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यूक्रेन संकट: राजस्थान के छात्र बोले- हमें रूस होकर भारत लाया जाए, वहां के सैनिक हमारे साथ नरमी बरत रहे

Sun, 27 Feb 2022 01:52 PM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर/जयपुर/श्रीगंगानगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर/जयपुर/श्रीगंगानगर Published by: संजीव कुमार झा Updated Sun, 27 Feb 2022 01:52 PM IST
सार

रूस-यूक्रेन बीच छिड़ी जंग के चलते यूक्रेन में राजस्थान के कई छात्र फंस गए हैं। सभी छात्रों ने भारत सरकार से सुरक्षित एयरलिफ्ट करने की गुहार लगाई है।

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Effect of Russia Ukraine War: Russian artists living in Rajasthan returned to their country, many students of Sriganganagar and Ajmer stranded
यूक्रेन में फंसे छात्र - फोटो : Amar ujala

विस्तार

युद्धग्रस्त यूक्रेन में चिकित्सा विज्ञान की पढ़ाई करने गए देश के सैकड़ों छात्रों के सामने अपनी जान बचाने के लाले पड़ गए हैं ,हालांकि भारत सरकार तमाम तरह के प्रयास उन भारतीय एमबीबीएस के छात्रों को वापस भारत लाने के कर रही है, मगर इसकी धीमी गति को लेकर वहां के भारतीय छात्र काफी चिंतित हैं। श्रीगंगानगर जिले से भी दर्जनों की तादाद में छात्र एमबीबीएस करने यूक्रेन के अलग-अलग विश्वविद्यालयों में गए हुए हैं। श्रीगंगानगर के दुष्यंत सिराव और हनुमानगढ़ के ललित कुमार भी यूक्रेन के सुमी मेडिकल कॉलेज के छात्र हैं। इन्होंने फोन कर संवाददाता को बताया कि स्थानीय प्रशासन भारतीय छात्रों को पोलैंड के जरिए वापस देश भेजना चाहती है जबकि सुमि शहर से पोलैंड की दूरी करीब 1500 किलोमीटर है जबकि रूस की दूरी वहां से महज 30 किलोमीटर के करीब है। ऐसे में यह छात्र चाहते हैं कि पोलैंड की बजाय उन्हें रूस जाने की इजाजत दी जाए ताकि वहां से मास्को होते हुए भारत आ सके। उन्होंने कहा कि वे बिना किसी वाहन के खुद ही रसिया तक जा सकते हैं क्योंकि वहां सैन्य गतिविधियां थोड़ी कम है और भारतीय छात्रों को वहां नरमी से पेश आया जा रहा है। छात्र दुष्यंत सिराव ने बताया कि पिछले काफी समय से लगातार सरकार द्वारा उन्हें निकालने के लिए आश्वासन दिए जा रहे हैं मगर अभी तक कोई कारगर उपाय नहीं हुआ और न ही वे यहां से भारत वापस जा पाए और इसी बीच यहां युद्ध की स्थितियां काफी तेज हो चुकी है, ऐसे में उनकी जान संकट में है। भारत को चाहिए कि उनके अपने देश के नागरिकों को अतिशीघ्र यहां से सुरक्षित निकाला जाए।

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रूस-यूक्रेन के बीच छिड़ी जंग का असर अब भारत आए रूसी कलाकारों पर भी

रूस-यूक्रेन के बीच छिड़ी जंग का असर अब भारत आए रूसी कलाकारों पर देखने को मिल रहा है। उन्हें अपना काम अधूरा छोड़कर ही वापस लौटना पड़ा है। दरअसल, शहर के विभिन्न स्थानों पर घूमकर वहां की संस्कृति को अपनी कला के माध्यम से केनवास पर उतारने में जुटे रूसी कलाकारों को अपना दौरा बीच में ही छोड़ वापस रूस जाना पड़ा हैं। दरअसल, युद्ध के चलते रूस के कलाकारों पर न सिर्फ भारत सरकार की नजर बढ़ गई है बल्कि इनके क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड सीज  करने की सूचना मिल रही है।जयपुर की कलाकार श्रेयांसी सिंह अपनी संस्था, कला एवम संस्कृति विभाग की ओर से तहत कार्यक्रम के तहत लगभग दस चित्रकार बीकानेर में डेरा डाले हुए थे। इन्हीं में एक एट्रोनी भी है एट्रोनी की मां युक्रेन से  है लेकिन उसके पिता रूसी हैं। एट्रोनी पिछले दो दिन से बीकानेर के ऐतिहासिक इमारतों के चित्र उकेर रही थीं। उनसे कई तरह की पूछताछ भी हुई, जिसके बाद वो खासी परेशान हो गई बताई जा रही हैं। बताया जा रहा है कि इन रूसी कलाकारों के क्रेडिट कार्ड भी सीज हो रहे हैं। ऐसे में एंटोनिना सहित अन्य रूसी कलाकार शनिवार सुबह ही दिल्ली के लिए निकल गए। जयपुर की कलाकार श्रेयांसी सिंह के आर्ट इको प्रोजेक्ट के तहत अभी कुछ दिन और बीकानेर रहना था लेकिन अब वो वापस लौट गई हैं। मीडिया से बातचीत में उसने इतना ही कहा कि युद्ध से किसी का भला नहीं होता, हम सभी पहले की तरह फिर मित्रवत हो जाएंगे। उसने बताया कि वो पहली बार भारत यात्रा पर आई है। बीकानेर की ऐतिहासिक इमारतों सौंदर्य को देखकर बेहद खुश थीं। 

