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Big Breaking: अकाउंट्स अफसरों की योग्यता पर उठे सवाल, डिस्कॉम के एओ को सौंपा सब्सिडी बांटने का काम
Tue, 19 Dec 2023 08:28 AM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Tue, 19 Dec 2023 08:28 AM IST
सार
Breaking News: राजस्थान की प्रीमियर सर्विस माने जाने वाले अकाउंट्स ऑफिसर्स की योग्यता पर सरकार ने प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। शायद इसलिए ही सरकार ने बिजली कंपनियों को सब्सिडी का पैसा बांटने का काम इन्हें छोड़ बिजली कंपनियों के सीनियर एओ को थमा दिया है।
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राजस्थान
- फोटो : साेशल मीडिया
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विस्तार
राज्य सरकार ने अपने 1300 अकाउंट्स अफसरों की काबिलियत को शक के दायरे में ला दिया है। राजस्थान के बजट से लेकर विभागों के सारे वित्तीय लेन-देन संभालने वाली इस लेखा सेवा में से सरकार को एक भी ऐसा काबिल अफसर नहीं मिला जो बिजली कंपनियों को सब्सिडी बांटने का काम कर सके। क्योंकि इन्हीं के कैडर कंट्रोलिंग महकमे वित्त विभाग ने बिजली कंपनियों की सब्सिडी का पैसा बांटने काम बिजली कंपनी के ही एक सीनियर एओ के हवाले कर दिया।
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इसके लिए वित्त मार्गोपाय विभाग ने अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के सीनियर एओ आशीष शर्मा को रिवर्स डेप्यूटेशन पर विभाग में तैनाती दी है। वैसे तो सरकारी महकमों में रिवर्स डेप्यूटेशन रेयर होता है। लेकिन जिस पेरेंट बॉडी से कर्मचारी का रिवर्स डेप्यूटेशन हो रहा है सरकार में उसे उसी की जिम्मेदारी दे दी जाए ऐसा शायद पहली बार ही देखने को मिला है।
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जानिए इसके पीछे का असली खेल
राज्य सरकार बिजली कंपनियों को टैरिफ सब्सिडी के तौर पर सालाना 26 हजार करोड़ रुपए का भुगतान करती है। पहले राज्य सरकार के जो अफसर इस सीट पर काम कर रहे थे उन्होंने बिजली कंपनियों की सब्सिडी पर आपत्ति जातते हुए पांच सालों में करीब 12 हजार करोड़ रुपए की कटौती कर दी थी। इस बात को लेकर बड़े अफसर नाराज थे। सरकार की तरफ से जो अफसर सीट पर काम कर रहे थे वह सेवानिवृत्ति के बाद बतौर सलाहकार तैनात थे। उन्हें हटाकर वित्त विभाग ने सरकार के किसी अकाउंट्स ऑफिसर को यहां नहीं लगाया बल्कि उन्हीं बिजली कंपनियों के सीनियर एओ को रिवर्स डेप्यूटेशन पर 5 साल के लिए तैनात कर दिया।
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राजस्थान अकाउंट्स ऑफिसर एसो ने जताया विरोध
अमर उजाला ने जब इस प्रकरण को लेकर राजस्थान अकाउंट्स एसोसिएशन के अधिकारियों से बात कि तो उन्होंने कहा कि इस बात की उन्हें कोई जानकारी ही नहीं। इसके बाद जब उन्हें इस अफसर की तैनाती के आदेश दिखाए गए तो वे हैरान रह गए। एसोसिएशन के अध्यक्ष होशियार सिंह पूनिया ने कहा कि प्रतिनियुक्ति का यह आदेश सरासर गलत है।
सरकारी अफसरों की रिपोर्टिंग भी इसी के जिम्मे
यही नहीं विभाग में सबऑर्डिनेट के तौर पर काम कर रहे अन्य अफसरों की रिपोर्टिंग भी रिवर्स डेप्यूटेशन पर आए इस अफसर के जिम्मे कर दी गई है। बड़ा सवाल यह है कि जिस अफसर की ट्रांसफर-प्रमोशन सब कुछ बिजली कंपनी से होने हैं वह सरकार का हित पहले देखेगा या बिजली कंपनी का?