खड़ग शक्ति 2026: ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहला बड़ा कॉम्बैट ड्रिल, भारतीय थलसेना की युद्ध सोच में ऐतिहासिक मोड़
Bikaner News: बीकानेर के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में ‘खड़ग शक्ति 2026’ के तहत पश्चिमी कमान ने हाई-इंटेंसिटी कॉम्बैट अभ्यास शुरू किया। ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों पर आधारित यह ड्रिल बहु-डोमेन, तकनीक-संचालित और नेटवर्क-केंद्रित युद्ध सिद्धांतों की व्यापक परीक्षा है।
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भारतीय थलसेना ने आधुनिक युद्ध की तेजी से बदलती प्रकृति को ध्यान में रखते हुए इंडियन आर्मी के बैनर तले अभ्यास खड़ग शक्ति 2026 का आयोजन किया है, जो राजस्थान के बीकानेर स्थित महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित किया जा रहा है। यह अभ्यास पश्चिमी कमान के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहला बड़ा हाई-इंटेंसिटी कॉम्बैट ड्रिल है। इस अभ्यास में पश्चिमी कमान की स्ट्राइक कोर (जिसे ‘खड़ग कोर’ के नाम से भी जाना जाता है) पूरी युद्धक क्षमता के साथ भाग ले रही है। खड़ग शक्ति 2026 न केवल एक सैन्य अभ्यास है, बल्कि यह उस रणनीतिक बदलाव का प्रतीक है जिसमें भारतीय सेना पारंपरिक विशाल सैन्य जमावड़े के बजाय तेज, सटीक और तकनीक-संचालित अभियानों को प्राथमिकता दे रही है।
ऑपरेशन सिंदूर: उपमहाद्वीप में युद्ध की सोच बदलने वाला निर्णायक क्षण
मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ सीमित लेकिन तीव्र सैन्य संघर्ष, जिसे ऑपरेशन सिंदूर के नाम से जाना जाता है, दक्षिण एशिया में आधुनिक युद्ध का एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ। इस ऑपरेशन के दौरान नेटवर्क्ड ऑपरेशनल एनवायरनमेंट, रियल-टाइम इंटेलिजेंस, लंबी दूरी की प्रिसिजन स्ट्राइक और नई पीढ़ी के प्लेटफॉर्म जैसे मानव रहित हवाई प्रणालियां, स्टैंड-ऑफ हथियार, क्रूज मिसाइलें और लोइटर म्यूनिशन का व्यापक उपयोग देखने को मिला। इस संघर्ष ने यह स्पष्ट कर दिया कि बिना बड़े पैमाने पर जमीनी सैन्य मोबिलाइजेशन के भी रणनीतिक और सैन्य लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से हासिल किया जा सकता है। खड़ग शक्ति 2026 इन्हीं अनुभवों को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक ठोस कदम है।
मास मोबिलाइजेशन से ‘साइलेंट प्रिसिजन’ की ओर भारतीय सेना का बदलाव
सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि दुश्मन के उच्च-मूल्य सैन्य ठिकानों को, कई मामलों में पाकिस्तान के भीतर गहराई तक, बेहद सीमित जमीनी हलचल के साथ निशाना बनाया गया। दुश्मन के ड्रोन और मिसाइल खतरों को एकीकृत वायु रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताओं के जरिए “खामोशी से लेकिन अत्यंत प्रभावी ढंग से” निष्क्रिय किया गया। इस अनुभव ने भारतीय सेना की सोच को संख्या और दृश्य शक्ति प्रदर्शन से हटाकर गति, आश्चर्य, सटीकता और सूचना-प्रधान युद्ध की ओर मोड़ दिया है। खड़ग शक्ति 2026 इसी रणनीतिक बदलाव की व्यवहारिक परीक्षा है।
खड़ग शक्ति 2026: स्ट्राइक कोर की युद्धक क्षमताओं की कठोर कसौटी
अभ्यास खड़ग शक्ति एक द्विवार्षिक सैन्य अभ्यास है, जिसका उद्देश्य स्ट्राइक कोर की परिचालन और युद्धक क्षमताओं को एक सिम्युलेटेड हाई-इंटेंसिटी युद्धक्षेत्र में परखना है। 2026 संस्करण विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें पैदल सेना, बख्तरबंद और यंत्रीकृत बल, तोपखाना, इंजीनियरिंग इकाइयां, लॉजिस्टिक्स और हवाई परिसंपत्तियों को एकीकृत कर उच्च-गति अभियानों और समन्वित फायरपावर की वास्तविक परीक्षा ली जा रही है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर से मिले सबक केवल सिद्धांत तक सीमित न रहें, बल्कि वास्तविक युद्ध प्रक्रियाओं और निर्णय-निर्माण का अभिन्न हिस्सा बनें।
बहु-डोमेन ऑपरेशन्स: भविष्य के युद्ध का केंद्रबिंदु
