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बाड़मेर में बदले सियासी समीकरण: साथ आए अमीन खान और फतेह, पंचायत चुनाव से पहले कांग्रेस ने तेज की एकजुटता
Fri, 09 Oct 2026 02:20 PM IST
हिमांशु सिंह बघेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेर
Published by: हिमांशु सिंह बघेल
Updated Fri, 09 Oct 2026 02:20 PM IST
सार
बाड़मेर में पंचायती राज चुनाव से पहले कांग्रेस ने गुटबाजी खत्म करने की कोशिश तेज कर दी है। शिव क्षेत्र में अमीन खान और फतेह खान के साथ आने से पार्टी को मजबूती मिलने की उम्मीद है। वहीं, भाजपा जिला प्रमुख बनाने की तैयारी में जुटी है और आरएलपी की सक्रियता से कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले के आसार हैं।
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बाड़मेर जिले में पंचायती राज चुनाव
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
बाड़मेर जिले में पंचायती राज चुनाव के पहले दो चरणों में मतदान होगा, जबकि मतगणना और परिणाम 20 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। नगर निकाय चुनाव में हार का सामना करने के बाद कांग्रेस पार्टी ने पंचायती राज चुनाव में अपनी गुटबाजी खत्म करने की कवायद तेज कर दी है। इसके तहत शिव विधानसभा क्षेत्र में पूर्व मंत्री अमीन खान और पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष फतेह खान के बीच तीन साल से जारी दूरी खत्म हो गई है। दोनों नेता अब एक मंच पर दिखाई दे रहे हैं। रामसर और बिजराड़ समेत विभिन्न क्षेत्रों में इन दोनों नेताओं को सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल के साथ एक ही वाहन में यात्रा करते और चुनावी गतिविधियों में भाग लेते देखा गया है।
कांग्रेस का प्रत्याशी चयन पर मंथन
कांग्रेस विधानसभा और उपखंड स्तर पर लगातार बैठकें आयोजित कर रही है। पार्टी कार्यकर्ता जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य के टिकट के लिए दावेदारों से आवेदन पत्र ले रहे हैं। शिव क्षेत्र में तीन साल पहले विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट नहीं मिलने पर फतेह खान ने बागी होकर चुनाव लड़ा था, जिससे अमीन खान के साथ उनके मतभेद गहरे हो गए थे। अब दोनों नेताओं के एक साथ आने से संगठन को मजबूती मिलने और मतभेद दूर होने की उम्मीद है। कांग्रेस जमीनी स्तर से मिले फीडबैक के आधार पर योग्य प्रत्याशियों के चयन पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
भाजपा की जिला प्रमुख बनाने की तैयारी
भारतीय जनता पार्टी जिले में पहली बार अपना जिला प्रमुख बनाने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतर रही है। पार्टी के नियुक्त प्रभारी विभिन्न विधानसभा और पंचायत समिति क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं की बैठकें ले रहे हैं। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष स्वरूपसिंह खारा भी मंडलवार पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से चर्चा कर रहे हैं। कई सीटों पर दो से पांच दावेदारों ने आवेदन दिए हैं। पार्टी वार्डवार पैनल तैयार कर संभावित प्रत्याशियों की जीत की संभावनाओं का आकलन कर रही है। इसके साथ ही शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ईडब्ल्यूएस सरलीकरण के मुद्दे पर रैलियां निकाल रहे हैं और शिव तथा गडरारोड क्षेत्रों में निर्दलीय उम्मीदवार उतारने की तैयारी में हैं।
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आरएलपी की सक्रियता से त्रिकोणीय मुकाबला
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की चुनाव में सीधी भागीदारी से जिला परिषद और पंचायत समिति की कई सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय होने के आसार बन रहे हैं। आरएलपी के मैदान में उतरने से जातीय और सामाजिक समीकरणों में बड़ा बदलाव आ सकता है। भाजपा के सामने अपने पारंपरिक वोट बैंक को एकजुट रखने और निर्दलीय प्रत्याशियों से मिलने वाली चुनौती से निपटने का दबाव है। वहीं, कांग्रेस आपसी मतभेदों को भुलाकर संगठन को मजबूत करने का प्रयास कर रही है। तीनों प्रमुख दल सर्वे और कार्यकर्ताओं से मिले फीडबैक के आधार पर अपने प्रत्याशियों के नाम तय करने में जुटे हैं।
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कांग्रेस का प्रत्याशी चयन पर मंथन
कांग्रेस विधानसभा और उपखंड स्तर पर लगातार बैठकें आयोजित कर रही है। पार्टी कार्यकर्ता जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य के टिकट के लिए दावेदारों से आवेदन पत्र ले रहे हैं। शिव क्षेत्र में तीन साल पहले विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट नहीं मिलने पर फतेह खान ने बागी होकर चुनाव लड़ा था, जिससे अमीन खान के साथ उनके मतभेद गहरे हो गए थे। अब दोनों नेताओं के एक साथ आने से संगठन को मजबूती मिलने और मतभेद दूर होने की उम्मीद है। कांग्रेस जमीनी स्तर से मिले फीडबैक के आधार पर योग्य प्रत्याशियों के चयन पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
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भाजपा की जिला प्रमुख बनाने की तैयारी
भारतीय जनता पार्टी जिले में पहली बार अपना जिला प्रमुख बनाने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतर रही है। पार्टी के नियुक्त प्रभारी विभिन्न विधानसभा और पंचायत समिति क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं की बैठकें ले रहे हैं। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष स्वरूपसिंह खारा भी मंडलवार पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से चर्चा कर रहे हैं। कई सीटों पर दो से पांच दावेदारों ने आवेदन दिए हैं। पार्टी वार्डवार पैनल तैयार कर संभावित प्रत्याशियों की जीत की संभावनाओं का आकलन कर रही है। इसके साथ ही शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ईडब्ल्यूएस सरलीकरण के मुद्दे पर रैलियां निकाल रहे हैं और शिव तथा गडरारोड क्षेत्रों में निर्दलीय उम्मीदवार उतारने की तैयारी में हैं।
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आरएलपी की सक्रियता से त्रिकोणीय मुकाबला
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की चुनाव में सीधी भागीदारी से जिला परिषद और पंचायत समिति की कई सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय होने के आसार बन रहे हैं। आरएलपी के मैदान में उतरने से जातीय और सामाजिक समीकरणों में बड़ा बदलाव आ सकता है। भाजपा के सामने अपने पारंपरिक वोट बैंक को एकजुट रखने और निर्दलीय प्रत्याशियों से मिलने वाली चुनौती से निपटने का दबाव है। वहीं, कांग्रेस आपसी मतभेदों को भुलाकर संगठन को मजबूत करने का प्रयास कर रही है। तीनों प्रमुख दल सर्वे और कार्यकर्ताओं से मिले फीडबैक के आधार पर अपने प्रत्याशियों के नाम तय करने में जुटे हैं।