कांग्रेस और भाजपा को सता रहा बगावत का डर

समीर शर्मा/ब्यूरो, जयपुर Updated Fri, 01 Nov 2013 08:34 PM IST
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राजस्थान विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशी घोषित करने के मामले में दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंककर पीने की कहावत चरितार्थ कर रहे हैं।
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पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा को करीब 85 सीटों पर बागियों का सामना करना पड़ा था।
इन्हीं अनुभवों के चलते दोनों पार्टियां प्रत्याशियों को घोषित करने किसी तरह की जल्दबाजी नहीं कर रही हैं, जबकि नामांकन की तारीख 5 नवम्बर सामने हैं।
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इस बार तीसरे मोर्चे के तौर पर पीए संगमा की राजपा बागियों के स्वागत के लिए खड़ी है। इस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरोड़ी लाल मीणा, मीणा बाहुल्य क्षेत्रों में आधा दर्जन सीटों से भी अधिक पर अपना प्रभाव रखते हैं।

दोनों ही पार्टियां अपना खेल बिगड़वाना नहीं चाहती, इस कारण बागियों से निपटने की रणनीति पर भी लगातार काम चल रहा है।

देरी से करेंगे नाम घोषित
भाजपा और कांग्रेस दीपावली के बाद पहले सौ से भी कम सीटों पर प्रत्याशी घोषित करेंगी। ये वे सीटें होंगी, जहां असंतोष की आशंका काफी कम होगी।

इसके बाद दूसरी सूची इसके कुछ दिन बाद जारी होगी। दोनों पार्टियों के सूत्रों ने बताया बागियों को अधिक समय नहीं देने के कारण ही विवादित सीटों पर प्रत्याशियों के नाम देरी से उजागर किए जाएंगे।

जल्दी करने पर दोनों पार्टियां किरोड़ी लाल मीणा से हाथ मिलाने का खतरा महसूस कर रही हैं।

राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन 5 से 12 नवम्बर तक भरे जाने हैं। जबकि 200 विधानसभा सीटों पर दोनों प्रमुख पार्टियों ने अब तक एक भी प्रत्याशी घोषित नहीं किया है।

कड़वा रहा पिछला अनुभव
पिछली बार भी दोनों ही पार्टियों में टक्कर कांटे की थी, लेकिन बागियों के कारण भाजपा वापस सरकार नहीं बना पाई थी, तो कांग्रेस को भी पूर्ण बहुमत नहीं मिला था। पिछली बार दोनों ही पार्टियों को करीब 85 सीटों पर बागियों से जूझना पड़ा था।

भाजपा के बागी रहे किरोड़ी लाल मीणा ने सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया था और भाजपा 78 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। मीणा ने पूरे मीणा समाज को भाजपा के खिलाफ संगठित कर लिया था।

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किरोड़ी लाल ने भाजपा को आधा दर्जन से अधिक सीटों पर नुकसान पहुंचाया था। इधर, कांग्रेस से जिन्हें टिकट नहीं मिला था, ऐसे दर्जन से अधिक निर्दलीय के रूप में जीत कर सामने आ गए।

हालांकि उन्होंने समर्थन कांग्रेस को दिया, जिनमें कृषि मंत्री हरजीराम बुरड़क, सहकारिता मंत्री परसादी लाल मीणा जैसे नाम थे। कांग्रेस को 96 सीटें मिली थी और सरकार बनाने के लिए कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लडऩेवालों से ही कांग्रेस में शामिल करना मजबूरी बन गया था।
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