Jaipur News: जयपुर में अब एक ही मेयर होगा, नगर निगम के सीमा विस्तार में 78 गांव शामिल, 150 वार्ड गठित होंगे
राज्य सरकार ने जयपुर नगर निगम ग्रेटर और हैरिटेज के सीमा विस्तार प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए इसमें तीन उपखंडों के 78 गांवों को जोड़ने का फैसला किया है। इसी के साथ अब जयपुर ग्रेटर और हैरिटेज के लिए एक ही मेयर चुने जाने का फैसला भी किया गया है।
विस्तार
राजधानी के शहरी विकास को लेकर अब एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। राज्य सरकार ने जयपुर नगर निगम ग्रेटर और हैरिटेज की सीमा विस्तार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी के बाद अब जयपुर नगर निगम क्षेत्र में तीन उपखंडों के 78 नए गांव जोड़े गए हैं। इसके साथ ही करीब 30 साल बाद पहली बार नगर निगम की सीमा का विस्तार हुआ है, जो जयपुर के विकास में नया अध्याय जोड़ेगा।
पिछले दिनों जयपुर जिला निर्वाचन शाखा ने 80 गांवों को नगर निगम क्षेत्र में शामिल करने का प्रस्ताव तैयार कर स्वायत्त शासन विभाग के माध्यम से राज्य सरकार को भेजा था। इस पर यूडीएच मंत्री के साथ विचार-विमर्श के बाद 78 गांवों को ही शामिल करने का निर्णय लिया गया।
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नगर निगम सीमा विस्तार के साथ ही जयपुर नगर निगम ग्रेटर और हैरिटेज के 250 वार्डों का पुनर्गठन कर अब नए 150 वार्ड बनाए गए हैं। खास बात यह है कि इस बार दोनों निगमों में अलग-अलग मेयर नहीं होंगे, बल्कि दोनों के लिए एक ही मेयर चुना जाएगा। साथ ही सभी वार्डों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण किया गया है और इस पर आमजन से 17 अप्रैल तक सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं।
बता दें कि जयपुर नगर निगम का गठन वर्ष 1994 में हुआ था, जब इसे जयपुर नगर परिषद से अपग्रेड किया गया था। उस समय 70 वार्ड बनाए गए थे। पहली बार 2004 में पुनर्गठन कर वार्डों की संख्या 70 से बढ़ाकर 77 कर दी गई थी। इसके बाद 2014 में एक बार फिर पुनर्गठन कर 91 वार्ड कर दिए गए, लेकिन निगम की सीमा में कोई विस्तार नहीं किया गया था।
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साल 2019 में तत्कालीन गहलोत सरकार ने जयपुर नगर निगम को दो हिस्सों में बांटते हुए नगर निगम ग्रेटर और नगर निगम हैरिटेज बना दिए थे। तब ग्रेटर में 150 और हैरिटेज में 100 वार्ड बनाए गए थे मगर उस समय भी सीमा विस्तार नहीं किया गया था। अब यह विस्तार लागू होने से शहरी क्षेत्र में विकास की संभावनाएं और अधिक बढ़ जाएंगी।
पुनर्गठन में सबसे ज्यादा वार्ड विद्याधर नगर विधानसभा क्षेत्र में प्रस्तावित किए गए हैं, जबकि सबसे कम वार्ड आमेर विधानसभा क्षेत्र में बने हैं। निगम की नई सीमाओं और वार्डों के गठन से जयपुर में नगर निकाय व्यवस्था और मजबूत होगी।
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