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Rajasthan: नहरी क्षेत्र में कांग्रेस को घेरने के लिए भाजपा की नई केमिस्ट्री, हवा का रुख भांपकर होती है राजनीति

Sat, 18 Nov 2023 05:34 AM IST
जलज मिश्रा प्रेम प्रताप सिंह, जयपुर
प्रेम प्रताप सिंह, जयपुर Published by: जलज मिश्रा Updated Sat, 18 Nov 2023 05:34 AM IST
सार

2013 में हार के बाद भाटी ने मेघवाल से दूरी बना ली थी। भाटी को कुछ साल पहले भाजपा से अलग होना पड़ा था। एक दशक से भाटी या उनका परिवार किसी पद पर नहीं है, वो लगातार चुनाव हार रहे थे। कुछ समय पहले ही उन्हें पार्टी में शामिल किया गया।

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BJP new chemistry to corner Congress bikaner, sri ganganagar and Hanumangarh Rajasthan elections
Rajasthan Election 2023 - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

राजस्थान के नहरी क्षेत्र में मुख्यतः बीकानेर, श्रीगगानगर और हनुमानगढ़ जिले आते है। यहां की राजनीति हवा का रुख भांपकर तय होती है। इस विधानसभा चुनाव में नहरी इलाके में सत्तारूढ़ कांग्रेस की घेराबंदी करने के लिए भाजपा ने नई केमिस्ट्री तैयार की है। पिछले एक दशक से एक दूसरे के सियासी दुश्मन रहे केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल और राज्य के पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी के बीच दोस्ती हो गई है। इसका पूरे बीकानेर जिले के चुनावी समीकरण पर सीधा असर तय माना जा रहा है।
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2013 में हार के बाद भाटी ने मेघवाल से दूरी बना ली थी। भाटी को कुछ साल पहले भाजपा से अलग होना पड़ा था। एक दशक से भाटी या उनका परिवार किसी पद पर नहीं है, वो लगातार चुनाव हार रहे थे। कुछ समय पहले ही उन्हें पार्टी में शामिल किया गया। उनके पोते अंशुमान भाटी को बीकानेर के कोलायत विधानसभा सीट से मैदान में उतारा गया है। इस सीट से गहलोत सरकार के मंत्री भंवर सिंह भाटी तीसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं।
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गहलोत सरकार के तीन मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने नहरी क्षेत्र से निर्वाचित तीन विधायकों को मंत्री बनाया था। इसमें शिक्षा मंत्री बीडी कल्ला, ऊर्जा मंत्री भंवर सिंह भाटी और आयोजना गोविंद मेघवाल का नाम शामिल है। भाजपा की नई केमिस्ट्री से इन तीनों मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। खासतौर पर कोलायत विधानसभा से चुनाव लड़ रहे ऊर्जा मंत्री भंवर सिंह भाटी के लिए चुनाव निकालना कठिन काम हो गया है।
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नहरी क्षेत्र में आया चमत्कारिक बदलाव
बीकानेर के महाराज गंगा सिंह ने 1927 में गंग नहर शुरू कराई थी। 1958 में बीकानेर, श्रीगंगानगर जिले को जोड़ने वाली नहर परियोजना शुरू की गई। इसे 1984 में इंदिरा गांधी परियोजना नाम मिला। 204 किमी लंबी नहर का 35 किमी हिस्सा राजस्थान व 170 किलोमीटर हिस्सा पंजाब व हरियाणा में है। इससे राजस्थान के रेगिस्तान क्षेत्र में चमत्कारिक बदलाव हुआ है। सिंचाई से लेकर पीने और औद्योगिक क्षेत्र में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। 1994 में श्रीगंगानगर से अलग करके हनुमानगढ़ को अलग जिला बना दिया गया। इन तीनों ही जिलों को मिलाकर नहरी क्षेत्र कहा जाता है। बाद में जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, नागौर और चूरू में भी नहर का विस्तार किया गया है।

