अब राजस्थान में 'वीर' नहीं रहे सावरकर, किताबों में हुए यह बदलाव

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Updated Fri, 14 Jun 2019 12:58 PM IST
विज्ञापन
वीर सावरकर (फाइल फोटो)
वीर सावरकर (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें
राजस्थान में पिछले साल दिसंबर में कांग्रेस सत्ता पर काबिज हुई। अशोक गहलोत की सरकार ने राज्य बोर्ड के अतंर्गत आने वाले स्कूलों के छात्रों की किताबों में कई बदलाव किए हैं। इनमें ऐतिहासिक घटनाओं, शख्सियतों से लेकर भाजपा सरकार के कार्यकाल में लिए गए फैसलों तक को बदल दिया गया है। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (आरबीएसई) के लिए ताजा प्रकाशित पुस्तकें राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक बोर्ड (आरएसटीबी) द्वारा बाजार में वितरित की गई हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार यह बदलाव इस साल 13 फरवरी को गठित पाठ्यपुस्तक समीक्षा समिति द्वारा की गई सिफारिशों के बाद किए गए हैं ताकि यह अध्ययन किया जा सके कि राजनीतिक हितों की पूर्ति और इतिहास के साथ छेड़छाड़ करके स्कूल की पाठ्यपुस्तकों में पहले क्या बदलाव किए गए थे। आइये आपको बताते हैं कि किताबों में पहले क्या लिखा था और अब क्या लिखा है:-
 
पुरानी किताब- 12वीं की इतिहास की किताब में स्वतंत्रता संग्राम वाले अध्याय में सावरकर के नाम के आगे पहले वीर लिखा था। इस अध्याय में स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में दिए उनके योगदान के बारे में काफी विस्तार से लिखा गया था। नई किताब- सावरकर के नाम से वीर शब्द हटा दिया गया है और उनका नाम अब विनायक दामोदर सावरकर हो गया है। इसमें बताया गया है कि कैसे अंग्रेजों ने सेल्यूलर जेल में उन्हें प्रताड़ित किया था। उन्होंने दूसरी दया याचिका में खुद को पुर्तगाल का बेटा बताया था। उन्होंने अंग्रेजों को चार बार दया याचिका भेजी। सावरकर ने भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की तरफ कार्य किया। 
पुरानी किताब- 10वीं की सामाजिक विज्ञान की किताब में लिखा गया था कि मुगल सम्राट अकबर महाराणा प्रताप को मारने और उनके राज्य पर कब्जा करने में असफल रहे थे। महाराणा प्रताप के पक्ष में हल्दीघाटी के युद्ध के लिए यह तर्क दिया गया कि मुगल सेना ने मेवाड़ की सेना का अनुसरण नहीं किया और भय में समय बिताया। नई किताब- हल्दीघाटी के युद्ध का हिस्सा प्रताप के युद्धा का मैदान छोड़ने और उनके घोड़े चेतक के मरने पर खत्म होता है। इसमें लिखा गया है कि महाराणा प्रताप और अकबर के बीच धार्मिक युद्ध नहीं हुआ था बल्कि दो राजनीतिक ताकतों के बीच श्रेष्ठता का टकराव था। 
पुरानी किताब- 12वीं की राजनीति विज्ञान किताब में नोटबंदी को काले धन का सफाई अभियान बताया गया था। इसमें बताया गया था कि कैसे नोटबंदी ने भ्रष्टाचार और विदेशी नीति पर असर डाला। नई किताब- नई किताब में नोटबंदी से संबंधित सभी संदर्भ हटा दिए गए हैं।
पुरानी किताब- जातिवाद और सांप्रदायिकता वाले अध्याय में मुस्लिम संगठनों जैसे जमात-ए-इस्लाम, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल और सिमी के नाम लिखा गया था। नई किताब- मुस्लिम संगठनों के अलावा इसमें हिंदू महासभा के नाम को राजनीतिक संगठनों की सूची में जोड़ा गया है जो स्वार्थ के लिए विभाजनकारी विचारों का प्रचार करते हैं।
पुरानी किताब- 12वीं की राजनीतिक विज्ञान की किताब में भारत के अपने पड़ोसियों (पाकिस्तान, चीन और नेपाल) के साथ संबंधों को लेकर लिखा गया गया है कि भारत-विरोधी नीति और जिहाद भारत-पाकिस्तान संबंधों को प्रभावित करने वाली समस्याओं की सूची में शामिल है। नई किताब- जिहाद शब्द को किताब से हटा दिया गया है।
पुरानी किताब- 12वीं की इतिहास की किताब में 'मुस्लिम हमला- उद्देश्य और प्रभाव' अध्याय में कहा गया है कि अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ पर हमला इसलिए किया क्योंकि वह महाराजा रतन सिंह की खूबसूरत पत्नी पद्मिनी को पाना चाहता था।  नई किताब- किताब में पुराने कारण को जस का तस रखा गया है। इसके अलावा कहा गया है कि शिक्षाविद केएस लाल, कानूनगो और हबीब नहीं मानते कि केवल पद्मिनी ही चित्तौड़ पर हुए हमले के पीछे का कारण थीं। 
विज्ञापन

 

राजस्थान के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है कि पाठ्यक्रम अपडेट करना एक सतत प्रक्रिया है। उन्होंने कहा, 'हमने शिक्षाविदों की एक समिति बनाई और कई ऐसे पाठ्यपुस्तकों में गलतियां पाईं जिनमें ऐसे मामले शामिल थे जिसमें इतिहास के छेड़छाड़ करके उसे प्रस्तुत किया गया था। हमारे पास इसमें कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है। हमने समिति की सिफारिशों के आधार पर बदलाव किए हैं। लेकिन भाजपा के कार्यकाल में उन्होंने एनसीईआरटी के सिलेबस को बदलकर आरएसएस की विचारधारा को थोपा और किताबों को बदल दिया। जिसमें हजारों करोड़ रुपये खर्च हुए।'
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
  • Downloads

Follow Us