Dausa News: चारागाह भूमि पर जीएसएस के विरोध में उग्र प्रदर्शन, मवेशियों लेकर एसडीएम कार्यालय पहुंचे ग्रामीण
महवा क्षेत्र के कुतकपुर गांव में चारागाह भूमि बचाने की मांग को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया। 168 दिनों से धरने पर बैठे ग्रामीण आज गोवंश और भेड़-बकरियां लेकर ज्ञापन देने एसडीएम कार्यालय पहुंचे।
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जिले के महवा क्षेत्र के कुतकपुर गांव में चारागाह भूमि पर 220 केवी जीएसएस (ग्रिड सब स्टेशन) बनाने के विरोध में ग्रामीण पिछले 168 दिनों से धरने पर बैठे हैं। गुरुवार को इसी क्रम में विरोध तेज करते हुए ग्रामीण गोवंश और भेड़-बकरियों के साथ एसडीएम कार्यालय की ओर पैदल कूच के लिए निकल पड़े।
हिण्डौन रोड स्थित देवी माता मंदिर से शुरू हुए इस पैदल कूच में बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष महवा कस्बे की ओर बढ़ते हुए सरकार और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ नारेबाजी करते नजर आए। कूच के कारण महवा-हिंडौन स्टेट हाईवे पर लंबा जाम लग गया, जिसके बाद पुलिस को ट्रैफिक डायवर्ट करना पड़ा।
जब पैदल कूच एसडीएम कार्यालय पहुंचा तो ग्रामीणों ने कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान अंदर प्रवेश करने की कोशिश में पुलिस और युवाओं के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। पुलिस ने मवेशियों के साथ पहुंचे लोगों को कार्यालय परिसर के बाहर ही रोक दिया, जिसके बाद ग्रामीण वहीं धरने पर बैठ गए।
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महिलाओं ने एसडीएम को दिलाई सौगंध
ज्ञापन के दौरान महिलाओं ने एसडीएम मनीषा रेशम को समस्या का समाधान कराने की सौगंध दिलाई। इस पर एसडीएम ने मुस्कुराते हुए आश्वासन दिया कि मांग पत्र सरकार तक भेजा जाएगा।
जानकारी के अनुसार सरकार ने पहले खोहरा मुल्ला-मातासूला क्षेत्र के लिए 220 केवी जीएसएस स्वीकृत किया था। विरोध के बाद इसे कुतकपुर गांव की चारागाह भूमि में स्थानांतरित कर दिया गया, जिसका ग्रामीण लगातार विरोध कर रहे हैं।
पूर्व जिला प्रमुख कर रहे आंदोलन का नेतृत्व
पैदल कूच का नेतृत्व पूर्व जिला प्रमुख अजीत सिंह कर रहे थे। उन्होंने कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों को पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद 170 दिनों से चल रहे आंदोलन पर सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो एक माह बाद सर्वसमाज के लोग विधायक जनसुनवाई केंद्र के बाहर धरना देंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि चारागाह भूमि के आवंटन को रद्द करने की मांग को लेकर वे पिछले 168 दिनों से लगातार आंदोलन कर रहे हैं। ग्रामीणों ने दीपावली और होली जैसे त्योहार भी धरना स्थल पर ही मनाए। उनका कहना है कि जब तक चारागाह भूमि बचाने की मांग पूरी नहीं होगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
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