Dausa News: शिकायतकर्ताओं को सुनवाई के लिए बुलाकर जिम्मेदार गायब, मनरेगा से जुड़ा है मामला
मनरेगा मजदूरों की माने तो पिछले दिनों उनके पास दो फरवरी को अपनी शिकायत के सत्यापन को लेकर तथ्यात्मक जानकारी सहित आईटी केंद्र पर बुलाने का फरमान भेजा गया। जब शिकायतकर्ता मजदूर आईटी केंद्र पर पहुंचे तो वहां उन्हें कोई भी जिम्मेदार कार्मिक नहीं मिला।
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पिछले दिनों दौसा जिले की लवाण पंचायत समिति अंतर्गत ग्राम पंचायत सिंगवाड़ा में महात्मा गांधी मनरेगा योजना में कार्य करने वाले मजदूरों ने बिना कार्य किए ही अपने खाते में पैसे आने के मामले में जिला परिषद को शिकायत दी थी। शिकायत में काफी समय गुजर जाने के बाद भी लीपापोती का खेल जारी है। मनरेगा शिकायतकर्ता मजदूरों की माने तो बीते साल सितंबर और अक्तूबर महीने में उन्होंने मनरेगा योजना में काम नहीं किया था। लेकिन बाद में उनके खातों में पैसा आ गया, जिसे गलती से आना बताते हुए वापस निकलवा लिया गया। इस तरह का आरोप मनरेगा मजदूरों ने लगाया था, जिसकी जांच के लिए इन मजदूरों को सिंघवाड़ा पंचायत बुलवाया गया। लेकिन जिन लोगों ने इन्हें सुनवाई के लिए बुलाया वही पंचायत पर नहीं आए।
इस प्रकरण में जहां एक ओर तो बिना काम किए ही खाते में राशि आने से मजदूर खुश हुए। लेकिन जब उनके खाते से वापस पैसा वापस निकलवा लिया और उन्हें पता लगा कि उनके दिन भी कार्य करने में गिन लिए गए हैं तो उन्हें गहरा धक्का लगा। मनरेगा मजदूरों ने इस मामले की शिकायत जिला परिषद में मुख्य कार्यकारी अधिकारी को दी। इस शिकायत में मनरेगा मजदूरों ने बताया कि उन लोगों के नाम फर्जी मास्टररोल में चढ़ाकर सरकारी राशि का गबन हुआ है। इसी लिखित पर जांच करने की कार्रवाईयां शुरू हुई। हालांकि, इस प्रकरण में कौन और किस स्तर पर जांच अधिकारी है और उनमें क्या कार्रवाईयां चल रही हैं, इन सब बातों से मनरेगा मजदूर अपने आप को आज तक भी अनजान बता रहे हैं।
मनरेगा मजदूरों की माने तो पिछले दिनों उनके पास दो फरवरी को अपनी शिकायत के सत्यापन को लेकर तथ्यात्मक जानकारी सहित आईटी केंद्र पर बुलाने का फरमान भेजा गया। जब शिकायतकर्ता मजदूर आईटी केंद्र पर पहुंचे तो वहां उन्हें कोई भी जिम्मेदार कार्मिक नहीं मिला। शिकायतकर्ताओं की माने तो वो लोग अपने उनको बताए समय पर ही आईटी केंद्र पर पहुंच गए, लेकिन वहां कोई भी जिम्मेदार नहीं था, जिन्होंने इनको बुलाया था, जिसके चलते ये लोग काफी देर इंतजार कर धक्के खाकर वापस लौट आए।
लवाण पंचायत समिति की ओर से शिकायतकर्ता मजदूरों को भेजे गए पत्र में साफ शब्दों में उल्लेख किया है कि यदि आप निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं हुए और साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए तो आपकी शिकायत को झूठी एवं निराधार मानकर शिकायत को बंद कर दिया जाएगा। साथ ही आपके विरूद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी, जिसके लिए आप स्वंय जिम्मेदार होंगे।
अब इस मामले में शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पंचायत समिति प्रशासन अनावश्यक दबाव बनाने की नीति के चलते कागजी कार्रवाई कर उन्हें परेशान कर रही है, जिससे उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद अब न के बराबर दिखाई पड़ रही है। हालांकि, यह मामला अब कई महीना पुराना होता चला जा रहा है। लेकिन इस मामले की गहराई से जांच की जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी सामने आ पाएगा।