खड़ग शक्ति 2026 का सबसे प्रमुख पहलू बहु-डोमेन ऑपरेशन्स पर इसका गहन फोकस है। इस अभ्यास में थल अभियानों को वायु शक्ति, अंतरिक्ष-आधारित इंटेलिजेंस, साइबर क्षमताओं और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के साथ पूरी तरह एकीकृत किया जा रहा है। यह इस वास्तविकता को स्वीकार करता है कि भविष्य के युद्ध केवल जमीन तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि एक साथ कई डोमेन्स में लड़े जाएंगे, जहां सूचना, नेटवर्क और कमांड-एंड-कंट्रोल की श्रेष्ठता निर्णायक भूमिका निभाएगी।
इंटेलिजेंस, सर्विलांस और इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस की निर्णायक भूमिका
ऑपरेशन सिंदूर ने यह स्पष्ट कर दिया कि आधुनिक युद्ध में इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रीकॉनिसेंस निर्णायक कारक हैं। इसी कारण खड़ग शक्ति 2026 में रियल-टाइम इंटेलिजेंस फ्यूज़न, लक्ष्य पहचान और एकीकृत वायु रक्षा प्रणालियों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। ड्रोन से लेकर मिसाइल तक, विभिन्न हवाई खतरों को पहचानने और निष्क्रिय करने की क्षमता को जमीनी आक्रामक अभियानों के साथ समानांतर रूप से परखा जा रहा है, जिससे संपूर्ण युद्धक्षेत्र में प्रभुत्व सुनिश्चित किया जा सके।
महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में अभ्यास का विस्तृत युद्धक्रम
भारतीय सूचना अधिकारी और पश्चिमी कमान के PRO डिफेंस शैलेश पाए के अनुसार, खड़ग शक्ति 2026 का संचालन एक सुव्यवस्थित और यथार्थपरक युद्धक्रम के तहत किया जा रहा है। अभ्यास की शुरुआत OP प्वाइंट 223 (वेस्ट कैंप–आर्टिलरी सेक्टर) पर आगमन और ओरिएंटेशन से होती है, इसके बाद अटैक हेलीकॉप्टरों द्वारा लक्ष्यों पर प्रहार, स्वार्म ड्रोन द्वारा फॉरजिंग और सर्विलांस तथा तोपखाने द्वारा डिग्रेडेशन फायर का अभ्यास किया जा रहा है। इसके साथ ही बख्तरबंद और यंत्रीकृत पैदल सेना द्वारा मैन्युवर एंड फायर, गन और रॉकेट्स द्वारा ‘शूट एंड स्कूट’ रेड, लोइटर म्यूनिशन और स्वार्म ड्रोन से लक्ष्य भेदन, इन्फैंट्री हथियारों से फायर और ऑब्जेक्टिव पर असॉल्ट तथा अंत में सभी हथियार प्रणालियों के साथ इंटीग्रेटेड फायरपावर का प्रदर्शन किया जा रहा है।
इंटर-आर्म्स और इंटर-सर्विस समन्वय की वास्तविक परीक्षा
यह अभ्यास केवल हथियार प्रणालियों की क्षमता का परीक्षण नहीं है, बल्कि भारतीय सेना के भीतर इंटर-आर्म्स और इंटर-सर्विस समन्वय की भी कठोर कसौटी है। पैदल सेना, बख्तरबंद बल, तोपखाना, इंजीनियर और लॉजिस्टिक्स इकाइयों के बीच गहन तालमेल के साथ-साथ हवाई परिसंपत्तियों के साथ समन्वय को वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में परखा जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य के युद्ध अभियान अलग-अलग इकाइयों के प्रयासों का योग न होकर एक पूर्णतः एकीकृत और संयुक्त अभियान हों।
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भू-राजनीतिक तनाव के बीच सिद्धांत और कार्यप्रणाली का परिष्कार
हालांकि ऑपरेशन सिंदूर के भू-राजनीतिक प्रभाव अब भी दक्षिण एशिया में महसूस किए जा रहे हैं, लेकिन सैन्य योजनाकारों के अनुसार खड़ग शक्ति 2026 का मूल उद्देश्य सिद्धांतात्मक और कार्यात्मक सुधार है। यह अभ्यास योजना-निर्माण, कमांड संरचना और ऑपरेशन के निष्पादन को उस वास्तविकता के अनुरूप ढालने का प्रयास है, जहां तकनीक-आधारित बहु-डोमेन युद्ध में निर्णय लेने की समय-सीमा लगातार छोटी होती जा रही है।
तैयारी, प्रतिरोधक क्षमता और भविष्य के युद्ध की झलक
खड़ग शक्ति 2026 तैयारी और प्रतिरोधक क्षमता का एक स्पष्ट रणनीतिक संदेश देता है। उन्नत युद्ध अवधारणाओं और उच्च-गति अभियानों का खुला अभ्यास यह दर्शाता है कि भारतीय थलसेना आधुनिक युद्ध परिदृश्य में प्रभावी ढंग से लड़ने और जीतने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह अभ्यास प्लेटफॉर्म-केंद्रित सोच से नेटवर्क-केंद्रित अभियानों की ओर, दृश्य सैन्य जमावड़े से ‘साइलेंट डॉमिनेंस’ की ओर और एकल-डोमेन युद्ध से पूर्णतः एकीकृत बहु-डोमेन युद्ध की ओर भारतीय सेना के संक्रमण को स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद के युग में, बीकानेर के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित खड़ग शक्ति 2026 भारतीय थलसेना की युद्ध तैयारी का एक ऐतिहासिक और निर्णायक पड़ाव बनकर उभरता है।