श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ में पंजाब का प्रभाव
श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिले पर पंजाब की राजनीति का प्रभाव है। संस्कृति भी एक जैसी ही है। पंजाब की तरह ही खेती-किसानी मजबूत है। ऐसे में कुछ सीटों पर आम आदमी पार्टी का भी हल्का प्रभाव नजर आ सकता है। दोनों ही जिलों में कांग्रेस-भाजपा में ही कांटे की टक्कर है।

मिठाई, नमकीन के लिए दुनिया में बीकानेर का नाम
बीकानेर मिठाई और नमकीन के लिए देश और दुनियाभर में जाना जाता है। यहां से बनने वाले ऊन से काफी बड़ा हैंडीक्राफ्ट उद्योग जुड़ा है। इस इलाके को मूंगफली के लिए भी जानता है। नहरी क्षेत्र विविधता भरा हुआ है। जहां बीकानेर में स्थानीय संस्कृति प्रभावित है। नातेदारी, रिश्तेदारी बीकानेर और आसपास के इलाके में ही होती है। बाहरी संपर्क नहीं होता, जबकि श्री गंगानगर और हनुमानगढ़ की संस्कृति बिल्कुल अलग है। इन दोनों ही जिलों की रिश्तेदारी नातेदारी पंजाब में भी होती है।

राजपूत, ब्राह्मण, एससी, मुस्लिम का प्रभाव
बीकानेर, हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर में  राजपूत, ब्राहमण, एससी और मुस्लिमों का प्रभाव है। राजस्थान इसी क्षेत्र में वामदल सबसे अधिक प्रभावी रहे हैं। सांसद, विधायक से लेकर प्रधान तक इसी इलाके से बनते रहे हैं। नहरी क्षेत्र में पानी के लिए आंदोलनों में कम्युनिस्ट की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। नहरी पानी और नहर से जुड़ी समस्याएं यहां की राजनीति को प्रभावित करती है। राज्य में ईस्ट कैनाल परियोजना बनाने की बात तो हो रही है, लेकिन इंदिरा गांधी नहर परियोजना की क्या स्थिति है। यह देखने के लिए सत्ता से लेकर विपक्ष तक तैयार नहीं है।

नहर मंत्री भी इसी संभाग से बनाया जाता है, लेकिन गहलोत ने दूसरे कैबिनेट विस्तार में बांसवाड़ा के महेंद्रजीत मालवीय को नहर मंत्री बना दिया, जिसका नहरी क्षेत्र से कोई सीधा जुड़ाव नहीं है। यह मुद्दा भी राजस्थान विधानसभा चुनाव में इस इलाके में हावी रहेगा। बीकानेर, श्रीगंगानगर की भी सीमाएं पाकिस्तान से लगी : रेगिस्तानी जिलों बीकानेर और श्रीगंगानगर की सीमाएं पाकिस्तान से लगी हैं। कई बार मादक पदार्थों की तस्करी और घुसपैठ की खबरें भी आती हैं। भारतीय सुरक्षा में सामरिक नजरिए से भी ये दोनों जिले महत्वपूर्ण हैं। थल सेना, वायु सेना और बीएसएफ तीनों का यहां फोकस रहता है।


माध्यमिक, प्राथमिक शिक्षा का मुख्यालय
बीकानेर में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा का मुख्यालय भी है। गहलोत की दो सरकारों के समय यहीं से विधायक बीडी कल्ला शिक्षा मंत्री बने। मौजूदा सरकार के शुरू में सीकर के लक्ष्मणगढ़ सीट से विधायक गोविंद सिंह डोटासरा को शिक्षा मंत्री बनाया गया था, लेकिन विवादों के कारण उन्हें हटा दिया गया। कांग्रेस सरकार में पहले भी कई ऐसे शिक्षा मंत्री रहे, जिन्हें विवादों के कारण हटा दिया गया था। इसमें मास्टर भंवर लाल मेघवाल शामिल रहे। राजस्व विभाग के अधिक कालोनाइजेशन का मख्यालय भी बीकानेर में है।
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