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Rajasthan: सियासी जमातों में शुमार कांग्रेस-बीजेपी का खेल बिगाड़ सकते हैं हनुमान बेनीवाल, इतनी सीटों पर दबदबा

Tue, 01 Aug 2023 11:24 AM IST
Ashish Kulshrestha आशीष कुलश्रेष्ठ
Updated Tue, 01 Aug 2023 11:24 AM IST
सार

राजस्थान में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी यानी आरएलपी का सदस्यता अभियान एक करोड़ से ज्यादा जाट आबादी पर कितना प्रभाव डाल पाएगा, ये देखने वाली बात होगी। चुनाव में 80 सीटों पर प्रभाव और 35 सीटों पर हार जीत के लिए सीधे जाट समुदाय प्रभावी है। ऐसे में अब आरएलपी संयोजक हनुमान बेनीवाल जाति को साधने में लगे हुए हैं।

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Hanuman Beniwal can spoil game of Congress-BJP in Rajasthan assembly elections dominance many seats
आरएलपी संयोजक हनुमान बेनीवाल - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

राजस्थान विधानसभा चुनाव की बस तारीख का एलान होना बाकी है। राजनीतिक दल चुनावी दंगल में उतर चुके हैं। कांग्रेस दो महीने पहले उम्मीदवार की घोषणा करने की बात कर सनसनी मचा चुकी है। बीजेपी के भी केंद्रीय नेतृत्व ने भी चुनावी कमान अपने हाथों में ले ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा निरंतर राजस्थान के दौरे कर रहे हैं और सभाएं हो रही हैं।

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29 अक्टूबर 2018 को स्थापित हुई राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी भी पिछले चार साल से निरंतर अपने काम में लगी हुई है। हनुमान बेनीवाल के नेतृत्व में पार्टी के एक सांसद और तीन विधायक हैं। सबसे बड़ी बात यह भी है कि न तो पॉलिटिकल क्राइसिस में यह विधायक टूटे और न ही कमजोर हुए। बेनीवाल ने जिस प्रकार से किरोड़ीलाल मीणा, घनश्याम तिवारी के साथ गठबंधन किया था और तीनों नेता साल 2018 के विधानसभा चुनाव में एक साथ मंच साझा करते देखे जाते थे। लगता था कि हनुमान बेनीवाल भी पार्टी की जिद छोड़कर बीजेपी का हाथ थाम लेंगे। परंतु हनुमान बेनीवाल ने अपनी पार्टी को मरने नहीं दिया।
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राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और सभी राजनीतिक दल तैयारी में जुटे हैं। वहीं, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी भी सदस्यता अभियान शुरू करने जा रही है। अनौपचारिक बातचीत में हनुमान बेनीवाल ने बताया कि उनका पूरा फोकस राजस्थान में 100 सीटों पर रहेगा और 50 लाख वोट उनको मिले इसकी तैयारी कर रहे हैं। राजस्थान में 80 सीट पर जाटों का प्रभाव है और 35 सीट पर सीधे रूप से जाटों के वोट के आधार पर हार और जीत के फैसले आते हैं। राजस्थान विधानसभा में आज भी 35 विधायक जाट समुदाय से आते हैं, लोकसभा में भी आठ सांसद जाट हैं।
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हनुमान बेनीवाल और जाट समुदाय एक साथ हो जाते हैं तो राजस्थान की राजनीति में बड़ा उलटफेर हो सकता है। परंतु हर समाज की तरह इस समाज में भी गुटबाजी के चलते इसकी संभावना कम हो जाती है। चूकि बड़े नेता हनुमान बेनीवाल को जाटों का नेता नहीं मानते और न ही हनुमान को बनने देना चाहते हैं। इसलिए जाट वोट को काटने के लिए या तो बाकी जातियां एकजुट होती हैं और जहां जाट बाहुल्य है, वहां जाट उम्मीदवारों से ही वोट कटवाने का काम होता है। विकल्प के रूप में हनुमान बेनीवाल और बीजेपी का एक बार फिर से विधानसभा चुनाव में भी गठबंधन होता है तो बीजेपी को 150 का आकड़ा पार करना कोई बहुत बड़ी बात नहीं होगी। जाट जो कांग्रेस को वोट देते हैं वो बीजेपी की तरफ शिफ्ट हो सकते हैं।

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