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Chandrayaan-3: दौसा के साइंटिस्ट अशोक शर्मा थे सीनियर कंट्रोलर, मिशन मंगल में भी कर चुके काम, बधाइयों का तांता

Thu, 24 Aug 2023 02:18 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा Published by: अरविंद कुमार Updated Thu, 24 Aug 2023 02:18 PM IST
सार

दौसा जिले का नाम इसरो के इतिहास में लिखा जाएगा। क्योंकि चंद्रयान-3 की लैंडिंग के दौरान जब पूरा देश जश्न में डूबा था। ठीक उसी समय देश भर में दौसा का नाम रोशन करने यहां से नांगल बैरसी के वैज्ञानिक अशोक शर्मा को चंद्रयान की लैंडिंग के लिए अंतरिक्ष नियंत्रक के पद पर रहकर कंट्रोलिंग करने का मौका मिला।

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Chandrayaan-3 Scientist Ashok Sharma of Dausa was the senior controller also worked in Mission Mangal
साइंटिस्ट अशोक शर्मा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दौसा के नांगल बैरसी गांव में जन्मे अशोक कुमार शर्मा पुत्र लक्ष्मी नारायण शर्मा की चंद्रयान-3 अभियान और लैंडिंग में बड़ी भूमिका रही। अशोक शर्मा को उपग्रह संचालन टीम में अंतरिक्ष नियंत्रक के पद पर रहने का अवसर मिला। जो दौसा जिले और राजस्थान के लिए गौरव की बात है।

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बता दें कि इससे पूर्व अशोक कुमार शर्मा ने मिशन मंगल में भी काम किया है। बुधवार को जैसे ही चंद्रयान थर्ड चंद्रमा पर लैंड हुआ। वैसे ही इसरो साइंटिस्ट अशोक शर्मा के घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। आसपास के लोग खुशी मनाते हुए जयपुर स्थित अशोक शर्मा के घर के बाहर पटाखे जलाते और बधाई देते, मिठाई खिलाते नजर आए।
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अशोक कुमार शर्मा की मां गुलाब देवी और पिता लक्ष्मीनारायण बताते हैं कि अशोक का वैज्ञानिक बनने का प्रति बचपन से ही रुझान था, जिसके चलते अशोक कुमार शर्मा ने कंप्यूटर साइंस में बी.टेक करने के बाद एम.टेक की। अशोक शर्मा के छोटे भाई पंकज शर्मा ने बताया कि साल 2008 में अशोक का चयन इसरो में हुआ था। लगभग पांच साल बाद उनको मिशन मंगल में काम करने का मौका मिला।

साल 2016 में अशोक कुमार शर्मा का तबादला लखनऊ कर दिया गया। उसके बाद अशोक को मिशन चंद्रयान थर्ड के लिए लखनऊ से बेंगलुरु बुलाया गया और खुशी की बात यह है कि मिशन चंद्रयान थर्ड सफल हुआ और देश का नाम दुनिया के नक्शे पर स्वर्ण अक्षरों में सदा के लिए दर्ज हो गया। साथ ही भारत के नक्शे पर दौसा का नाम भी बड़े आदर सम्मान के साथ दर्ज हुआ है।

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