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Rajasthan: जिसने नहीं देखी बैंक की चौखट, उसी का घर सील, पड़ोसी के यहां लेनी पड़ी शरण
Sat, 28 Dec 2024 09:57 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, चित्तौड़गढ़
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, चित्तौड़गढ़
Published by: अरविंद कुमार
Updated Sat, 28 Dec 2024 09:57 PM IST
सार
चित्तौड़गढ़ पंचायत समिति के नेतावल महाराज ग्राम पंचायत के बैजनाथियां गांव का मामला है। यहां 24 दिसंबर को दोपहर एक बजे भारी पुलिस जाब्ते के साथ एयू बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों ने पूरणमल राव का घर सील कर दिया।
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घर पर चस्पा नोटिस
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
यदि किसी व्यक्ति ने बैंक में कदम न रखा हो और कभी भी बैंक से कोई ऋण भी नहीं लिया हो। इसके बाद भी बैंक के अधिकारी पुलिस के साथ आकर उसके घर को सील कर दें और पुलिस का पहरा बैठा दें तो उस आदमी पर क्या बीतेगी। ऐसा ही एक मामला चित्तौड़गढ़ पंचायत समिति के नेतावल महाराज ग्राम पंचायत के बैजनाथियां गांव में सामने आया है। यहां 24 दिसंबर को दोपहर एक बजे भारी पुलिस जाब्ते के साथ एयू बैंक के अधिकारियाें और कर्मचारियों ने पूरणमल राव का घर सील कर दिया।
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बता दें कि आनन-फानन में मौके पर पहुुंचे बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों ने पहले से लगा हुआ ताला तोड़कर खुद का ताला जड़ दिया। इसके घर के सारे कमरे सील चिट करके दो पुलिसकर्मियों को निगरानी के लिए पहरे पर भी बैठा दिया। हद तो यह हुई जब प्रार्थी ने इसके लिए जानकारी चाही तो बैंक अधिकारियाें ने चस्पा नोटिस बता दिया। अब पूरणमल किसी पड़ोसी के मकान में शरण लेकर रह रहा है। पूरणमल ने न तो कभी एयू बैंक की सीढ़िया चढ़ी है और न ही उस मकान पर ऋण लिया है।
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घर में ही रह गए जरूरी सामान
बैंक की ओर से सील किए मकान पर अचानक बैंक का ताला जड़ दिए जाने और सील चिट करने के कारण घर में जरूरी सामान भी अंदर ही रह गया। इससे कपड़े, बीमार पिता की दवाइयां, बच्चों के पढ़ने की पुस्तकें भी घर में पड़ी हैं। वहीं, कड़कड़ाती सर्दी और बरसात में परिवार सड़क पर आ गया, जिसे दूसरे के घर में शरण लेनी पड़ी।
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चंदेरिया थाने में रिपोर्ट दे लगाई गुहार
अचानक बैंक के बिना ऋण लिए घर को सील चिट कर दिए जाने के मामले में आसपास के लोग भी एकत्र हो गए और परेशान मकान मालिक ने अपने वकील के साथ चंदेरिया थाने में परिवाद प्रस्तुत कर न्याय की गुहार लगाई है। इधर, जानकारी है कि बैंक के द्वारा सील किए मकान और उसका मालिक का मेच नहीं हो पा रहा है। लेकिन बैंक द्वारा हठधर्मिता करते हुए मकान को सील कर दिया गया है। हो सकता है कि इस मकान पर फर्जी कागजात पेश कर दूसरे व्यक्ति ने ऋण ले लिया हो। लेकिन बिना पड़ताल किए बैंक द्वारा ऋण दिया जाना प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।
मैं कभी एयू बैंक नहीं गया और न ही मैंने कोई ऋण लिया। मेरे मकान का पट्टा भी नहीं है। कभी किसी ऋण में गारंटी भी नहीं दी है। लेकिन बैंक ने मेरे मकान को सील कर दिया है और मुझे दूसरे घर में रहना पड़ रहा है।
पूरणमल राव, पीड़ित, निवासी बैजनाथियां