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बीजेपी के बाद कांग्रेस क्यों कर रही बाड़ाबंदी? मेयर चुनाव से पहले हॉर्स ट्रेडिंग का डर

Sat, 12 Sep 2026 04:49 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Sat, 12 Sep 2026 04:49 PM IST
सार

जयपुर नगर निगम चुनाव की मतगणना से पहले कांग्रेस ने 150 प्रत्याशियों को एकजुट रखने की तैयारी शुरू की है। पार्टी को नतीजों के बाद हॉर्स ट्रेडिंग का डर है।

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Congress Begins Jaipur Camp Ahead of Counting, Fears Horse-Trading in Mayor Poll
कांग्रेस ने शुरू की बाड़ाबंदी की तैयारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जयपुर नगर निगम पर कब्जे की लड़ाई अब मतदान से आगे बढ़कर पार्षदों को अपने पाले में रखने की रणनीति तक पहुंच गई है। 14 सितंबर को मतगणना से पहले कांग्रेस ने अपने 150 पार्षद प्रत्याशियों को एकजुट रखने के लिए बाड़ाबंदी की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी को आशंका है कि नतीजों के बाद बहुमत का आंकड़ा स्पष्ट नहीं होने की स्थिति में हॉर्स ट्रेडिंग के जरिए बोर्ड गठन का गणित बदला जा सकता है।

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इसी रणनीति को लेकर शनिवार को जयपुर शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुनील शर्मा के आवास पर वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई। बैठक में पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, विधानसभा में विपक्ष के सचेतक रफीक खान, विधायक अमीन कागजी, विधायक अर्चना शर्मा समेत कई नेता मौजूद रहे। कांग्रेस कैंप को लेकर अंतिम फैसला शनिवार रात या रविवार सुबह होने की संभावना है।

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हर इलाके के प्रत्याशी पर नजर, विधायकों को जिम्मेदारी

कांग्रेस ने अपने विधायकों और विधानसभा चुनाव लड़ चुके नेताओं को उनके-अपने इलाकों के पार्षद प्रत्याशियों के संपर्क में रहने के निर्देश दिए हैं। पार्टी की कोशिश है कि चुनाव जीतने वाले प्रत्याशियों को नतीजों के बाद किसी तरह के राजनीतिक दबाव या संपर्क से दूर रखा जाए।

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जरूरत पड़ने पर कांग्रेस अपने प्रत्याशियों को जयपुर से बाहर भी ले जा सकती है। पार्टी स्तर पर संभावित ठिकानों और व्यवस्था को लेकर मंथन चल रहा है।

यह भी पढें- जोधपुर: पांच लाख से अधिक मतदाताओं ने डाला वोट, 100 वार्डों का फैसला ईवीएम में कैद; 14 सितंबर को आएंगे नतीजे

रफीक खान बोले- सरकार, पुलिस और पैसे का इस्तेमाल हो सकता है

विपक्ष के सचेतक रफीक खान ने आरोप लगाया कि नतीजों के बाद बीजेपी बोर्ड बनाने के लिए सरकारी मशीनरी, पुलिस और पैसे का इस्तेमाल कर सकती है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस जयपुर नगर निगम में पूर्ण बहुमत के साथ बोर्ड बनाएगी। खान ने यह भी दावा किया कि मुकाबले में कांग्रेस और निर्दलीयों के बाद बीजेपी तीसरे स्थान पर रहेगी। हालांकि वास्तविक तस्वीर 14 सितंबर को मतगणना के बाद ही साफ होगी। उन्होंने कहा कि पार्टी किसी जल्दबाजी में फैसला नहीं लेगी। पहले प्रत्याशियों से बातचीत की जाएगी और इसके बाद आगे की रणनीति तय होगी।

21 सितंबर का मेयर चुनाव सबसे बड़ी वजह

कांग्रेस की बाड़ाबंदी की रणनीति में सबसे अहम तारीख 21 सितंबर है। 14 सितंबर को पार्षद चुनाव के नतीजे आने के ठीक एक सप्ताह बाद मेयर का चुनाव होना है। इसके अगले दिन 22 सितंबर को डिप्टी मेयर का चुनाव प्रस्तावित है। ऐसे में कांग्रेस की चिंता सिर्फ चुनाव जीतने तक सीमित नहीं है। पार्टी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि जो प्रत्याशी जीतकर आएं, वे मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव तक पार्टी के साथ बने रहें।

निर्दलीयों पर भी रहेगी नजर

जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में कई सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय और बहुकोणीय रहा है। ऐसे में यदि किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो निर्दलीय पार्षद बोर्ड गठन में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। कांग्रेस इसी संभावना को देखते हुए अपने संभावित विजेता प्रत्याशियों को एकजुट रखने की तैयारी कर रही है। पार्टी की नजर उन निर्दलीयों पर भी रहेगी, जो नतीजों के बाद कांग्रेस के साथ आ सकते हैं।

सुनील शर्मा ने दावा किया कि कांग्रेस के सभी 150 प्रत्याशी पार्टी के साथ मजबूती से खड़े हैं और पार्टी को बहुमत से बोर्ड बनाने का भरोसा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पार्टी छोड़कर चुनाव लड़ने वाले कुछ बागियों के वापस आने की स्थिति में उनके साथ भी बातचीत की जा सकती है।

 

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