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Jaipur: ट्रांसफर बहाली की मांग लेकर BJP मुख्यालय पहुंचे लैब असिस्टेंट-लाइब्रेरियन, प्रदेशाध्यक्ष ने क्या कहा?
Tue, 14 Jul 2026 06:56 PM IST
जयपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: जयपुर ब्यूरो
Updated Tue, 14 Jul 2026 06:56 PM IST
सार
Rajasthan News: वर्ष 2026 की ट्रांसफर सूची निरस्त होने से नाराज लैब असिस्टेंट और लाइब्रेरियन ने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ से मुलाकात कर ट्रांसफर प्रक्रिया बहाल करने की मांग की। कर्मचारियों का कहना है कि वे शिक्षक नहीं हैं, इसलिए तृतीय श्रेणी शिक्षकों पर लागू तबादला प्रतिबंध उन पर लागू नहीं होना चाहिए।
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बीजेपी प्रदेश मुख्यालय के बाहर लैब असिस्टेंट और लाइब्रेरियन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
वर्ष 2026 की ट्रांसफर सूची निरस्त किए जाने से नाराज लैब असिस्टेंट और लाइब्रेरियन मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मुख्यालय पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने ट्रांसफर प्रक्रिया बहाल करने तथा रिक्त पदों पर समायोजन की मांग करते हुए अपनी समस्याओं से अवगत कराया।
85 कर्मचारियों की ट्रांसफर सूची रद्द होने पर जताई नाराजगी
लैब असिस्टेंट और लाइब्रेरियन प्रतिनिधियों ने बताया कि वर्ष 2021-22 में उनके तबादले हुए थे। इसके बाद वर्ष 2026 की ट्रांसफर प्रक्रिया के तहत करीब 85 कर्मचारियों की सूची जारी की गई, लेकिन बाद में इसे यह कहते हुए निरस्त कर दिया गया कि तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादलों पर प्रतिबंध लागू है।
'हम शिक्षक नहीं हैं, इसलिए रोक लागू नहीं होनी चाहिए'
प्रतिनिधियों का कहना था कि उन्हें तृतीय श्रेणी शिक्षक मानना तथ्यात्मक रूप से गलत है। उनका कहना है कि वे शिक्षक नहीं, बल्कि स्कूलों में कार्यरत लैब असिस्टेंट और लाइब्रेरियन हैं। इसलिए शिक्षकों के तबादलों से संबंधित प्रतिबंध उन पर लागू नहीं होना चाहिए। उन्होंने उनकी अलग सेवा श्रेणी को ध्यान में रखते हुए ट्रांसफर प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की मांग की।
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मदन राठौड़ ने शिक्षा मंत्री से बात करने का दिया भरोसा
अमर उजाला से बातचीत में प्रतिनिधियों ने बताया कि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने उनकी बात गंभीरता से सुनी और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर से इस विषय पर चर्चा कर समाधान निकालने का आश्वासन दिया है।
'500 किमी दूर नौकरी, रिक्त पदों पर किया जाए समायोजन'
कर्मचारियों ने कहा कि उनमें से कई पिछले कई वर्षों से अपने गृह जिलों से 500 किलोमीटर या उससे अधिक दूरी पर सेवाएं दे रहे हैं। पारिवारिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि वे किसी कर्मचारी को हटाकर उसकी जगह नहीं आना चाहते, बल्कि जहां रिक्त पद उपलब्ध हैं, वहां उनका समायोजन किया जाए।
यह भी पढ़ें: 19 प्रसूताओं की मौत पर स्वास्थ्य मंत्री के बयान से मचा बवाल! ऐसा क्या बोल गए गजेंद्र सिंह खींवसर
निर्णय पर टिकी कर्मचारियों की निगाहें
कर्मचारियों का कहना है कि यदि सरकार उनकी व्यावहारिक समस्याओं को समझते हुए सुविधाजनक स्थानों पर कार्य करने का अवसर देती है तो उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी और सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में मदद मिलेगी। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भाजपा प्रदेश संगठन की ओर से उठाए गए इस मुद्दे पर शिक्षा मंत्री स्तर पर क्या निर्णय लिया जाता है। कर्मचारियों का दावा है कि इससे पहले भी कई बार ऐसी मांग सरकार तक पहुंचाई गई, लेकिन उस पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो सकी।
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85 कर्मचारियों की ट्रांसफर सूची रद्द होने पर जताई नाराजगी
लैब असिस्टेंट और लाइब्रेरियन प्रतिनिधियों ने बताया कि वर्ष 2021-22 में उनके तबादले हुए थे। इसके बाद वर्ष 2026 की ट्रांसफर प्रक्रिया के तहत करीब 85 कर्मचारियों की सूची जारी की गई, लेकिन बाद में इसे यह कहते हुए निरस्त कर दिया गया कि तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादलों पर प्रतिबंध लागू है।
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'हम शिक्षक नहीं हैं, इसलिए रोक लागू नहीं होनी चाहिए'
प्रतिनिधियों का कहना था कि उन्हें तृतीय श्रेणी शिक्षक मानना तथ्यात्मक रूप से गलत है। उनका कहना है कि वे शिक्षक नहीं, बल्कि स्कूलों में कार्यरत लैब असिस्टेंट और लाइब्रेरियन हैं। इसलिए शिक्षकों के तबादलों से संबंधित प्रतिबंध उन पर लागू नहीं होना चाहिए। उन्होंने उनकी अलग सेवा श्रेणी को ध्यान में रखते हुए ट्रांसफर प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की मांग की।
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मदन राठौड़ ने शिक्षा मंत्री से बात करने का दिया भरोसा
अमर उजाला से बातचीत में प्रतिनिधियों ने बताया कि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने उनकी बात गंभीरता से सुनी और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर से इस विषय पर चर्चा कर समाधान निकालने का आश्वासन दिया है।
'500 किमी दूर नौकरी, रिक्त पदों पर किया जाए समायोजन'
कर्मचारियों ने कहा कि उनमें से कई पिछले कई वर्षों से अपने गृह जिलों से 500 किलोमीटर या उससे अधिक दूरी पर सेवाएं दे रहे हैं। पारिवारिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि वे किसी कर्मचारी को हटाकर उसकी जगह नहीं आना चाहते, बल्कि जहां रिक्त पद उपलब्ध हैं, वहां उनका समायोजन किया जाए।
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निर्णय पर टिकी कर्मचारियों की निगाहें
कर्मचारियों का कहना है कि यदि सरकार उनकी व्यावहारिक समस्याओं को समझते हुए सुविधाजनक स्थानों पर कार्य करने का अवसर देती है तो उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी और सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में मदद मिलेगी। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भाजपा प्रदेश संगठन की ओर से उठाए गए इस मुद्दे पर शिक्षा मंत्री स्तर पर क्या निर्णय लिया जाता है। कर्मचारियों का दावा है कि इससे पहले भी कई बार ऐसी मांग सरकार तक पहुंचाई गई, लेकिन उस पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो सकी।