनी प्रक्रिया में लंबित है।