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नाबालिगों को न्याय मिलने में अड़चन

Wed, 02 Jan 2013 11:59 AM IST
जयपुर/इंटरनेट डेस्क
जयपुर/इंटरनेट डेस्क Updated Wed, 02 Jan 2013 11:59 AM IST
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hindrance in justice to minors

राज्य में नाबालिगों को न्याय मिलने में अड़चन आने की संभावना है। यहां नाबालिगों से दुष्कर्म जैसी घटनाओं के दाषियों को सजा देने के लिए विशेष कानून तो लागू हो गया है, लेकिन इसके लिए अभी विशेष कोर्ट नहीं बने हैं।

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यौन अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के तहत नाबालिग से दुष्कर्म सहित यौन उत्पीड़न के मामलों की सुनवाई जिला स्तर पर बने विशेष सत्र न्यायालय में होनी है। यह कानून 14 नंवबर को लागू हुआ था। लेकिन अभी विशेष न्यायालय नहीं बने पाये हैं।
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महिला एवं बाल विकास विभाग ने करीब चार महीने पहले विशेष सत्र न्यायालय खोलने का प्रस्ताव विधि विभाग को भेज दिया था। विधि विभाग से यह प्रस्ताव हाईकोर्ट भी जा चुका है। होईकोर्ट से इस बारे में सरकार को अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। इसके अलावा विशेष न्यायालय न होने से पुलिस को भी रिपोर्ट दर्ज करने के संबंध में गाइडलाइन जारी करने में भी समस्या आ रही है।
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इस स्थिति के कारण पुलिस को पता ही नहीं कि चालान किस कोर्ट में पेश किया जाए। इस संबंध में राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष का कहना है कि पुलिस यौन अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के तहत मामले दर्ज करने के लिए गाइडलाइन जारी करने को तैयार है। विशेष कोर्ट न होने से पुलिस को समस्या आ रही है।

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