Dowry Case in Jodhpur: तीन बेटियां होने से नाराज पति ने शादी के 12 साल बाद पत्नी को घर से निकाला
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर एक बहू अपने हक के लिए महिला थाने पहुंच गई। पीड़िता का कहना है कि नए जीवन के लिए उसके आंखों में कई सपने थे लेकिन बेटियों के जन्म के बाद पति और ससुराल वाले उसे मारने-पीटने लगे।
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आज हम अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मना रहे हैं। महिला दिवस पर महिलाओं के सम्मान और उनको हक देने की पुरजोर मांग की जाती है। महिलाओं और पुरुषों को बराबर कहा जाता है कि लेकिन समाज में आज भी महिलाओं को अपने हक और समानता के लिए लड़ना पड़ रहा है। ऐसा ही एक मामला जोधपुर में सामने आया है, जिसमें एक महिला शादी के 12 साल तक दहेज प्रताड़ना की आग में झुलसती रही। तंग आकर पीड़िता महिला दिवस पर थाने में पहुंच गई।
ससुराल वालों और पति से तंग आकर महिला रिंकू नागर चौपासनी हाउसिंग बोर्ड पहुंची। पीड़िता का कहना है कि 12 साल पहले उसकी शादी जोधपुर के चौपासनी हाउसिंग बोर्ड में रहने वाले मुकेश नागर से हुई थी। शादी के बाद से ही पति ने दहेज के लिए परेशान करना शुरू कर दिया। वहीं शादी के बाद उसकी तीन बेटियां हो गई। जिसके बाद ससुराल वालों ने उसे और परेशान करना शुरू कर दिया है।
महिला का आरोप है कि जुड़वा बेटियां होने के बाद पति और ससुराल वाले उससे दहेज की मांग करने लगे हैं। आए दिन वो उसके साथ मारपीट करते हैं। महिला दिवस पर महिलाओं के लिए बस में यात्रा फ्री और उन्हें मान-सम्मान दिया जा रहा है लेकिन एक बहू अपनी 3 बेटियों के साथ हक की लड़ाई लड़ रही है।
बेटियों के जन्म के बाद बदला सबका रवैया
अमर उजाला से खास बातचीत में रिंकू ने अपना दुख बयां किया। रिंकू ने कहा कि12 साल पहले बड़े धूमधाम से वो बहू बनकर जोधपुर आई थी। मैंने कई सपनों के साथ गृहस्थ जीवन शुरू किया था पर बेटी को जन्म देते ही पति और ससुराल वालों को रवैया बदल गया। मेरे साथ प्रताड़ना का सिलसिला शुरू हो गया।
घर से बेटियों के साथ निकाला
रिंकू आगे कहती हैं कि मैं पिता पर बोझ ना बन जाऊं इसलिए चुपचाप सबकुछ सहती चली गई। वहीं मेरी मुश्किलें और बढ़ गई जब जुड़वा बेटियों को जन्म हुआ। रिंकू ने बताया कि उसने तलाक देने से मना कर दिया था। पति ने ज्यादती की सारे हदें पार कर दी और मुझे मेरी तीन मासूम बेटियों के साथ घर से निकाल दिया। अब वो कहां जाए उसे समझ नहीं आ रहा है।
हमें भी इंसान समझो
रिंकू समाज से पूछ रही है कि क्या कोई शादी करके बच्चा होने के बाद आसानी से किसी को छोड़ सकता है? 12 साल पति के घर झाड़ू, पोछा, बर्तन घर के सारे काम किए। मुझसे तो अच्छी काम वाली बाई है, जो घर का काम खत्म कर समय पर घर चली जाती हैं। रिंकू ने कहा कि मैं महिला दिवस पर बस इतना कहना चाहूंगी कि हमें भी इंसान समझो।
महिला दिवस पर युवतियों ने की मांग
जयपुर की अंशुविजयवर्गीय का मानना है कि महिला के लिए दिवस क्यों पूरा समय ही महिलाओं का हैl आज महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही है। समाज में पुरषों की सोच बदली है पर अभी भी पुरानी पीढी आज भी महिलाओं को घर में ही रखना चाहती है। अंशु का मानना है कि बेहतर समाज महिलाओं और पुरुष के सामंजस्य से बन सकता है। सिक्किम की रहने वाली रेबीका जयपुर के एक कंपनी में मैनेजर के रूप में काम करती हैं। रेबीका का कहना है कि एक दिन तो हमें महिला को पूजते हैं पर हमें भी इंसान समझो।