क्या है आर्ट इको प्रोजेक्ट
श्रेयांसी सिंह ने बताया कि वे देशी विदेशी चित्रकार ऐतिहासिक स्थानों के चित्र बनाते हैं। जिनकी भारत व रूस के विभिन्न इलाकों में  पर प्रदर्शनी लगाई जाती हैं। आर्ट इको प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य अपनी कूंची के माध्यम से मन की शांति और स्थिरता की वकालत करना हैं। लेकिन युद्ध के चलते इन्हे भारत का अपना दौरा बीच में ही छोड़कर वापस जाना पड़ा हैं।

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अजमेर जिले के किशनगढ़ के दो छात्र भी यूक्रेन में फंसे

अजमेर जिले के मार्बल सिटी किशनगढ़ के दो छात्र भी यूक्रेन में फंसे हुए हैं दोनो युवाओ के परिजन जब से युद्ध शुरू हुआ तब से परेशान हैं। ईश्वर और सरकार से हरपल अरदास कर रहे है कि उनके लाडले जल्द से जल्द घर लौट आए। परिवार के लोगो ने बताया कि विडबंना ये हो गई को दोनों बच्चों के हवाई यात्रा के टिकट बन चुके थे और वे उसी विमान से लौटने वाले थे। लेकिन दुर्भाग्यवश युद्ध शुरू होने की खबर के साथ ही यूक्रेन में लैंड करने के बाद वापस लौट आया। जब से विमान वापस लौटा तब से पूरे परिवार की लोग सहमे हुए है। गांधीनगर थाना क्षेत्र में कृष्णा मेडिकल स्टोर संचालक एवं रियल स्टेट से जुड़े व्यवसायी दिलीप सिंह के दो बच्चे कृष्णपाल सिंह एवं आदित्य सिंह राठौड़ यूक्रेन के ललीव शहर में एक मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस करने के लिए अध्ययनरत हैं। छात्रों के पिता   अपना दर्द छुपा कर इसलिए मजबूती के साथ डटे है कि परिवार के लोग भयभीत ना हो घर मे सुबह शाम टीवी के सामने समाचार देख ईश्वर से विनती कर रहे हैं कि जल्द हालत सही हो और उनके लाडले घर पहुचे। परिवार में सभी को उम्मीद है कि जल्द ही हालत सुधरंगे और दोनों लाड़ले घर लौट आएंगे।

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किशनगढ़ के एयरपोर्ट पर दिल्ली से चार स्टूडेंट्स पहुंचीं

यूक्रेन-रूस संकट के बीच वहां रह रहे छात्रों के घर लौटने का सिलसिला जारी है। मार्बल सिटी किशनगढ़ के एयरपोर्ट पर दिल्ली से चार स्टूडेंट्स को लेकर स्पाइस जेट की फ्लाइट पहुंची। किशनगढ एयरपोर्ट पहुंची चार छात्राएं-  स्नेहा सूज़न जॉर्ज, स्वर्णिमा सिंह, कृतज्ञा आचार्य और हर्षिता सिंह के एरपोर्ट से बाहर आते ही परिवार से मिलकर खुशी के आंसू झलक गए। चारों छात्राएं ब्यावर, नागौर और अजमेर की रहने वाली हैं। घर लौट कर इनके चेहरे पर खुशी छुपाए नहीं छिपी और यूक्रेन में दहशत के माहौल की आपबीती भी साझा की। 

छात्राओं ने बताया कि यूक्रेन में ट्रेन, सड़क मार्ग व हवाई मार्ग बंद होने से हालत गंभीर होते जा रहे है। स्वदेश लौटी छात्राओं ने बताया कि राजस्थान के करीब 3500 छात्र अभी भी वहां फंसे हुए है और इंटरनेट व वेबसाइट बंद होने से उनकी परिजनों से बातचीत भी नही हो पा रही है। किशनगढ़ एयरपोर्ट पहुंची छात्राओं को रिसीव करने के लिए एसडीएम परसाराम सैनी पहुंचे और उन्हें सुरक्षित घर तक पहुंचाने के बंदोबस्त किए।

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