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Chittorgarh : मनोकामना पूरी होने पर सांवलिया सेठ को भेंट किया चांदी का रावण, जानें क्यों किया ऐसा

Mon, 27 Jan 2025 01:12 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्तौड़गढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्तौड़गढ़ Published by: प्रिया वर्मा Updated Mon, 27 Jan 2025 01:12 PM IST
सार

जिले के सांवलिया सेठ मंदिर में मनोकामना पूर्ण होने पर एक भक्त ने भगवान को चांदी से बना रावण भेंट किया। जानिये रावण भेंट करने के पीछे क्या है कहानी

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Chittorgarh: Ravana gifted silver to Sanwaliya Seth after his wish was fulfilled, know why he did this
राजस्थान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान के सांवलिया सेठ मंदिर में भक्तों की अटूट आस्था और चमत्कारों की कहानियां अक्सर सुनने को मिलती हैं। इसी कड़ी में जिले के बड़ी सादड़ी निवासी छोटूलाल वाल्मीकि ने अपनी मनोकामना पूरी होने पर भगवान सांवलिया सेठ को चांदी का रावण भेंट किया। यह रावण 141 ग्राम चांदी से निर्मित है और इसे छोटूलाल ने दशहरे पर अपनी प्रार्थना के सफल होने की खुशी में चढ़ाया।

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दरअसल दशहरे के मौके पर छोटूलाल वाल्मीकि ने निंबाहेड़ा में प्रदेश के सबसे बड़े 76 फीट ऊंचे रावण के पुतले का निर्माण किया था। इसके अलावा नाथद्वारा और कोटा में भी पुतलों के निर्माण के ठेके लिए थे लेकिन दशहरे से कुछ दिन पहले 9 अक्टूबर को बारिश शुरू हो गई, जो लगातार 11 अक्टूबर तक जारी रही। मौसम विभाग ने भी दशहरे के दिन बारिश की संभावना जताई थी, जिससे छोटूलाल निराश हो गए।
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ऐसे में छोटूलाल ने भगवान सांवलिया सेठ से मनोकामना की कि यदि रावण दहन बिना किसी बाधा के हो गया, तो वे मंदिर में चांदी का रावण भेंट करेंगे। 12 अक्टूबर को दशहरे के दिन, मौसम विभाग की चेतावनियों के बावजूद बारिश थम गई। छोटूलाल ने तुरंत कार्य शुरू कर रावण, कुंभकर्ण, और मेघनाद के पुतलों का निर्माण पूरा किया। हालांकि शाम होते-होते बादल फिर से घिर आए लेकिन रावण दहन से पहले मौसम साफ हो गया। इसके बाद सभी पुतलों का दहन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
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छोटूलाल ने इसे भगवान सांवलिया सेठ का चमत्कार मानते हुए मनोकामना पूरी होने पर चांदी से बना रावण भेंट करने का संकल्प पूरा किया।

छोटूलाल ने बताया कि दशहरे के समय बारिश ने उन्हें निराश कर दिया था, और वे काम छोड़ने का मन बना चुके थे लेकिन भगवान सांवलिया सेठ की कृपा से न केवल रावण दहन हुआ, बल्कि तीनों स्थानों पर उनका काम भी सफल रहा। उन्होंने बताया कि निंबाहेड़ा का 76 फीट ऊंचा रावण इस बार प्रदेश में सबसे बड़ा था और इसे जलाने का सौभाग्य उन्हें मिला।

सांवलिया सेठ मंदिर के सदस्य संजय मंडोवरा ने बताया कि छोटूलाल ने रविवार शाम चांदी का रावण भेंट किया। मंदिर में श्रद्धालु अक्सर अपनी मनोकामना पूरी होने पर सोने-चांदी के चढ़ावे चढ़ाते हैं। सांवलिया सेठ को कई व्यापारी अपने व्यवसाय का भागीदार भी मानते हैं और उनकी आय का एक हिस्सा मंदिर को अर्पित करते हैं।


छोटूलाल ने बताया कि इस बार प्रदेश के कई इलाकों में बारिश के कारण रावण के पुतले भीग गए थे। लेकिन उनके निर्माण स्थलों- निंबाहेड़ा, नाथद्वारा और कोटा में बारिश रुकने से दहन कार्य सुचारू रूप से संपन्न हुआ। यह भगवान सांवलिया सेठ की कृपा का ही परिणाम है।

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