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Jaipur News: हेड कॉन्स्टेबल आत्महत्या मामला, पांच दिन से धरना दे रही पत्नी मीना देवी ने दी आत्मदाह की चेतावनी
Mon, 26 Aug 2024 08:50 PM IST
अर्पित याज्ञनिक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: अर्पित याज्ञनिक
Updated Mon, 26 Aug 2024 08:50 PM IST
सार
राजस्थान की राजधानी जयपुर में कॉन्स्टेबल बाबूलाल बैरवा की आत्महत्या का प्रकरण तूल पकड़ता जा रहा है। उनकी पत्नी मीना देवी पिछले 5 दिनों से एसएमएस अस्पताल की मोर्चरी के बाहर धरना दे रही हैं। सोमवार को मीना देवी ने न्याय नहीं मिलने पर आत्मदाह की चेतावनी दे दी। वहीं नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल भी धरना स्थल पर पहुंच गए।
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हेड कॉन्स्टेबल आत्महत्या के बाद पत्नी का धरना।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी जयपुर के भांकरोटा थाने में तैनात हेड कॉन्स्टेबल बाबूलाल बैरवा के आत्महत्या प्रकरण में अब उनकी पत्नी मीना देवी ने आत्मदाह करने की चेतावनी दी है। मीना देवी अन्य परिजनों के साथ पिछले 5 दिन से एसएमएस अस्पताल की मॉर्च्युरी के बाहर धरने पर बैठी है। सोमवार उन्होंने धरना स्थल पर एलान किया कि अगर आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती है तो वह धरना स्थल पर ही आत्मदाह करेगी।
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इधर, मीना देवी के समर्थन में विपक्ष भी एकजुट होता नजर आ रहा है। कांग्रेस नेताओं के बाद सोमवार को धरना स्थल पर सांसद व आरएलपी के संयोजक हनुमान बेनीवाल भी पहुंच गए। बेनीवाल ने कहा कि मृतक बाबूलाल बैरवा ने अपने सुसाइड नोट में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए लिखा था कि मुझे और मेरे परिवार को आप न्याय दिलाना। इतनी स्पष्ट बात लिखने के बाद भी बैरवा समाज से आने वाले उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा यहां नहीं आए।
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बेनीवाल ने कहा कि प्रेमचंद बैरवा, बैरवा समाज और किसानों के वोटों से चुनाव जीते हैं। उनकी नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वे धरना स्थल आते और कहते कि यह बाबूलाल बैरवा के परिजनों की नहीं, मेरे परिवार की लड़ाई है। पिछले 5 दिनों से एक हेड कॉन्स्टेबल का शव यहां रखा हुआ है, लेकिन इनकी कोई सुनने वाला नहीं है।
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सरकार संवेदनहीन है। सरकार इस वर्ग का शोषण करना चाहती है। बीजेपी की राजस्थान और दिल्ली की सरकार एससी-एसटी वर्ग को दूसरे नजरिए से देखती है।
बेनीवाल ने कहा कि यह राजस्थान सरकार और जयपुर कमिश्नरेट की असफलता है कि पुलिस का पुलिस पर से भरोसा उठ जाए। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को तुरंत इस मामले में संज्ञान लेकर परिजनों की मांगों को मनाना चाहिए।