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Bharatpur: गड्ढे में डूबने से बच्चे की मौत, छात्रावास के निर्माण में पानी स्टोरेज के लिए खोदा गया था टैंक
Tue, 07 May 2024 10:16 PM IST
अर्पित याज्ञनिक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भरतपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भरतपुर
Published by: अर्पित याज्ञनिक
Updated Tue, 07 May 2024 10:16 PM IST
सार
परिजन बच्चे को तलाश रहे थे, तभी कुछ लोगों को बताया कि पास ही में छात्रावास बन रहा है, वहां पर एक गड्ढा है उसमें से बुलबुले निकल रहे हैं। वहां जकार देखा तो पानी के गड्ढे में बच्चे का शव पड़ा हुआ था।
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पीयूष का फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भरतपुर जिले के रूपवास थाना इलाके में एक पांच साल के बच्चे का शव पानी से भरे गड्ढे में मिला। बच्चा सुबह खेलते-खेलते घर से निकल गया था। तब से बच्चे के परिजन और पुलिस बच्चे को ढूंढ रहे थे। बाद में परिजन उसको ढूंढने निकले तो उसका शव पानी से भरे गड्ढे में मिला।
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बच्चे के पिता विशाल सैन ने बताया कि वह सुबह किसी काम से घर से जल्दी निकल गया था। घर में बच्चे की मां ईश्वरी देवी दोनों बच्चे पीयूष और उसकी डेढ़ साल की छोटी बहन जाह्नवी थी। करीब 8 बजे पीयूष खेलते-खेलते घर से बाहर निकल गया। जब पीयूष मां ने उसे घर में ढूंढा तो पीयूष नहीं मिला। ईश्वरी ने अपने ससुर वीरी सिंह को बताया। विशाल भी पीयूष के लापता होने की खबर सुनकर घर आ गया। सभी परिजन मिलकर पीयूष को ढूंढने लगे लेकिन, उसका कुछ पता नहीं लग पाया।
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पानी के गड्ढे में मिला बच्चे का शव
करीब तीन बजे घटना के बारे में रूपवास पुलिस को बताया गया। पुलिस भी जगह-जगह पीयूष को ढूंढती रही। शाम करीब 6 बजे एक व्यक्ति ने कुछ लोगों को बताया कि पास ही में छात्रावास बन रहा है वहां पर एक गड्ढा, जिसमें से बुलबुले निकल रहे हैं। तब पीयूष के परिजन वहां पहुंचे और गड्ढे में उतर कर पीयूष को ढूंढा। तब पीयूष का शव गड्ढे में पड़ा मिला। उसके बाद मौके पर पुलिस को बुलाया गया।
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पुलिस ने शव को मॉर्चरी में रखवा दिया। छात्रावास बनाने के लिए पानी स्टोरेज के लिए गड्ढा खोदा था। पीयूष के परिजनों ने बताया कि जिस गड्ढे में पीयूष का शव मिला था वह घर से 4 सौ मीटर की दूरी पर है। पास ही में छात्रावास बन रहा है। उसके लिए पानी स्टोरेज के लिए वहां गड्ढा खोदा गया था। गड्ढे करीब 8 से 10 फ़ीट गहरा है। पीयूष हमारा इकलौता बेटा था। पीयूष का पिता विशाल बाल कटिंग की एक छोटी दुकान चलाता है। जिस समय पीयूष घर से निकला था उस समय उसके बाबा वीरी सिंह भी मंदिर गए हुए थे।