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Jaipur: 'पीतल की लौंग पाकर अपने को सर्राफ समझे हैं लोग', ओम माथुर के अभिनंदन में राजे ने किसके लिए कही ये बात

Tue, 03 Sep 2024 09:44 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Tue, 03 Sep 2024 09:44 PM IST
सार

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बिड़ला सभागार में सिक्किम के राज्यपाल ओम माथुर के नागरिक अभिनंदन समारोह में उनसे जुड़े कई दिलचस्प किस्से सुनाए और सियासत के बारे में महत्वपूर्ण संदेश दिए। राजे ने माथुर की विनम्रता और राजनीतिक कुशलता की सराहना करते हुए कहा कि ऊंचाइयों पर पहुंचकर भी उनके पैर हमेशा जमीन पर रहे हैं। 

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Jaipur: Former CM Vasundhara Raje's political message in felicitating Om Mathur
सिक्किम के राज्यपाल ओम माथुर के अभिनंदन समारोह। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने मंगलवार को बिड़ला सभागार में सिक्किम के राज्यपाल ओम माथुर के नागरिक अभिनंदन समारोह में उनसे जुड़े कई दिलचस्प किसे कहे। सबसे ज्यादा चर्चा सियासत को लेकर उनके मशवरे को लेकर हो रही है। राजे ने कहा है कि ओम माथुर चाहे कितनी ही बुलंदियों पर पहुंचें, इनके पैर सदा ज़मीन पर रहे हैं। इसीलिए इनके चाहने वाले भी असंख्य हैं। वरना कई लोगों को पीतल की लौंग क्या मिल जाती है, वो अपने आप को सर्राफ समझ बैठते हैं। उन्होंने कहा माथुर से ऐसे लोगों को सीख लेना चाहिए कि ‘चाहत बेशक आसमां छूने की रखो, पर पांव हमेशा ज़मीं पर रखो।’ राजे ने उन्हें सिक्किम का गवर्नर बनाने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया।

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राजे ने कहा कि पीएम के करीबी माथुर ऊपर से गरम, भीतर से नरम हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ में कमल खिलाकर असंभव को संभव किया। विपक्षी कुछ भी कहें गवर्नर रबर स्टॉम्प नहीं बल्कि आईरन फिस्ट इन वेलवेट ग्लोव होता है। फिर जैसा घुड़सवार होगा घोड़ा वैसे ही दौड़ेगा। माथुर कुशल घुड़सवार हैं, जिन्हें लगाम खींचना और चाबुक चलाना अच्छे से आता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि राज्यपाल किसी भी विधेयक को रोक सकता है। वह मंत्री परिषद की सलाह से काम तो करता हैं,लेकिन अनुच्छेद 166(2) के अनुसार उसका निर्णय ही अंतिम है। 
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अनुच्छेद 356 में राज्यपाल की सिफ़ारिश पर किसी भी बहुमत की सरकार को हटा कर उस प्रदेश में सरकार के सारे अधिकार राज्यपाल को मिल जाते हैं। इसलिए राज्यपाल शक्ति रहित नहीं,शक्ति सहित होता है। संविधान बनाते वक्त यह तय हुआ कि देश में जैसे राष्ट्रपति हैं, वैसे ही राज्य को गवर्न करने के लिए गवर्नर होंगे। इसलिए राज्य में गवर्नर ही सबसे शक्तिशाली होता है।

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