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Kotputli Borewell Accident: DM की लेटलतीफी और ढीलेपन से चेतना की रेस्क्यू में देरी, राजेंद्र गुढ़ा भी नाराज
Mon, 30 Dec 2024 08:13 PM IST
शबाहत हुसैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर
Published by: शबाहत हुसैन
Updated Mon, 30 Dec 2024 08:13 PM IST
सार
Kotputli Borewell Accident: राजस्थान के कोटपूतली (अलवर) में बीते आठ दिन से एक बच्ची को बोरवेल से बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है। बच्ची किस हालत में है, इसकी जानकारी प्रशासन ने नहीं दी है, लेकिन शुरूआत में जिस तरह से रेस्क्यू शुरू किया गया, उसे लेकर स्थानीय लोगों में काफी नाराजगी दिखी।
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चेतना
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मासूम बच्ची चेतना को बोरवेल से बाहर निकालने के लिए सोमवार को घटना के आठवें दिन भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। बच्ची की मूवमेंट आखिरी बार मंगलवार को नजर आई थी। लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के बाद भी आठवें दिन प्रशासन के हाथ खाली हैं। ऐसे में परिजनों और ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
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कोटपूतली में बोरवेल में गिरी चेतना को बाहर निकालने में सबसे बड़ी दिक्कत जमीन के अंदर मौजूद पत्थर की परत रही। रेस्क्यू ऑपरेशन में लगे लोगों का कहना है कि जहां यह हादसा हुआ, वहां जमीन के अंदर पत्थर की परत है। बोरवेल के आसपास हो रही खुदाई बार-बार पत्थर की इन परतों से टकराकर ठप हो जा रही है। इसके लिए यहां रैट माइनर्स को बुलाया गया, जिन्होंने हाथों से 10 फीट की सुरंग खोदी।
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हादसे के तीन दिन बाद पहुंचीं कलेक्टर
इस हादसे में कलेक्टर का भी रवैया बड़ा ढीला रहा। हादसा सोमवार 23 दिसंबर को हुआ था। उस दिन जिला कलेक्टर कल्पना अग्रवाल छुट्टी पर थीं। तीन दिन बाद घटना स्थल पर पहुंचीं तो लोग भड़क उठे। लोगों ने कहा कि जिले की मुखिया अगर ऐसी घटनाओं के प्रति गंभीर नहीं हैं तो फिर अन्य अफसरों से क्या उम्मीद की जा सकती है। जिला कलेक्टर कल्पना अग्रवाल को ऐसा कौन सा काम था, जिसके चलते वे इस गंभीर हादसे को मॉनिटरिंग तक नहीं कर सकीं।
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सुबह तक नहीं हो पाई थी पाइप फ्रेमिंग
कई बार अलग-अलग वजह से रेस्क्यू आपरेशन को रोका गया। इससे काफी समय बर्बाद हुआ। शनिवार सुबह तक पाइप फ्रेमिंग नहीं हो पाई। रेस्क्यू टीम को जांच के बाद पता चला कि खोदे गए गड्ढे की केसिंग सही से नहीं हो पाई है। इसलिए शनिवार सुबह 6:30 बजे दोबारा से पाइलिंग मशीन लगाई गई है। पाइलिंग मशीने इतनी भारी थीं कि मौके पर लाने के लिए पहले सड़क तैयार करनी पड़ी। इसकी वजह से खुदाई में समय ज्यादा लगा।
रेस्क्यू ऑपरेशन में देरी से पूर्व मंत्री गुढ़ा भी नाराज
प्रशासन के बार-बार बदलते प्लान और अब बारिश ने रेस्क्यू को लंबा कर दिया है। पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने कहा कि बच्ची को बचाने में सभी लगे हुए हैं, लेकिन प्रशासन ने लेट कर दिया। अगर घटना के तुरंत बाद ही ऑपरेशन युद्ध स्तर पर शुरू हो जाता तो इसका रिजल्ट हम ज्यादा बढ़िया देखते। जो तैयारी पिछले तीन दिन में हुई है, वो छह दिन पहले होनी चाहिए थी। कलेक्टर को तीन दिन लग गए यहां पहुंचने में, ये शर्म की बात है।
चेतना के ताऊ ने लगाया आरोप
चेतना के ताऊ शुभराम ने कहा कि रेस्क्यू ऑपरेशन में कोई काम सही नहीं हुआ। कलेक्टर ने परिजनों से बात तक नहीं की। उनसे कोई पूछे परिवार पर क्या बीत रहा है।